गया जी में सूर्य सप्तमी पर 72 कुंडीय महायज्ञ के साथ गूंजा आदित्य मंत्र

गया जी में सूर्य सप्तमी पर 72 कुंडीय महायज्ञ के साथ गूंजा आदित्य मंत्र

प्रेषित समय :20:16:15 PM / Sun, Jan 25th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अनिल मिश्र, पटना. मोक्ष की पावन नगरी गया जी के ब्राह्मणी घाट पर सूर्य सप्तमी के पावन अवसर पर आस्था और भक्ति का अद्भुत समागम देखने को मिला। संज्ञा समिति गयाधाम के तत्वावधान में आयोजित 44वें सूर्य सप्तमी पूजन और भव्य सूर्य यज्ञ ने पूरे वातावरण को सूर्योपासना के रंग में सराबोर कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक ध्वजारोहण के साथ हुआ, जिसके बाद संपूर्ण वैदिक रीति-रिवाज से भगवान भास्कर का पूजन, स्तोत्र पाठ और अभिषेक संपन्न किया गया। इस आध्यात्मिक अनुष्ठान का मुख्य आकर्षण 72 कुंडों पर आयोजित सामूहिक हवन रहा, जिसमें आचार्यों के सस्वर मंत्रोच्चार के बीच सैकड़ों श्रद्धालुओं ने विश्व शांति और आरोग्य की कामना के साथ आहुतियां दीं। आचार्य अरुण मिश्र, आचार्य भूषण, विवेक मिश्र और लक्ष्मी नारायण मिश्र के निर्देशन में संपन्न हुए इस महायज्ञ की पूर्णाहुति के बाद भगवान सूर्य की सामूहिक आरती उतारी गई और भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में हविष्य का वितरण किया गया।

इस गरिमामयी आयोजन में राजनीतिक और सामाजिक जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। विशेष रूप से बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने अनुष्ठान में शिरकत कर भगवान भास्कर का आशीर्वाद लिया। उनके साथ ही राधा मोहन मिश्र, केंद्रीय अध्यक्ष देवेंद्र कुमार पाठक, कमलेश पूण्यार्क और अमरेंद्र मिश्र सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। आयोजन की व्यवस्थाओं में जिलाध्यक्ष देवेंद्र नाथ मिश्र, नरेश मिश्र, मनोज मिश्र, केंद्रीय महासचिव गोपाल मिश्र और जिला उपाध्यक्ष मनीष मिश्र ने सक्रिय भूमिका निभाई। साथ ही कृष्ण कुमार मिश्र, डॉ. प्रमोद पाठक, विकास कुमार पाठक, अरुणोदय मिश्र, रामकृष्ण मिश्र, सच्चिदानंद प्रेमी, अजय मिश्र, अजित मिश्र, मंटू मिश्र, हरिनन्दन मिश्र और केंद्रीय उपाध्यक्ष बृजनंदन पाठक जैसे प्रमुख समाजसेवियों ने भी यज्ञ में अपनी सहभागिता सुनिश्चित की।

यज्ञ और पूजन का यह सिलसिला केवल सुबह तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि संध्याकाल में फल्गु नदी के तट पर भक्ति का एक और शिखर देखने को मिला। ब्राह्मणी घाट पर 'प्रतिज्ञा' संस्था के पांच कुशल पंडितों के समूह द्वारा फल्गु जी और सूर्यनारायण की भव्य महाआरती की गई। दीपों की रोशनी से जगमगाते घाट और मंत्रों की गूंज ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्थानीय निवासियों और दूर-दराज से आए भक्तों के लिए यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्ता का केंद्र रहा, बल्कि इसने गया की प्राचीन परंपराओं और सामूहिक एकता के दर्शन भी कराए। संज्ञा समिति द्वारा विगत 44 वर्षों से अनवरत चला आ रहा यह आयोजन आज गयाधाम की सांस्कृतिक पहचान का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है, जिसमें हर वर्ष की भांति इस बार भी श्रद्धा का सैलाब उमड़ा।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-