जबलपुर. संस्कारधानी की सांस्कृतिक चेतना, ऋषि परंपरा और वैचारिक विरासत को एक नई ऊर्जा देते हुए आज शहर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक अध्याय जुड़ गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नागरिकों को एक ऐसे अत्याधुनिक और सर्वसुविधायुक्त 'गीता भवन' की सौगात दी है, जो आने वाले समय में ज्ञान, विज्ञान और आध्यात्म के अद्भुत संगम के रूप में पहचाना जाएगा। नगर निगम द्वारा अत्यंत सूक्ष्मता और श्रद्धा के साथ तैयार किए गए इस भवन का लोकार्पण करते हुए मुख्यमंत्री के मन में एक विशेष आत्मीयता और संतोष का भाव था। उन्होंने इस केंद्र की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए विजिटर्स बुक पर अपने हस्ताक्षर किए और शुभकामनाओं के साथ स्पष्ट रूप से अंकित किया कि यह भवन आने वाले समय में केवल एक इमारत नहीं, बल्कि ज्ञान पिपासा को शांत करने और जबालीपुरम की ऋषि परंपरा का एक उत्कृष्ट केंद्र बनेगा।
इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री के चेहरे पर एक विशेष संतोष का भाव स्पष्ट नजर आया जब उन्होंने इस भवन की संरचना और इसके पीछे की पवित्र मंशा को करीब से देखा। उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अत्यंत आत्मीय भाव से अपने विचार साझा करते हुए कहा कि यह केवल ईंट-पत्थरों से बनी कोई इमारत नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में ज्ञान, विज्ञान, साहित्य और सामाजिक समरसता का एक ऐसा जीवंत केंद्र बनेगा जो जबालीपुरम की प्राचीन ऋषि परंपरा को पुनर्जीवित कर देगा। उन्होंने नगर निगम की टीम की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और विजिटर्स बुक पर अपने हस्ताक्षर अंकित कर इस केंद्र को ज्ञान की पिपासा शांत करने वाला एक उत्कृष्ट केंद्र बताया।
मुख्यमंत्री का विजन स्पष्ट रूप से विकास के साथ विरासत के सम्मान पर टिका है और उनका मानना है कि जबलपुर सदैव से ही ज्ञान और आध्यात्म की पवित्र धरा रही है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में नई पीढ़ी अपनी जड़ों से दूर न हो जाए, इसके लिए गीता भवन एक महत्वपूर्ण सेतु की तरह कार्य करेगा। यहाँ साहित्य और विज्ञान के बीच एक अनूठा समन्वय स्थापित होगा जो न केवल बौद्धिक चेतना को जागृत करेगा बल्कि सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक गहराई को भी बढ़ावा देगा। नगर निगम द्वारा इसे जिस सूक्ष्मता और आधुनिक सुविधाओं के साथ डिजाइन किया गया है, वह यहाँ आने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को एक अत्यंत शांत और प्रेरणादायी वातावरण प्रदान करेगा। इस परिसर को शहर की बौद्धिक संपदा को सहेजने और उसे वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
गीता भवन के परिसर में प्रवेश करते ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव की आंखों में संतोष और आत्मीयता का भाव स्पष्ट दिखाई दिया। भवन की वास्तुकला, शांत वातावरण और अध्ययन के लिए तैयार किए गए विशिष्ट कक्षों को देखकर उन्होंने नगर निगम की टीम की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस तरह के संस्थान केवल इमारतें नहीं होते, बल्कि विचारों को गढ़ने और समाज को दिशा देने वाले केंद्र होते हैं। उनका मानना है कि यह भवन विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, चिंतकों और अध्यात्म से जुड़े साधकों के लिए एक प्रेरणास्रोत बनेगा।
भवन के लोकार्पण के उपरांत एक अत्यंत भावुक और प्रेरणादायी दृश्य तब देखने को मिला जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं वैचारिक अध्ययन केंद्र में बैठ गए और उन्होंने गीता एवं रामायण जैसे महान ग्रंथों का पूरी तन्मयता के साथ विधिवत अध्ययन किया। मुख्यमंत्री को अन्य साहित्यिक और सामाजिक पुस्तकों का अवलोकन करते देख वहां मौजूद बुद्धिजीवियों और संतों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केंद्र संस्कारधानी के चिंतकों, अध्यात्म प्रेमियों और विशेषकर छात्र-छात्राओं के लिए एक अनमोल उपहार है जहां बैठकर वे जीवन के सार को समझ सकेंगे। वास्तव में, यह गीता भवन आने वाले वर्षों में जबलपुर की उस सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सुदृढ़ करेगा जिसके लिए यह शहर पूरे विश्व में विख्यात है।
लोकार्पण के बाद मुख्यमंत्री ने गीता भवन के वैचारिक अध्ययन केंद्र का भ्रमण किया। विशेष रूप से निर्मित रामायण कक्ष और गीता कक्ष में उन्होंने स्वयं बैठकर गीता और रामायण ग्रंथों का विधिवत अध्ययन किया। इस दौरान उन्होंने अन्य साहित्यिक और सामाजिक पुस्तकों का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री का यह सहज और आत्मीय रूप वहां उपस्थित संतगणों, बुद्धिजीवियों और विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरक रहा। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के लिए ऐसे अध्ययन केंद्रों की आज अत्यंत आवश्यकता है, जहां विचार, आस्था और तर्क एक साथ संवाद कर सकें।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि जबलपुर प्राचीन काल से ही ज्ञान, तप और वैचारिक विमर्श की भूमि रहा है। जबालीपुरम की ऋषि परंपरा ने भारतीय दर्शन, साहित्य और सामाजिक चेतना को दिशा दी है। गीता भवन उसी परंपरा को आधुनिक स्वरूप में आगे बढ़ाने का माध्यम बनेगा। यहां साहित्य और विज्ञान के बीच सेतु का निर्माण होगा, जिससे समग्र और संतुलित दृष्टि का विकास संभव हो सकेगा।
नगर निगम जबलपुर द्वारा निर्मित यह गीता भवन आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है। भवन को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यहां अध्ययन, शोध, संवाद और चिंतन के लिए शांत और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केंद्र केवल आध्यात्मिक ग्रंथों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक, साहित्यिक और वैचारिक विमर्श का भी प्रमुख मंच बनेगा। इससे शहर की बौद्धिक संपदा को संरक्षित करने और उसे नई दिशा देने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर उपस्थित बुद्धिजीवियों और संतगणों ने भी गीता भवन को संस्कारधानी के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उनका कहना था कि ऐसे संस्थान आज के भौतिकता से भरे दौर में मनुष्य को आत्मचिंतन और मानवीय मूल्यों की ओर लौटने का अवसर देते हैं। गीता भवन आने वाली पीढ़ियों के लिए न केवल अध्ययन का केंद्र बनेगा, बल्कि जीवन मूल्यों को समझने और आत्मिक शांति पाने का भी माध्यम होगा।
समूचे आयोजन में यह स्पष्ट रूप से झलकता रहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह प्रयास केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और वैचारिक चेतना से जुड़ा हुआ विजन है। गीता भवन के रूप में जबलपुर को एक ऐसा स्थायी वैचारिक केंद्र मिला है, जो शहर की पहचान को और अधिक गरिमामय बनाएगा। वास्तव में, यह भवन संस्कारधानी के सांस्कृतिक उत्थान की दिशा में एक नया सवेरा साबित होगा, जहां विचारों का दीपक जलता रहेगा और जबालीपुरम की ऋषि परंपरा आधुनिक युग में भी मार्गदर्शन करती रहेगी।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

