एमपी के टाइगर रिजर्व में मोबाइल फोन पर पूर्णत: प्रतिबंध, सुप्रीम कोर्ट का आदेश

एमपी के टाइगर रिजर्व में मोबाइल फोन पर पूर्णत: प्रतिबंध, सुप्रीम कोर्ट का आदेश

प्रेषित समय :19:30:53 PM / Tue, Dec 16th, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. मध्य प्रदेश, जिसे 'टाइगर स्टेट' का गौरव प्राप्त है, के वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन परिदृश्य में आज से एक ऐतिहासिक और कड़ा बदलाव आ गया है। सर्वोच्च न्यायालय के एक सख्त आदेश का पालन करते हुए, राज्य के सभी टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह खबर न केवल वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के बीच बल्कि पूरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गरमागरम बहस का विषय बनी हुई है। जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों, जहां से कान्हा और बांधवगढ़ जैसे विश्व प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व की यात्रा शुरू होती है, वहाँ के टूर ऑपरेटरों और पर्यटकों के बीच इस आदेश के प्रभाव और व्यावहारिकता को लेकर गहरी चर्चा चल रही है।

दरअसल, यह फैसला लंबे समय से चल रहे उस विवाद के बाद आया है जिसमें अत्याधुनिक तकनीक और वन्यजीवों की गोपनीयता तथा सुरक्षा के बीच संतुलन साधने की बात कही जा रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट किया कि आधुनिक गैजेट्स, विशेष रूप से मोबाइल फोन, कोर एरिया के भीतर वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार और शांत वातावरण को गंभीर रूप से बाधित कर रहे थे। पर्यटकों द्वारा तेज आवाज में बात करना, मोबाइल की घंटी बजना, और सबसे महत्वपूर्ण, फ्लैश के साथ तस्वीरें खींचना, वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में असहज कर रहा था। विशेष रूप से बाघों, तेंदुओं और अन्य संवेदनशील प्रजातियों के लिए यह मानवीय हस्तक्षेप खतरनाक साबित हो रहा था, जिससे उनके शिकार पैटर्न और प्रजनन चक्र प्रभावित हो रहे थे। इसके अलावा, कई बार पर्यटकों ने मोबाइल फोन का उपयोग करके पार्क अधिकारियों के निर्देशों का उल्लंघन किया, जोखिम वाले क्षेत्रों में जाकर खुद की और जानवरों की जान खतरे में डाली, और फिर इन हरकतों को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

नए आदेश के तहत, 16 दिसंबर 2025 से टाइगर रिजर्व के कोर जोन (Core Zone) में प्रवेश करते ही पर्यटकों और फील्ड स्टाफ को भी अपने मोबाइल फोन या तो जमा कराने होंगे या उन्हें पूरी तरह से स्विच ऑफ रखना होगा। हालांकि, बफर जोन (Buffer Zone) में यह प्रतिबंध उतना सख्त नहीं है, लेकिन वहाँ भी तेज़ आवाज़ में फोन पर बात करने या अनुचित उपयोग पर जुर्माना लगाया जा सकता है। इस नियम का उल्लंघन करने वालों पर कड़ा जुर्माना और यहां तक कि भविष्य में पार्क में प्रवेश पर प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है। इस आदेश ने खासकर उन युवा पर्यटकों को मायूस कर दिया है जो अपने सफारी अनुभव को तुरंत लाइव स्ट्रीम करने या सोशल मीडिया पर अपनी 'टाइगर साइटिंग' की तस्वीरें अपलोड करने के आदी थे। उनका तर्क है कि मोबाइल फोन आपात स्थिति में संपर्क बनाए रखने का एक मात्र जरिया होते हैं, खासकर तब जब जंगल के भीतर कोई अप्रिय घटना घट जाए।

दूसरी ओर, वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञ, प्रकृतिवादी और कोर फील्ड स्टाफ ने इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है। उनका मानना है कि यह प्रतिबंध वन्यजीवों के हित में उठाया गया एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। कान्हा टाइगर रिजर्व से जुड़े एक वरिष्ठ फील्ड डायरेक्टर ने बताया कि मोबाइल फोन की अनुपस्थिति से पर्यटक अब अधिक ध्यान केंद्रित कर पाएंगे और प्रकृति के असली सौंदर्य का अनुभव कर पाएंगे, बजाय इसके कि वे हर पल को कैमरे में कैद करने की चिंता में रहें। उनका मानना है कि इससे जंगल का प्राकृतिक 'ऑरा' बना रहेगा। हालांकि, प्रबंधन के सामने भी एक बड़ी चुनौती आ गई है। अब उन्हें कोर जोन में आपातकालीन संचार सुनिश्चित करने के लिए रेडियो संचार प्रणाली (Walkie-Talkies) को और मजबूत करना होगा, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति, जैसे कि वाहन का खराब होना या मौसम की अचानक खराबी, में पर्यटकों और फील्ड स्टाफ के बीच संपर्क बना रहे। इस नए नियम के लागू होने के बाद आज सुबह कोर गेट्स पर कई पर्यटकों को अपने मोबाइल फोन जमा कराते या उन्हें स्विच ऑफ करते देखा गया। कुछ पर्यटक उदास दिखे, जबकि कुछ ने नियम का सम्मान करते हुए इसे वन्यजीवों के लिए एक सकारात्मक कदम बताया।

पर्यटन उद्योग के जानकारों का कहना है कि यह नियम शुरुआती दिनों में पर्यटकों की संख्या पर मामूली नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह जिम्मेदार और पर्यावरण-सचेत पर्यटन को बढ़ावा देगा। जो पर्यटक वास्तव में प्रकृति और वन्यजीवों को देखने आते हैं, वे इस नियम को खुशी-खुशी स्वीकार करेंगे। इस फैसले के बाद अब यह देखना बाकी है कि राज्य सरकार और वन विभाग इस प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से कैसे लागू करते हैं और आपातकालीन संचार के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्थाएं करते हैं। सबसे बड़ी उत्सुकता इस बात को लेकर है कि क्या अन्य राज्यों के टाइगर रिजर्व भी जल्द ही मध्य प्रदेश के नक्शेकदम पर चलते हुए ऐसे ही सख्त प्रतिबंध लागू करेंगे। फिलहाल, मोबाइल मुक्त कोर जोन का यह निर्णय भारतीय वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक मील का पत्थर बन गया है, जो साबित करता है कि प्रकृति के संरक्षण के सामने आधुनिक सुविधाओं पर लगाम लगाना भी आवश्यक है। यह आदेश जंगल की उस चुप्पी और शांति को वापस लाने का प्रयास है, जिसे आधुनिक युग के गैजेट्स ने छीन लिया था।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-