शंकराचार्य के अपमान पर गयाजी में भड़का आक्रोश, कांग्रेसियों ने फूंका मुख्यमंत्री योगी का पुतला

शंकराचार्य के अपमान पर गयाजी में भड़का आक्रोश, कांग्रेसियों ने फूंका मुख्यमंत्री योगी का पुतला

प्रेषित समय :20:20:58 PM / Sun, Jan 25th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अनिल मिश्र, पटना। मोक्ष की पावन नगरी गयाजी के विष्णुपद-चांदचौरा तीन मुहानी पर आज राजनीतिक और धार्मिक सरगर्मियां तेज रहीं। उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को प्रयागराज माघ कुंभ में स्नान करने से रोकने और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उनसे 'शंकराचार्य होने का प्रमाण' मांगे जाने के विरोध में कांग्रेस के विभिन्न अनुषंगिक संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, इंटक और किसान प्रकोष्ठ सहित विभिन्न विभागों के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पुतला दहन किया और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने इस कृत्य को सनातन धर्म और परंपराओं पर सीधा प्रहार करार देते हुए मुख्यमंत्री से अविलंब सार्वजनिक माफी की मांग की है।

पुतला दहन कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता विजय कुमार मिट्ठू और पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. गगन कुमार मिश्रा ने उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए। नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा कि जिस सनातन परंपरा को मुगल और ब्रिटिश शासक भी अक्षुण्ण रखने को विवश थे, उसे आज भाजपा की सरकारें खंडित करने का दुस्साहस कर रही हैं। प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने इस पूरी घटना को शर्मनाक बताते हुए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को जेड प्लस की कड़ी सुरक्षा दी गई है, वहीं दूसरी तरफ हिंदू धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु को पवित्र स्नान जैसे धार्मिक अधिकार से वंचित रखा जा रहा है, जो केंद्र और राज्य सरकार की दोहरी मानसिकता को दर्शाता है।

आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि शंकराचार्य को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने राम मंदिर के अधूरे निर्माण, महाकुंभ के कुप्रबंधन और कोरोना काल में गंगा में तैरती लाशों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार से तीखे सवाल पूछे थे। जिला उपाध्यक्ष दामोदर गोस्वामी, युवा कांग्रेस अध्यक्ष विशाल कुमार और एनएसयूआई के नवनीत कुमार सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि सत्य बोलने की सजा के तौर पर एक धर्मगुरु का अपमान करना लोकतंत्र और धर्म दोनों के विरुद्ध है। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपना रवैया नहीं बदला और शंकराचार्य से क्षमा याचना नहीं की, तो यह आंदोलन और उग्र रूप धारण करेगा।

इस विरोध प्रदर्शन में इंटक के टिंकू गिरी, शिक्षक प्रकोष्ठ के विधा शर्मा, सहकारिता प्रकोष्ठ के ओंकार शक्ति, अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष सुनील कुमार पासवान और धर्मेंद्र कुमार निराला सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे। प्रदर्शन के दौरान विष्णुपद क्षेत्र में घंटों अफरा-तफरी का माहौल रहा। नेताओं ने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म की रक्षा का ढोंग करने वाली सरकार असल में धर्मगुरुओं की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है, जिसे देश का हिंदू समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-