अनिल मिश्र/ पटना
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं और देश की आंतरिक सुरक्षा पर गहरे सवालिया निशान लगा दिए हैं। भारत-नेपाल की खुली सीमा का फायदा उठाकर देश से फरार होने की फिराक में लगे भारतीय सेना के एक भगोड़े जवान राजबीर सिंह उर्फ फौजी को रक्सौल के हरैया थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी महज एक अपराधी की पकड़ नहीं है, बल्कि उस खतरनाक नार्को-आतंकी (Narco-Terror) गठजोड़ का पर्दाफाश है जो सीमा पार पाकिस्तान से संचालित हो रहा था। पंजाब स्थित स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल मोहाली और बिहार पुलिस के संयुक्त अभियान में मिली यह सफलता इस मायने में बड़ी है क्योंकि राजबीर सिंह के पास से न केवल हेरोइन जैसी घातक ड्रग्स बरामद हुई है, बल्कि उसके पास से हैंड ग्रेनेड भी मिला है, जो उसके मंसूबों की भयावहता को साफ बयां करता है।
हैरानी की बात यह है कि जिस जवान ने साल 2011 में देश की रक्षा की शपथ खाकर भारतीय सेना ज्वाइन की थी, वही आज दुश्मन देश के हाथों की कठपुतली बनकर संवेदनशील सैन्य जानकारियां बेच रहा था। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि राजबीर सिंह इंटरनेट मीडिया के माध्यम से पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के सीधे संपर्क में था। वह चंद रुपयों और हेरोइन की खेप के लालच में आकर भारतीय सेना की गोपनीय सूचनाएं सीमा पार साझा कर रहा था। उसकी गद्दारी की कहानी तब और पुख्ता हो गई जब अमृतसर ग्रामीण के घरिंडा थाने में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत उस पर जासूसी का मामला दर्ज हुआ। इसी साल फरवरी 2025 में जब जांच का शिकंजा कसा, तो वह सेना से भगोड़ा हो गया और अपनी पहचान छिपाकर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने लगा।
राजबीर सिंह का आतंकी चेहरा तब और निखरकर सामने आया जब पता चला कि वह केवल जासूसी तक ही सीमित नहीं था, बल्कि हरियाणा के सिरसा में एक महिला थाने पर हुए हैंड ग्रेनेड हमले में भी उसकी संलिप्तता रही है। पंजाब और हरियाणा पुलिस की फाइलों में वह एक वांछित अपराधी था, जिसकी तलाश कई राज्यों की पुलिस को थी। रक्सौल के कस्टम चौक के पास से उसकी गिरफ्तारी उस वक्त हुई जब वह नेपाल के रास्ते सुरक्षित ठिकाने पर भागने की अंतिम कोशिश कर रहा था। पकड़े गए इस नार्को-आतंकी मॉड्यूल के तार इतने गहरे हैं कि अब पूछताछ में अंतर्राज्यीय ड्रग नेटवर्क और सीमा पार के हैंडलरों से जुड़े कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है।
यह पूरी घटना एक बार फिर भारत-नेपाल की उस खुली सीमा की संवेदनशीलता को उजागर करती है, जो पिछले कई वर्षों से आतंकियों और तस्करों के लिए एक सुरक्षित गलियारे के रूप में इस्तेमाल होती रही है। पूर्वी चंपारण के हरैया थाना क्षेत्र से हुई इस गिरफ्तारी ने साबित कर दिया है कि खुली सीमा का लाभ लेकर देश विरोधी ताकतें किस तरह अपनी शरणस्थली बना रही हैं। राजबीर सिंह जैसे प्रशिक्षित जवान का इस तरह आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी के दलदल में धंसना सुरक्षा तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती है। फिलहाल, पंजाब पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर अपने साथ ले गई है, जहां गहन पूछताछ में यह पता लगाया जाएगा कि उसने पाकिस्तान को कितनी और कौन सी गोपनीय जानकारियां पहुंचाई हैं और इस पूरे नेटवर्क में उसके साथ और कितने 'विभीषण' शामिल हैं। जनता के बीच इस खबर ने जहां सेना के नाम पर कलंक बने इस जवान के प्रति भारी आक्रोश पैदा कर दिया है, वहीं सुरक्षा बलों की मुस्तैदी की सराहना भी हो रही है जिसने एक बड़े संभावित हमले को टाल दिया।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

