अनिल मिश्र/ पटना
बिहार में अगर कोई भी बात हो उसमें अगर जाति नहीं आती तो कोई बात नहीं बनती. बिहार में सवर्ण वर्ग से आने वाली भूमिहार जाति के नाम के आगे ब्राह्मण शब्द जोड़ने की मांग पर बिहार में सियासत गरमाई हुई है.इस संबंध में भूमिहार संगठनों ने सकारी दस्तावेजों में उनकी जाति को भूमिहार-ब्राह्मण लिखे जाने की मांग की है. वहीं बिहार राज्य सवर्ण आयोग में इस पर एकराय नहीं बन पा रही है. कुछ सदस्यों ने भूमिहार के आगे ब्राह्मण शब्द को जोड़े जाने पर आपत्ति जताई. अब फैसला करने के लिए सवर्ण आयोग ने गेंद नीतीश सरकार के पाले में डाल दी है. अब देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार इस पर क्या फैसला लेगी, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं.
दरअसल 1931 की जनगणना में भूमिहार-ब्राह्मण नाम से जाति दर्ज की गई थी.वहीं बिहार में सरकारी दस्तावेजों में भी भूमिहार समाज के लोगों की जमीनों के खातियान में भूमिहार-ब्राह्मण शब्द लिखा जाता रहा. हालांकि, साल 2023 में हुई जाति आधारित गणना में इस जाति को केवल भूमिहार लिखा गया. इस पर कुछ संगठनों ने आपत्ति जताते हुए इसे भूमिहार ब्राह्मण किए जाने की मांग किया था.इस संबंध में उनका कहना है कि सरकारी दस्तावेजों में जाति के नाम में कंफ्यूजन पैदा होने से उनकी जमीन के मालिकाना हक प्रभावित होंगे.इस बीच अक्टूबर 2025 में बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने राज्य सवर्ण आयोग से मार्गदर्शन मांगा कि सरकारी दस्तावेजों में समुदाय को 'भूमिहार' लिखा जाए या 'भूमिहार ब्राह्मण'. इस मुद्दे पर सवर्ण आयोग की बीते एक महीने के भीतर तीन बार बैठकें हो चुकी हैं.
मगर इसका समाधान नहीं निकल पाया. दावा किया जा रहा है कि आयोग के कुछ सदस्य भूमिहारों को भूमिहार ब्राह्मण लिखने पर राजी नहीं हैं. हालांकि सवर्ण आयोग के अध्यक्ष महाचंद्र प्रसाद सिंह का कहना है कि इस बात पर किसी तरह का विवाद नहीं हैं. हाल ही में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि हर समाज में इस तरह की परिस्थिति आती है. 1931 का जो सरकारी रिकॉर्ड है उसी को आधार पर फैसला होगा. वहीं, रिपोर्ट्स के अनुसार आयोग के जो सदस्य इसका विरोध कर रहे हैं उनका कहना है कि कौन-सी जाति खुद को किस नाम से पुकारना चाहती है, यह उनका विशेषाधिकार होता है. इस तरह के विवादित मामलों को आयोग में नहीं लाना चाहिए.
अब बिहार में सवर्ण वर्ग में आने वाली भूमिहार जाति के नाम के आगे ब्राह्मण शब्द रखने की मांग पर सियासत शुरू हो है. वहीं भूमिहार संगठनों ने सरकारी दस्तावेजों में उनकी जाति को भूमिहार-ब्राह्मण लिखे जाने की मांग की है. जबकि बिहार राज्य सवर्ण आयोग में इस पर एकराय नहीं बन पा रही है. कुछ सदस्यों ने भूमिहार के आगे ब्राह्मण शब्द को जोड़े जाने पर आपत्ति जताई. अब आयोग ने गेंद नीतीश सरकार के पाले में डाल दी है. राज्य सरकार इस पर क्या फैसला लेगी, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई है.
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