झारखंड में नगर निकाय चुनाव का बिगुल बजा, 23 फरवरी को मतदान 27 को नतीजे, पूरे राज्य में आचार संहिता लागू

झारखंड में नगर निकाय चुनाव का बिगुल बजा, 23 फरवरी को मतदान 27 को नतीजे, पूरे राज्य में आचार संहिता लागू

प्रेषित समय :20:27:51 PM / Tue, Jan 27th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अनिल मिश्र, रांची. झारखंड में लंबे समय से चले आ रहे इंतजार का अंत हो गया है. राज्य निर्वाचन आयोग ने आखिरकार नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है. मंगलवार को राजधानी रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के आम चुनाव की तारीखों की औपचारिक घोषणा की. घोषणा के साथ ही पूरे झारखंड में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है, जिससे राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है और शहरी राजनीति एक बार फिर चुनावी मोड में आ गई है.
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, राज्य के सभी शहरी स्थानीय निकायों में एक ही चरण में मतदान कराया जाएगा. 23 फरवरी को मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जबकि मतगणना 27 फरवरी को होगी और उसी दिन नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे. चुनाव की घोषणा होते ही राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है. वर्षों बाद हो रहे इन चुनावों को लेकर शहरी मतदाताओं में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है.

इस चुनाव में राज्य के कुल 48 शहरी स्थानीय निकाय शामिल होंगे. इनमें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतें शामिल हैं. आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस बार कुल 43 लाख 33 हजार 574 मतदाता मतदान करेंगे. इनमें 22 लाख 7 हजार 203 पुरुष मतदाता, 21 लाख 26 हजार 227 महिला मतदाता और 144 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं. मतदाताओं की यह बड़ी संख्या शहरी क्षेत्रों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूती देने का संकेत मानी जा रही है.

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस बार चुनावी खर्च पर सख्त निगरानी रखी जाएगी. महापौर और अन्य पदों के प्रत्याशियों के लिए चुनाव प्रचार खर्च की सीमा तय कर दी गई है, ताकि पैसे के दम पर चुनाव प्रभावित न हो सकें. आयोग की इस सख्ती से यह संकेत मिला है कि इस बार चुनाव अपेक्षाकृत पारदर्शी और निष्पक्ष कराने की पूरी तैयारी की गई है.

जिन नगर निगमों में चुनाव होने हैं, उनमें मेदिनीनगर नगर निगम (वर्ग-ख), हजारीबाग नगर निगम (वर्ग-ख), गिरिडीह नगर निगम (वर्ग-ख), देवघर नगर निगम (वर्ग-ख), धनबाद नगर निगम (वर्ग-क), चास नगर निगम (वर्ग-ख), रांची नगर निगम (वर्ग-क), आदित्यपुर नगर निगम (वर्ग-ख), मानगो नगर निगम (वर्ग-ख) शामिल हैं. इसके अलावा गढ़वा, विश्रामपुर, चतरा, झुमरीतिलैया, मधुपुर, गोड्डा, साहेबगंज, पाकुड़, दुमका, मिहिजाम, चिरकुंडा और फुसरो नगर परिषदों में भी चुनाव कराए जाएंगे.

नगर परिषदों की सूची में रामगढ़, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, चक्रधरपुर, चाईबासा, कपाली और जुगसलाई भी शामिल हैं. वहीं नगर पंचायतों में श्रीबंशीधरनगर, मझिआंव, हुसैनाबाद, हरिहरगंज, छत्तरपुर, लातेहार, कोडरमा, डोमचांच, बड़कीसरैया, धनवार, महागामा, राजमहल, बरहरवा, बासुकीनाथ, जामताड़ा, खूंटी, बुंडू, सरायकेला और चाकुलिया में आम चुनाव प्रस्तावित हैं. इन सभी निकायों में लंबे समय से निर्वाचित प्रतिनिधियों का अभाव था, जिसे अब दूर किया जाएगा.

राज्य निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 9 जनवरी को जारी आरक्षण सूची के आधार पर ही चुनाव कराए जाएंगे. इस बार रांची नगर निगम का महापौर पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया गया है, जिसे लेकर राजनीतिक हलकों में खास चर्चा है. वहीं धनबाद और चास नगर निगम के महापौर पद को सामान्य श्रेणी के लिए रखा गया है. मतदाता इस चुनाव में सीधे महापौर और पार्षद के लिए मतदान करेंगे. महापौर के लिए पिंक रंग का और पार्षद के लिए उजले रंग का बैलेट पेपर इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि मतदान प्रक्रिया में किसी तरह की भ्रम की स्थिति न बने.

अधिसूचना जारी होते ही आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण राज्य सरकार और प्रशासन की गतिविधियों पर भी प्रभाव पड़ा है. 23 फरवरी तक सरकार किसी नई योजना या परियोजना की घोषणा नहीं कर सकेगी. हालांकि पहले से स्वीकृत और चल रही योजनाओं पर काम जारी रहेगा. निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को आचार संहिता का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं.

गौरतलब है कि झारखंड में नगर निकाय चुनाव वर्ष 2020 से लंबित थे. कोरोना महामारी के कारण उस समय चुनाव स्थगित कर दिए गए थे. इसके बाद आरक्षण, कानूनी प्रक्रियाओं और अन्य तकनीकी कारणों से चुनाव बार-बार टलते रहे. इस वजह से शहरी क्षेत्रों में प्रशासकों के माध्यम से काम चलाया जा रहा था, जिससे जनप्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठते रहे. अब लगभग चार वर्षों के अंतराल के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी बाधाओं को दूर करते हुए चुनाव कराने का निर्णय लिया है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये चुनाव न केवल शहरी विकास की दिशा तय करेंगे, बल्कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए भी राजनीतिक दलों की ताकत का आकलन करेंगे. शहरी मतदाता इस बार बुनियादी सुविधाओं, रोजगार, साफ-सफाई, पानी, सड़क और बिजली जैसे मुद्दों पर प्रत्याशियों की परीक्षा लेने के मूड में नजर आ रहे हैं. चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही झारखंड की सियासत में नई हलचल शुरू हो गई है और आने वाले दिनों में चुनावी सरगर्मी और तेज होने के आसार हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-