पटना. बिहार की राजनीति एक बार फिर उस वक्त गर्मा गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस वीडियो में वह एक नवनियुक्त आयुष चिकित्सक का हिजाब नीचे करते हुए दिखाई दे रहे हैं। घटना के सामने आते ही विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाते हुए मुख्यमंत्री की कार्यशैली और मानसिक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने वीडियो साझा कर दावा किया कि यह घटना जदयू अध्यक्ष की “नियंत्रण से बाहर होती स्थिति” का प्रमाण है।
यह मामला सोमवार का बताया जा रहा है, जब पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय ‘संवाद’ में एक सरकारी कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में राज्य सरकार की ओर से एक हजार से अधिक आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र सौंपे जा रहे थे। इसी दौरान मंच पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नवनियुक्त डॉक्टरों से संवाद कर रहे थे। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि जब एक महिला चिकित्सक मुख्यमंत्री के सामने आती हैं, तो नीतीश कुमार अचानक उनका हिजाब नीचे कर देते हैं। वीडियो में मौजूद कुछ लोग असहज नजर आते हैं और क्षण भर के लिए माहौल में सन्नाटा छा जाता है।
सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। राजद और कांग्रेस के नेताओं ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया खातों पर वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अपने आचरण और शब्दों पर नियंत्रण खोते जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि हाल के महीनों में नीतीश कुमार के व्यवहार से जुड़े कई ऐसे प्रसंग सामने आए हैं, जिन्होंने जनता के बीच सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष ने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री का यह व्यवहार न केवल असंवेदनशील है, बल्कि यह अल्पसंख्यक समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला भी है।
राजद नेताओं ने बयान जारी कर कहा कि मुख्यमंत्री को एक संवैधानिक पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। एक महिला अधिकारी या चिकित्सक के पहनावे के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं हो सकता। कांग्रेस ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की और कहा कि यह बिहार सरकार की कार्यशैली और मुख्यमंत्री की सोच पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विपक्ष ने मांग की है कि मुख्यमंत्री इस घटना पर सार्वजनिक रूप से सफाई दें और माफी मांगें।
इस बीच सत्तारूढ़ जदयू की ओर से इस मामले पर संयमित प्रतिक्रिया देखने को मिली है। पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि वीडियो को गलत संदर्भ में देखा जा रहा है और मुख्यमंत्री का ऐसा कोई इरादा नहीं था। जदयू नेताओं ने दावा किया कि कार्यक्रम के दौरान हल्के-फुल्के माहौल में यह घटना हुई और इसे बेवजह तूल दिया जा रहा है। हालांकि पार्टी ने अब तक इस मुद्दे पर कोई औपचारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया है।
घटना ने बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। जहां विपक्ष इसे मुख्यमंत्री की मानसिक स्थिति से जोड़कर देख रहा है, वहीं समर्थक इसे राजनीतिक साजिश करार दे रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी माहौल में इस तरह के मुद्दे तेजी से तूल पकड़ते हैं और सोशल मीडिया के दौर में एक छोटा सा वीडियो भी बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले सकता है।
इस पूरे प्रकरण में महिला चिकित्सक की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार कार्यक्रम के बाद नियुक्ति पत्र वितरण की प्रक्रिया सामान्य रूप से पूरी की गई और कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। बावजूद इसके, वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद यह सवाल जरूर उठ रहा है कि क्या एक सार्वजनिक मंच पर इस तरह का व्यवहार उचित था।
बिहार में नीतीश कुमार लंबे समय से एक अनुभवी और संतुलित नेता के रूप में जाने जाते रहे हैं। उन्होंने सुशासन और सामाजिक समरसता को अपनी राजनीति का आधार बताया है। ऐसे में इस घटना ने उनके समर्थकों को भी असहज स्थिति में डाल दिया है। विपक्ष इस मुद्दे को आगे भी जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है और इसे आगामी राजनीतिक बहस का केंद्र बनाने की कोशिश कर रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे जुड़े सवाल आने वाले दिनों में विधानसभा से लेकर सड़कों तक गूंज सकते हैं। खासकर अल्पसंख्यक समुदाय और महिला सम्मान से जुड़े मुद्दों को लेकर यह मामला और संवेदनशील बन गया है। विपक्ष जहां इसे मुख्यमंत्री की विश्वसनीयता पर चोट मान रहा है, वहीं सत्तारूढ़ दल इसे राजनीतिक लाभ-हानि के तराजू पर तौलने में जुटा है।
फिलहाल पूरा राज्य इस बात का इंतजार कर रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या उनकी पार्टी इस विवाद पर क्या आधिकारिक रुख अपनाती है। क्या यह मामला एक स्पष्टीकरण के साथ शांत हो जाएगा या फिर यह बिहार की राजनीति में एक लंबे विवाद का रूप लेगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

