अनिल मिश्र/ पटना
बिहार और झारखंड की सीमाओं को जोड़ने वाली नवादा जिले की रजौली चेकपोस्ट पर बीते दिनों एक ऐसी घटना घटी जिसने न केवल पुलिस महकमे को शर्मसार किया बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी अजीबोगरीब और गहरी हो सकती हैं। अमूमन हम अवैध वसूली के मामलों में नोटों की गड्डियों या मोटी रकम के लेनदेन की खबरें सुनते आए हैं लेकिन रजौली की इस ठंडी रात में कानून के रखवालों की भूख कुछ अलग ही थी। यहाँ खाकी वर्दी पहने 11 होमगार्ड जवानों ने एक ट्रक ड्राइवर के सामने जो मांग रखी वह सुनकर कोई भी हैरान रह जाए। चंद किलो आलू के लालच में इन जवानों ने न केवल अपनी मर्यादा को ताक पर रख दिया बल्कि अपनी वर्दी की गरिमा को भी धूल धूसरित कर दिया। यह घटना महज एक मामूली विवाद नहीं थी बल्कि व्यवस्था के उस चेहरे को उजागर करती है जहाँ सत्ता का छोटा सा हिस्सा भी मिलते ही लोग आम जनता का शोषण करने पर उतारू हो जाते हैं।
किस्सा शुरू होता है 24 नवंबर 2025 की उस सर्द रात से जब वक्त के कांटे 10 और 11 के बीच झूल रहे थे। रजौली चेकपोस्ट पर वाहनों की लंबी कतार थी क्योंकि यह मार्ग दो राज्यों के व्यापारिक आदान-प्रदान की मुख्य धमनी है। इसी बीच झारखंड की ओर से आलू से लदा एक ट्रक बिहार की सीमा में दाखिल होता है। चितरकोली पोस्ट पर तैनात होमगार्ड जवानों की नजर जैसे ही आलू से लदे उस ट्रक पर पड़ी उनकी नियत डगमगा गई। उन्होंने ट्रक को रुकवाया और ड्राइवर से कागजात मांगने के बजाय सीधे सौदेबाजी शुरू कर दी। हैरानी की बात यह है कि इस बार मांग नकदी की नहीं बल्कि ट्रक में लदे आलू की थी। जवानों ने ड्राइवर पर दबाव बनाया कि वह उन्हें मुफ्त में आलू की खेप दे दे। जब गरीब ड्राइवर ने अपनी मजबूरी बताई और कहा कि वह माल का मालिक नहीं है तो जवानों का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने उसे गालियां दीं और ट्रक को आगे बढ़ने से रोक दिया। घंटों तक ड्राइवर को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और जब उसने विरोध किया तो उसके साथ धक्का-मुक्की भी की गई।
शायद उन जवानों ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि जिस साधारण से दिखने वाले ट्रक ड्राइवर को वे धमका रहे हैं उसके हाथ में मौजूद स्मार्टफोन उनकी नौकरी निगल जाएगा। ड्राइवर ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए चुपके से पूरी घटना का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। कैमरे की नजर में वह सब कुछ कैद हो गया जो सरकारी फाइलों में कभी दर्ज नहीं होता। वीडियो में साफ दिख रहा था कि कैसे वर्दीधारी जवान एक ट्रक चालक को आलू के लिए तंग कर रहे हैं और अपना रौब झाड़ रहे हैं। यह वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया के गलियारों में पहुंचा मानो आग लग गई। आम जनता का गुस्सा फूट पड़ा और लोग पूछने लगे कि क्या अब बिहार में सुरक्षा के नाम पर सब्जियां वसूली जाएंगी। इंटरनेट पर वायरल होते इस वीडियो ने पटना से लेकर नवादा तक के अधिकारियों की नींद उड़ा दी। प्रशासन के सामने चुनौती थी कि वह अपनी गिरती साख को कैसे बचाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नवादा के पुलिस अधीक्षक अभिनव धीमान ने बिना किसी देरी के त्वरित जांच के आदेश दिए। रजौली अंचल के पुलिस निरीक्षक को मौके पर भेजकर साक्ष्यों को खंगालने को कहा गया। जब जांच अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे तो वहां के हालात और वायरल वीडियो के तथ्य आपस में मेल खा रहे थे। जांच में यह स्पष्ट हो गया कि वे 11 जवान न केवल दोषी थे बल्कि उन्होंने ड्यूटी के दौरान अनुशासन की सारी हदें पार कर दी थीं। जांच रिपोर्ट मिलते ही जिलाधिकारी रवि प्रकाश ने वह सख्त कदम उठाया जिसकी उम्मीद जनता कर रही थी। बिहार होमगार्ड नियमावली 1953 की धाराओं का प्रयोग करते हुए एक झटके में 11 जवानों को निलंबित कर दिया गया। निलंबित होने वालों की सूची में शीतल कुमार, ईश्वरी प्रसाद, जवाहर प्रसाद, कन्हैया कुमार, अतीश कुमार, रघुनंदन प्रसाद, महेश कुमार, रणधीर कुमार, सुधीर कुमार, श्री यादव और मनोज कुमार के नाम शामिल थे। यह कार्रवाई उन सभी लोगों के लिए एक बड़ा सबक थी जो यह समझते हैं कि अंधेरी रातों में चेकपोस्ट पर वे जो चाहें कर सकते हैं।
इस घटना ने समाज में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। लोग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या भ्रष्टाचार का स्तर इतना गिर चुका है कि अब आलू और प्याज जैसी बुनियादी चीजों के लिए भी वर्दी का रसूख दिखाया जाएगा। हालांकि जिला प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई ने लोगों के बीच एक सकारात्मक संदेश भी भेजा है। आम जनता में यह विश्वास जगा है कि अगर उनके पास सही सबूत हैं तो वे बड़े से बड़े अधिकारी या कर्मचारी की मनमानी के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं। सोशल मीडिया जिसे अक्सर अफवाहों का बाजार कहा जाता है इस मामले में न्याय का सबसे बड़ा हथियार साबित हुआ। यदि वह ट्रक ड्राइवर साहस न दिखाता और वीडियो न बनाता तो शायद यह मामला कभी फाइलों से बाहर ही नहीं आता।
नवादा की इस घटना ने पुलिस बल के लिए एक आईना भी पेश किया है। प्रशासन ने अब स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में किसी भी चेकपोस्ट पर अगर इस तरह की अवैध वसूली की शिकायत मिली तो सजा इससे भी अधिक कठोर होगी। फिलहाल ये 11 जवान अब अपने किए पर पछता रहे होंगे क्योंकि जिस आलू के लिए उन्होंने अपनी ईमानदारी बेची उसी ने उन्हें समाज की नजरों में और विभाग की फाइलों में गुनहगार बना दिया। यह खबर उन तमाम लोगों के लिए एक मिसाल है जो भ्रष्टाचार को एक छोटी सी बात मानकर उसे अनदेखा कर देते हैं। नवादा का यह 'आलू कांड' बिहार के प्रशासनिक इतिहास में एक ऐसी घटना के रूप में याद रखा जाएगा जिसने यह साबित किया कि जब जनता जागती है और प्रशासन सजग होता है तो न्याय होने में देर नहीं लगती।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

