उपमुख्यमंत्री देवड़ा ने रमनगरा वॉटर प्लांट की स्वच्छता को सराहा, जबलपुर के जल प्रबंधन को प्रदेश के लिए बताया मिसाल

उपमुख्यमंत्री देवड़ा ने रमनगरा वॉटर प्लांट की स्वच्छता को सराहा, जबलपुर के जल प्रबंधन को प्रदेश के लिए बताया मिसाल

प्रेषित समय :15:43:49 PM / Tue, Jan 13th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर.मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने संस्कारधानी प्रवास के दौरान रमनगरा स्थित 120 एम.एल.डी. क्षमता वाले वॉटर फिल्टर प्लांट का औचक निरीक्षण किया, जहाँ की चाक-चौबंद व्यवस्था और उच्च स्तरीय स्वच्छता देख वे दंग रह गए. उपमुख्यमंत्री ने प्लांट परिसर के रख-रखाव की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए इसकी तुलना एक स्वच्छ और व्यवस्थित घर से की. उन्होंने कहा कि आमतौर पर औद्योगिक और जल शोधन संयंत्रों में ऐसी स्वच्छता देखने को नहीं मिलती, लेकिन रमनगरा प्लांट ने एक नया मानक स्थापित किया है. श्री देवड़ा ने इस दौरान स्पष्ट किया कि जबलपुर की यह जल प्रदाय प्रणाली और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का प्रबंधन इतना प्रभावशाली है कि वे इसकी विस्तृत रिपोर्ट माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष प्रस्तुत करेंगे. उन्होंने संकेत दिए कि जबलपुर के इस सफल जल प्रबंधन सिस्टम को पूरे मध्य प्रदेश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में लागू करने पर विचार किया जा सकता है, ताकि अन्य शहर भी इसी तरह की शुद्धता और कार्यक्षमता को अपना सकें.

निरीक्षण के दौरान महापौर जगत बहादुर सिंह "अन्नू" ने उपमुख्यमंत्री को संयंत्र की तकनीकी बारीकियों और इसकी क्षमता से अवगत कराया. महापौर ने बताया कि रमनगरा प्लांट तकनीकी रूप से अत्यंत सुदृढ़ है और यहाँ 500 किलोवाट क्षमता के कुल 5 शक्तिशाली पंप स्थापित किए गए हैं. शहर की जलापूर्ति में कोई व्यवधान न आए, इसके लिए एक विशेष रणनीति के तहत 3 पंप निरंतर संचालित रहते हैं, जबकि 2 पंपों को किसी भी आपातकालीन स्थिति या तकनीकी खराबी से निपटने के लिए बैकअप के तौर पर रिजर्व रखा जाता है. यह संयंत्र जबलपुर की प्यास बुझाने में एक बड़ी भूमिका निभा रहा है, जहाँ से प्रतिदिन शहर की 28 उच्चस्तरीय टंकियों में पानी भेजा जाता है. इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से शहर के 36 वार्डों की विशाल आबादी को शुद्ध और पर्याप्त दबाव के साथ पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है. मुख्यमंत्री के संज्ञान में इस मॉडल को लाने की बात से स्थानीय प्रशासन और निगम की टीम में भारी उत्साह देखा जा रहा है.

उपमुख्यमंत्री ने केवल ऊपरी व्यवस्था ही नहीं, बल्कि जल की शुद्धता के वैज्ञानिक मानकों की भी गहराई से जांच की. वे संयंत्र के भीतर संचालित अत्याधुनिक प्रयोगशाला (लैब) में पहुंचे, जहाँ उन्होंने कच्चे पानी (रॉ-वॉटर) और शोधन के बाद सप्लाई के लिए तैयार शुद्ध जल की केमिकल व फिजिकल टेस्टिंग की प्रक्रिया का अवलोकन किया. श्री देवड़ा ने पिछले एक सप्ताह की टेस्ट रिपोर्ट्स और लॉग बुक का सूक्ष्म निरीक्षण किया, जिसमें जल की गुणवत्ता पूरी तरह निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई गई. प्लांट की यह प्रयोगशाला न केवल परिसर के भीतर जल शोधन की निगरानी करती है, बल्कि शहर के विभिन्न हिस्सों से भी नियमित रूप से पानी के नमूने एकत्रित कर उनकी जांच सुनिश्चित करती है, ताकि उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले पानी में किसी भी प्रकार का संक्रमण न हो. उपमुख्यमंत्री ने लैब की कार्यप्रणाली और वहां मौजूद विशेषज्ञों की टीम की सक्रियता की सराहना करते हुए कहा कि जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जबलपुर इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहा है.

इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के अवसर पर केंट क्षेत्र के विधायक अशोक ईश्वरदास रोहाणी, नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज, कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह, निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार और पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय सहित प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे. अधिकारियों ने उपमुख्यमंत्री को भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में जल प्रदाय नेटवर्क का और विस्तार किया जाएगा ताकि शहर का कोई भी कोना शुद्ध पेयजल से वंचित न रहे. उपमुख्यमंत्री के इस दौरे और जबलपुर मॉडल की सराहना ने शहर के विकास कार्यों को एक नई पहचान दी है. अंत में उन्होंने संयंत्र के कर्मचारियों का उत्साहवर्धन किया और इसी समर्पण के साथ सेवा जारी रखने का आह्वान किया. अब उम्मीद जताई जा रही है कि रमनगरा मॉडल की सफलता के बाद प्रदेश के अन्य जिलों के अधिकारी भी यहाँ अध्ययन दौरे पर आ सकते हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-