मध्यप्रदेश SIR वोटर लिस्ट जारी, ऑनलाइन ऐसे चेक करें नाम-स्टेप बाय स्टेप गाइड

मध्यप्रदेश SIR वोटर लिस्ट जारी, ऑनलाइन ऐसे चेक करें नाम-स्टेप बाय स्टेप गाइड

प्रेषित समय :20:07:27 PM / Tue, Dec 23rd, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

भोपाल.प्रदेश में मतदाताओं के लिए आज का दिन बेहद अहम है. लोकतंत्र की नींव मानी जाने वाली मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया पूरी करने के बाद 2026 की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर दी है. जैसे ही यह सूची सार्वजनिक हुई, शहरों से लेकर गांवों तक लोगों में यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई कि उनका नाम सूची में है या नहीं. वजह साफ है—अगर नाम सूची में नहीं हुआ तो वोट डालने का अधिकार भी खतरे में पड़ सकता है. यही कारण है कि चुनाव आयोग बार-बार अपील कर रहा है कि हर मतदाता खुद आगे आकर अपनी जानकारी की जांच करे और जरूरत पड़ने पर समय रहते सुधार कराए.

चुनाव आयोग के अनुसार, यह विशेष गहन पुनरीक्षण सामान्य वार्षिक संशोधन से अलग और ज्यादा व्यापक प्रक्रिया है. इसमें मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन बनाने पर खास जोर दिया गया है. आयोग को यह महसूस हुआ कि नियमित प्रक्रिया से मृत मतदाताओं के नाम हटाने, डुप्लीकेट प्रविष्टियों को खत्म करने, स्थान बदल चुके मतदाताओं के पते अपडेट करने और नए पात्र नागरिकों के नाम जोड़ने में पूरी तरह सफलता नहीं मिल पा रही है. इसी वजह से एसआईआर प्रक्रिया अपनाई गई, जिसमें घर-घर जाकर सत्यापन, दस्तावेजों का मिलान और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की गई.

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने का मतलब यह नहीं है कि यही अंतिम सूची है. बल्कि यह एक मौका है, जब मतदाता अपनी जानकारी की जांच कर सकते हैं और किसी भी तरह की गलती को सुधारने के लिए दावा या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं. आयोग ने साफ कर दिया है कि 18 जनवरी तक दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी. इसके बाद सभी आवेदनों की जांच होगी और फिर अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी, जो आगामी चुनावों के लिए आधार बनेगी.

ऑनलाइन नाम जांचने की प्रक्रिया को इस बार पहले से कहीं ज्यादा सरल बनाया गया है. मतदाता राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल या मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्य प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर कुछ ही मिनटों में अपना नाम खोज सकते हैं. इसके लिए EPIC नंबर, नाम, जन्मतिथि या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया जा सकता है. जानकारी भरते ही स्क्रीन पर मतदाता का पूरा विवरण आ जाता है, जिसमें नाम, उम्र, पता और मतदान केंद्र की जानकारी शामिल होती है. कई लोगों के लिए यह राहत की बात है कि अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं, सब कुछ मोबाइल या कंप्यूटर से संभव है.

अगर किसी मतदाता को यह लगता है कि उसका नाम सूची में नहीं है, गलत तरीके से दर्ज है या फिर किसी मृत व्यक्ति का नाम अब भी शामिल है, तो वह तय समयसीमा के भीतर आपत्ति दर्ज करा सकता है. इसके लिए ऑनलाइन फॉर्म उपलब्ध कराए गए हैं. नए मतदाता, जिनकी उम्र 18 साल पूरी हो चुकी है या जल्द होने वाली है, वे भी इसी दौरान अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं. चुनाव आयोग ने युवाओं से खास अपील की है कि वे इस अवसर को गंभीरता से लें, क्योंकि मतदान का अधिकार लोकतंत्र में भागीदारी का सबसे मजबूत जरिया है.

ग्रामीण इलाकों में जहां इंटरनेट की पहुंच सीमित है, वहां बूथ लेवल ऑफिसर की भूमिका बेहद अहम हो जाती है. बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को सूची की जानकारी दे रहे हैं और जरूरत पड़ने पर फॉर्म भरने में मदद भी कर रहे हैं. आयोग ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम सूची से न छूटे और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. वहीं शहरी क्षेत्रों में लोग तेजी से ऑनलाइन प्रक्रिया को अपनाते दिख रहे हैं.

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होते ही राजनीतिक दलों की सक्रियता भी बढ़ गई है. पार्टियां अपने-अपने स्तर पर सूची का विश्लेषण कर रही हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके समर्थक मतदाताओं के नाम सही तरीके से दर्ज हैं. चुनाव से पहले मतदाता सूची हमेशा राजनीतिक चर्चा का विषय बन जाती है, ऐसे में चुनाव आयोग की कोशिश है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे और किसी भी तरह के आरोपों की गुंजाइश न बचे.

इस पूरी कवायद का असली मकसद एक ही है—निष्पक्ष और भरोसेमंद चुनाव. साफ मतदाता सूची के बिना निष्पक्ष चुनाव की कल्पना नहीं की जा सकती. यही वजह है कि चुनाव आयोग इसे केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने का अभियान मान रहा है. आयोग के अधिकारियों का कहना है कि हर सही नाम का होना उतना ही जरूरी है, जितना गलत नाम का हटाया जाना.

ड्राफ्ट सूची को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चाएं तेज हैं. लोग एक-दूसरे को नाम जांचने की सलाह दे रहे हैं और समयसीमा को लेकर सतर्क कर रहे हैं. कई मामलों में देखा गया है कि छोटी सी चूक के कारण मतदाता चुनाव के दिन मतदान से वंचित रह जाते हैं. इसी से बचने के लिए आयोग पहले ही यह मौका दे रहा है कि हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभाए.

अब सबकी नजरें 18 जनवरी की अंतिम तारीख पर टिकी हैं. इसके बाद जो अंतिम मतदाता सूची जारी होगी, वही 2026 और आगे होने वाले चुनावों का आधार बनेगी. इसलिए यह समय सिर्फ नाम देखने का नहीं, बल्कि अपने अधिकार को सुरक्षित करने का है. चुनाव आयोग की इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि मध्य प्रदेश में मतदाता सूची ज्यादा शुद्ध, पारदर्शी और भरोसेमंद होगी, और हर योग्य नागरिक बिना किसी बाधा के लोकतंत्र के इस महापर्व में हिस्सा ले सकेगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-