भारतीय क्रिकेट टीम के मध्यक्रम की रीढ़ माने जाने वाले स्टार बल्लेबाज श्रेयस अय्यर लंबे समय बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मैदान पर वापसी करने जा रहे हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ 11 जनवरी 2026 से शुरू होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज में अय्यर को न केवल टीम में शामिल किया गया है, बल्कि उन्हें उपकप्तानी की अहम जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। सिडनी में पिछले साल 25 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे वनडे मैच के दौरान एलेक्स कैरी का कैच लपकने के प्रयास में लगी गंभीर चोट के बाद यह अय्यर का पहला अंतरराष्ट्रीय मुकाबला होगा। हालांकि उनकी इस वापसी के बीच टीम इंडिया के पूर्व बैटिंग कोच संजय बांगर ने एक बड़ा बयान देते हुए अय्यर को एक खास किस्म के जोखिम से सावधान रहने की नसीहत दी है। बांगर का मानना है कि जब कोई बड़ा खिलाड़ी चोट के बाद वापसी करता है, तो उस पर तुरंत प्रदर्शन करने का मानसिक दबाव होता है और यही दबाव अय्यर के लिए घातक साबित हो सकता है।
तकनीकी दृष्टि से देखें तो श्रेयस अय्यर की चोट सामान्य नहीं थी। सिडनी में कैच पकड़ते समय उनके स्प्लीन (तिल्ली) में गहरी चोट आई थी, जिसके कारण अंदरूनी रक्तस्राव शुरू हो गया था। इस आपातकालीन स्थिति में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा और एक छोटी सर्जरी से गुजरना पड़ा। इसके बाद महीनों तक बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में कड़े रिहैब के बाद उन्होंने अपनी फिटनेस हासिल की। संजय बांगर ने जिओ हॉटस्टार पर चर्चा के दौरान स्पष्ट किया कि अय्यर के लिए सबसे बड़ा खतरा 'जल्दबाजी' है। अक्सर देखा जाता है कि खिलाड़ी मैदान पर उतरते ही खुद को साबित करने के लिए आक्रामक हो जाते हैं या जल्दबाजी में बड़े फैसले लेते हैं। बांगर की चेतावनी यही है कि अय्यर को धैर्य के साथ क्रीज पर समय बिताना चाहिए और खेल की स्थिति को समझते हुए धीरे-धीरे अपनी लय हासिल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अय्यर वनडे क्रिकेट के मंझे हुए खिलाड़ी हैं और उन्होंने 2023 वर्ल्ड कप में स्पिनरों के खिलाफ अपनी काबिलियत साबित की है, इसलिए उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है।
अय्यर की गैरमौजूदगी में नंबर चार की पोजीशन के लिए रुतुराज गायकवाड़ जैसे खिलाड़ियों को आजमाया गया था, लेकिन अब अय्यर की वापसी के साथ ही मध्यक्रम में वह स्थिरता वापस आने की उम्मीद है। बांगर का मानना है कि रुतुराज स्पिन के अच्छे खिलाड़ी हैं लेकिन अय्यर के पास इस नंबर पर खेलने का वर्षों का अनुभव है और टीम प्रबंधन उनकी ताकत का पूरा फायदा उठाना चाहेगा। चोट के दौरान खबरें आई थीं कि अय्यर का वजन काफी कम हो गया है, जिसने उनकी मैच फिटनेस पर सवालिया निशान लगा दिए थे। लेकिन मुंबई की ओर से विजय हजारे ट्रॉफी में खेलते हुए उन्होंने जयपुर के मैदान पर 82 और 45 रनों की सधी हुई पारियां खेलकर चयनकर्ताओं को आश्वस्त कर दिया कि वे पूरी तरह तैयार हैं। उनकी यह वापसी केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है बल्कि टीम के संतुलन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इसी चर्चा के दौरान संजय बांगर ने टीम के मौजूदा वनडे कप्तान शुभमन गिल की कप्तानी पर भी अपने विचार रखे। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारत को 2-1 से हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद गिल के नेतृत्व कौशल पर सवाल उठने लगे थे। इस पर बांगर ने युवा कप्तान का बचाव करते हुए कहा कि गिल अभी सीखने की प्रक्रिया में हैं। इंग्लैंड में उन्होंने टेस्ट मैचों में शानदार काम किया था लेकिन ऑस्ट्रेलिया की परिस्थितियां अलग और चुनौतीपूर्ण थीं। बांगर ने तर्क दिया कि मैदान पर रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गजों की मौजूदगी गिल के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है। दबाव के पलों में इन अनुभवी खिलाड़ियों का सहयोग उन्हें एक बेहतर कप्तान बनने में मदद करेगा। बांगर के अनुसार, कप्तानी में सुधार मैचों के अनुभव के साथ आता है और गिल निश्चित रूप से भविष्य में एक सफल वनडे कप्तान के रूप में उभरेंगे।
न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली यह सीरीज अय्यर के करियर के लिए एक नया मोड़ साबित हो सकती है। अगर वे बांगर की दी हुई 'धैर्य' वाली सलाह को मानकर मैदान पर उतरते हैं, तो वे न केवल बड़ी पारियां खेल पाएंगे बल्कि आगामी आईसीसी आयोजनों के लिए अपनी जगह और भी पुख्ता कर लेंगे। भारतीय फैंस को उम्मीद है कि अय्यर अपनी पुरानी लय में लौटेंगे और स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ उसी पुराने दबदबे के साथ प्रहार करेंगे। कल से शुरू होने वाले पहले वनडे में पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या अय्यर संजय बांगर द्वारा बताए गए 'जल्दबाजी के रिस्क' से खुद को बचा पाते हैं या नहीं। न्यूजीलैंड के खिलाफ यह सीरीज टीम इंडिया के लिए चैंपियंस ट्रॉफी की तैयारियों के लिहाज से भी लिटमस टेस्ट की तरह है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

