गया जी. बिहार के गया जंक्शन पर उस समय भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया, जब रोज़ की भागदौड़, ट्रेनों की आवाज़ और यात्रियों की भीड़ के बीच एक महिला ने प्लेटफॉर्म पर ही बच्ची को जन्म दे दिया। अचानक हुए इस प्रसव ने कुछ पल के लिए पूरे स्टेशन को थाम लिया। हैरानी, घबराहट और चिंता के बीच जो सबसे बड़ी राहत की खबर सामने आई, वह यह रही कि माँ और नवजात बच्ची दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं। यह घटना देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लोग इसे इंसानियत, संवेदनशीलता और समय पर मदद की मिसाल के रूप में देख रहे हैं।
घटना गया जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर दो की बताई जा रही है। महिला किसी ट्रेन से यात्रा कर रही थी या यात्रा की तैयारी में थी, तभी उसे अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। आसपास मौजूद लोगों के लिए यह स्थिति पूरी तरह अप्रत्याशित थी। कुछ ही पलों में साफ हो गया कि अब अस्पताल ले जाने का समय नहीं है और वहीं तत्काल मदद की जरूरत है। स्टेशन पर मौजूद यात्रियों, रेलवे कर्मचारियों और महिला यात्रियों ने हालात को समझते हुए घबराने के बजाय संयम दिखाया और महिला को सहारा दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला दर्द से कराह रही थी और उसके चेहरे पर डर साफ झलक रहा था। ऐसे समय में प्लेटफॉर्म पर मौजूद कुछ महिलाओं ने हिम्मत दिखाई और आगे बढ़कर मदद की। रेलवे कर्मचारियों ने तुरंत स्टेशन प्रशासन को सूचना दी और प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराई गई। देखते ही देखते प्लेटफॉर्म पर ही एक सुरक्षित जगह बनाई गई और वहीं महिला ने बच्ची को जन्म दिया। कुछ ही मिनटों में स्टेशन पर मौजूद हर व्यक्ति की नजर उस नवजात पर टिक गई, जिसने शोर और अफरातफरी के बीच इस दुनिया में पहली सांस ली।
रेलवे प्रशासन की तत्परता भी इस घटना में अहम साबित हुई। सूचना मिलते ही मेडिकल टीम को बुलाया गया और एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। माँ और बच्ची दोनों को प्राथमिक जांच के बाद अस्पताल भेज दिया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को सामान्य और सुरक्षित बताया। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर मदद मिलने और घबराहट न फैलने की वजह से किसी तरह की जटिलता नहीं हुई।
इस घटना ने वहां मौजूद यात्रियों को भावुक कर दिया। कई लोगों की आंखें नम हो गईं। कुछ यात्रियों का कहना था कि उन्होंने पहली बार किसी स्टेशन पर ऐसा दृश्य देखा, जहां अफरा-तफरी की जगह सहयोग और संवेदनशीलता नजर आई। किसी ने पानी दिया, किसी ने कपड़े का इंतजाम किया, तो किसी ने प्रशासन को सूचना देने में मदद की। यह सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि कुछ ही समय में एक मुश्किल हालात खुशी के पल में बदल गए।
सोशल मीडिया पर जैसे ही यह खबर सामने आई, लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने लिखा कि यह घटना दिखाती है कि मुश्किल समय में आम लोग और सिस्टम मिलकर क्या कर सकते हैं। कुछ ने रेलवे कर्मचारियों और महिला यात्रियों की सराहना की, जिन्होंने बिना किसी औपचारिकता के मानवता को प्राथमिकता दी। वहीं कई लोगों ने यह भी कहा कि रेलवे स्टेशनों पर चिकित्सा सुविधाओं को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि ऐसे मामलों में और बेहतर मदद मिल सके।
गया जंक्शन जैसे बड़े स्टेशन पर हर दिन हजारों यात्री आते-जाते हैं। ऐसे में अचानक प्रसव जैसी स्थिति किसी के लिए भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भवती महिलाओं को यात्रा के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए और रेलवे को भी इस तरह की आपात स्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए। हालांकि इस घटना में जिस तरह से हालात संभाले गए, उसने यह साबित कर दिया कि थोड़ी सी संवेदनशीलता और तत्परता से बड़े संकट को टाला जा सकता है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह घटना सभी कर्मचारियों के लिए एक सीख भी है। स्टेशन केवल आने-जाने की जगह नहीं होते, बल्कि कई बार यहां जिंदगी के सबसे अहम पल भी घटित होते हैं। ऐसे में कर्मचारियों की जिम्मेदारी केवल टिकट और ट्रेन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाना भी उतना ही जरूरी होता है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि भविष्य में स्टेशनों पर प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं और आपात प्रशिक्षण पर और ध्यान दिया जाएगा।
महिला की पहचान और उसकी यात्रा से जुड़ी जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन इतना जरूर बताया गया है कि वह और उसकी बच्ची दोनों स्वस्थ हैं। अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। परिवार को भी सूचना दे दी गई है और वे जल्द ही अस्पताल पहुंचने वाले हैं। यह खबर सुनते ही स्टेशन पर मौजूद कई लोग राहत की सांस लेते नजर आए।
यह घटना केवल एक प्रसव की कहानी नहीं है, बल्कि यह समाज के उस चेहरे को भी सामने लाती है, जहां अनजान लोग भी एक-दूसरे के लिए परिवार बन जाते हैं। प्लेटफॉर्म पर मौजूद लोगों ने यह नहीं पूछा कि महिला कौन है, कहां से आई है या कहां जा रही है। उस पल केवल इतना मायने रखता था कि एक मां और उसके बच्चे की जान सुरक्षित रहे।
कुल मिलाकर, गया जंक्शन पर प्लेटफॉर्म पर हुआ यह प्रसव एक असाधारण घटना जरूर है, लेकिन उससे कहीं ज्यादा यह इंसानियत की असाधारण मिसाल बन गया है। ट्रेनों की सीटी, यात्रियों की भीड़ और रोजमर्रा की अफरातफरी के बीच जन्मी वह बच्ची अब हजारों लोगों के लिए उम्मीद और संवेदनशीलता की प्रतीक बन चुकी है। यह कहानी याद दिलाती है कि मुश्किल हालात में भी अगर लोग साथ खड़े हो जाएं, तो हर जगह सुरक्षित बन सकती है, चाहे वह अस्पताल हो या रेलवे स्टेशन।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

