सारंडा जंगलों में सुरक्षा बलों का सबसे बड़ा मुठभेड़, एक करोड़ के इनामी अनल दा समेत 15 नक्सलियों का सफाया

सारंडा जंगलों में सुरक्षा बलों का सबसे बड़ा मुठभेड़, एक करोड़ के इनामी अनल दा समेत 15 नक्सलियों का सफाया

प्रेषित समय :21:04:22 PM / Thu, Jan 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

झारखंड के रक्तरंजित इतिहास में आज सुरक्षा बलों ने एक ऐसी इबारत लिख दी है जिसने नक्सलवाद की कमर तोड़कर रख दी है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के अभेद्य माने जाने वाले सारंडा के घने जंगलों में गुरुवार की सुबह जब सूरज की पहली किरण भी ठीक से जमीन पर नहीं पहुंची थी, तब सीआरपीएफ की कोबरा इकाई के जांबाज जवानों और माओवादियों के बीच वह ऐतिहासिक मुठभेड़ शुरू हुई जिसने लाल आतंक के एक बड़े अध्याय का अंत कर दिया। पुलिस और सुरक्षा बलों के संयुक्त अभियान में झारखंड के सबसे खूंखार और शीर्ष माओवादी नेता पतिराम मांझी उर्फ अनल दा समेत 15 नक्सलियों को मार गिराया गया है।

यह सफलता केवल एक सैन्य विजय नहीं है, बल्कि उस रणनीति की जीत है जिसे पिछले कई महीनों से दिल्ली से लेकर चाईबासा तक के गलियारों में बुना जा रहा था। अनल दा, जिस पर एक करोड़ रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित था और जो 1987 से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर आतंक का पर्याय बना हुआ था, आज अपने गढ़ में ही सुरक्षा बलों की अचूक रणनीति का शिकार हो गया। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, कोबरा इकाई के लगभग 1,500 जवानों ने सारंडा के कुमडी और किरीबुरु थाना क्षेत्र के दुर्गम इलाकों को चारों तरफ से घेर लिया था। खुफिया जानकारी इतनी पुख्ता थी कि नक्सलियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। मंगलवार से जारी इस सघन तलाशी अभियान ने गुरुवार सुबह 6 बजे उस वक्त खूनी संघर्ष का रूप ले लिया जब नक्सलियों ने खुद को घिरा देख सुरक्षा बलों पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।

जंगल की ऊबड़-खाबड़ जमीन और घने पेड़ों के बीच जवानों ने न केवल मोर्चा संभाला बल्कि जवाबी कार्रवाई में नक्सलियों के सुरक्षित ठिकानों को धुआं-धुआं कर दिया। कई घंटों तक चली इस भीषण मुठभेड़ में गोलियों की गड़गड़ाहट से पूरा सारंडा दहल उठा। जैसे-जैसे धुआं छंटा, सुरक्षा बलों को एक-एक कर 15 नक्सलियों के शव बरामद हुए, जिनमें अनल दा की पहचान होते ही सुरक्षा गलियारों में हर्ष की लहर दौड़ गई। मुठभेड़ स्थल की तस्वीरें बयां करती हैं कि यह लड़ाई कितनी भयानक थी, जहां अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा और भारी मात्रा में गोला-बारूद बिखरा पड़ा मिला है। गिरिडीह जिले के पिरतांड का निवासी अनल दा पिछले तीन दशकों से अधिक समय से झारखंड और सीमावर्ती राज्यों में समानांतर सरकार चलाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन आज उसके अंत के साथ ही माओवादियों के 'अंतिम गढ़' कहे जाने वाले कोल्हान और सारंडा में आतंक की जड़ें हिल गई हैं।

सीआरपीएफ के महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह द्वारा हाल ही में किए गए चाईबासा दौरे और उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ने इस ऑपरेशन की जमीन तैयार की थी, जिसका परिणाम आज सबके सामने है। पुलिस महानिरीक्षक (ऑपरेशन) माइकल राज एस ने पुष्टि की है कि अभियान अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और जवानों की अतिरिक्त टुकड़ियां जंगल के कोने-कोने को खंगाल रही हैं ताकि अंधेरे का फायदा उठाकर भागे अन्य नक्सलियों को पकड़ा जा सके। यह ऑपरेशन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सुरक्षा बलों ने पहले ही बूढ़ा पहाड़, लातेहार और पारसनाथ जैसे इलाकों को नक्सलियों से लगभग मुक्त करा लिया था और अब सारंडा में यह बड़ी स्ट्राइक उनकी अंतिम शरणस्थली को भी खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम है। मुठभेड़ स्थल से बरामद सामग्री में न केवल हथियार हैं, बल्कि नक्सलियों के भविष्य के मंसूबों से जुड़े दस्तावेज भी शामिल हो सकते हैं जो आने वाले समय में पुलिस के लिए और भी बड़ी जानकारियों का स्रोत बनेंगे।

डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षाबलों ने इस बार कोई कसर नहीं छोड़ी है और हवाई सर्वेक्षण के जरिए भी पूरे इलाके पर नजर रखी जा रही है। जून 2025 में हुई मुठभेड़ के बाद इसे साल 2026 की सबसे बड़ी सफलता माना जा रहा है। झारखंड में सक्रिय नक्सली संगठनों के लिए यह एक ऐसा सदमा है जिससे उबरना उनके लिए लगभग असंभव होगा, क्योंकि उन्होंने न केवल अपने सबसे अनुभवी नेता को खोया है बल्कि अपनी सुरक्षित मांद में भी असुरक्षित होने का प्रमाण देख लिया है। ग्रामीणों के बीच पैठ बनाकर और विकास कार्यों में बाधा डालकर अपना अस्तित्व बचाए रखने वाले नक्सलियों के लिए अब सारंडा के घने जंगल भी सुरक्षित नहीं रहे। आज की यह कार्रवाई उस संकल्प को दोहराती है कि लोकतंत्र में बंदूक की भाषा बोलने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है और सुरक्षा बल देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। पूरे झारखंड में इस खबर के बाद हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है ताकि किसी भी संभावित जवाबी हमले को रोका जा सके, लेकिन फिलहाल तो जीत का परचम सारंडा की पहाड़ियों पर लहरा रहा है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-