विजय हजारे ट्रॉफी में मध्य प्रदेश की लड़खड़ाती राह लगातार दूसरी हार से सोशल मीडिया पर फूटा फैंस का गुस्सा

विजय हजारे ट्रॉफी में मध्य प्रदेश की लड़खड़ाती राह लगातार दूसरी हार से सोशल मीडिया पर फूटा फैंस का गुस्सा

प्रेषित समय :20:34:54 PM / Wed, Jan 7th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

भोपाल. विजय हजारे ट्रॉफी में मध्य प्रदेश क्रिकेट टीम का अभियान उम्मीदों के अनुरूप आगे नहीं बढ़ पा रहा है। टूर्नामेंट की शुरुआत जीत के इरादे से करने वाली एमपी टीम को लगातार दूसरी हार का सामना करना पड़ा है, जिससे न सिर्फ अंक तालिका में उसकी स्थिति कमजोर हुई है, बल्कि जबलपुर और पूरे प्रदेश के क्रिकेट प्रेमियों में भी निराशा साफ झलकने लगी है। इस हार के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर टीम के प्रदर्शन को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और फैंस चयन, रणनीति और खिलाड़ियों की फॉर्म पर सवाल उठा रहे हैं।

मैच के दौरान मध्य प्रदेश टीम का प्रदर्शन कई मौकों पर बिखरा हुआ नजर आया। बल्लेबाजी क्रम एक बार फिर दबाव में टिक नहीं सका और शुरुआती विकेट जल्दी गिरने से टीम बैकफुट पर चली गई। हालांकि बीच के ओवरों में कुछ बल्लेबाजों ने संघर्ष जरूर दिखाया, लेकिन बड़े स्कोर की नींव नहीं रख पाए। नतीजतन टीम सम्मानजनक, लेकिन चुनौतीपूर्ण स्कोर तक भी नहीं पहुंच सकी। गेंदबाजी में भी वही पुरानी कहानी दोहराई गई, जहां शुरुआती ओवरों में धार नजर आई, लेकिन मध्य ओवरों में रन रोकने में गेंदबाज नाकाम रहे और विरोधी टीम ने मैच पर पकड़ मजबूत कर ली।

क्रिकेट जानकारों का मानना है कि मध्य प्रदेश टीम में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन सामूहिक प्रदर्शन का अभाव साफ दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ सत्रों में घरेलू क्रिकेट में मजबूत मानी जाने वाली एमपी टीम से इस टूर्नामेंट में भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही थी। खासकर जबलपुर, इंदौर और भोपाल जैसे क्रिकेट केंद्रों से निकलकर आए युवा खिलाड़ियों पर फैंस की निगाहें टिकी थीं, लेकिन लगातार दूसरी हार ने उन उम्मीदों को झटका दिया है।

इस हार के बाद ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #MPTeam, #VijayHazareTrophy और #MPCricket जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कई क्रिकेट प्रेमियों ने टीम मैनेजमेंट और चयनकर्ताओं पर सवाल उठाए, वहीं कुछ ने खिलाड़ियों को संयम रखने और अगले मैचों में वापसी करने की सलाह दी। जबलपुर के एक क्रिकेट प्रशंसक ने सोशल मीडिया पर लिखा कि टीम में अनुभव और युवा जोश का संतुलन सही नहीं बैठ पा रहा है, जिसका खामियाजा मैदान पर भुगतना पड़ रहा है। वहीं कुछ फैंस ने गेंदबाजों की लाइन-लेंथ और फील्डिंग में चूक को हार का बड़ा कारण बताया। लगातार दूसरी हार के बाद मध्य प्रदेश टीम का प्रदर्शन सोशल मीडिया पर तीखी बहस का विषय बन गया है। ट्विटर (X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर जबलपुर, भोपाल और इंदौर के क्रिकेट प्रेमियों ने टीम की बल्लेबाजी, गेंदबाजी और चयन नीति पर सवाल उठाए हैं। #VijayHazareTrophy, #MPCricket, #MPTeamFail और #JusticeForYoungPlayers जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि घरेलू क्रिकेट में मजबूत मानी जाने वाली एमपी टीम मैदान पर बिखरी हुई नजर आ रही है। कुछ फैंस ने सीनियर खिलाड़ियों की फॉर्म पर नाराजगी जताई तो कई ने युवा खिलाड़ियों को लगातार मौके न मिलने को हार की बड़ी वजह बताया। फेसबुक पर मैच क्लिप्स और स्कोरकार्ड के स्क्रीनशॉट वायरल हो रहे हैं, वहीं इंस्टाग्राम स्टोरीज़ में फैंस निराशा और गुस्से के साथ टीम से जल्द वापसी की मांग कर रहे हैं। सोशल मीडिया की यह प्रतिक्रिया साफ संकेत दे रही है कि मध्य प्रदेश की हार अब केवल मैदान तक सीमित नहीं रही, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी टीम दबाव में आ चुकी है।

मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के लिए भी यह हार चिंता का विषय मानी जा रही है। विजय हजारे ट्रॉफी जैसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट में लगातार हार न केवल टीम के आत्मविश्वास को प्रभावित करती है, बल्कि आगे के मैचों की रणनीति पर भी दबाव बढ़ा देती है। अंक तालिका में पिछड़ने के बाद अब हर मुकाबला ‘करो या मरो’ जैसा हो गया है, जहां एक और हार टीम को टूर्नामेंट की दौड़ से लगभग बाहर कर सकती है।

क्रिकेट विश्लेषकों का कहना है कि मध्य प्रदेश टीम को जल्द ही अपनी कमजोरियों की पहचान कर सुधार करना होगा। शीर्ष क्रम की बल्लेबाजी को जिम्मेदारी लेनी होगी, ताकि मध्य क्रम पर अनावश्यक दबाव न पड़े। साथ ही गेंदबाजों को भी डेथ ओवरों में बेहतर नियंत्रण दिखाना होगा, क्योंकि पिछले दो मैचों में यहीं पर टीम मैच से फिसलती नजर आई है। फील्डिंग में भी चुस्ती और एकाग्रता की कमी साफ दिखाई दी, जो आधुनिक क्रिकेट में किसी भी टीम के लिए भारी पड़ सकती है।

टीम के समर्थकों को अब भी उम्मीद है कि मध्य प्रदेश वापसी कर सकता है। घरेलू क्रिकेट में एमपी टीम ने पहले भी मुश्किल हालात से उबरकर अच्छा प्रदर्शन किया है। कप्तान और सीनियर खिलाड़ियों पर अब जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वे ड्रेसिंग रूम में सकारात्मक माहौल बनाए रखें और युवा खिलाड़ियों का आत्मविश्वास टूटने न दें। आने वाले मैचों में अगर टीम एकजुट होकर खेले और छोटी-छोटी गलतियों पर काबू पाए, तो स्थिति अभी भी सुधारी जा सकती है।

फिलहाल विजय हजारे ट्रॉफी में मध्य प्रदेश की लगातार दूसरी हार ने यह साफ कर दिया है कि केवल नाम और प्रतिभा के भरोसे टूर्नामेंट नहीं जीता जा सकता। मैदान पर अनुशासन, रणनीति और निरंतरता ही सफलता की कुंजी है। अब देखना होगा कि आलोचनाओं और दबाव के बीच मध्य प्रदेश टीम कैसे प्रतिक्रिया देती है और क्या वह अगले मुकाबलों में अपने प्रदर्शन से फैंस की टूटी उम्मीदों को फिर से जगा पाती है या नहीं।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-