गुमला. झारखंड प्रदेश के गुमला जिले के भरनो क्षेत्र में जंगली हाथियों के लगातार विचरण और उससे उत्पन्न संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है. गुमला सदर अनुमंडलाधिकारी राजीव नीरज के निर्देश पर भरनो थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्रभावित ग्रामों में 30 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है. प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय लोक शांति बनाए रखने, विधि-व्यवस्था को सुदृढ़ रखने और ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है.
प्रशासनिक आदेश के अनुसार यह निषेधाज्ञा प्रतिदिन अपराह्न 6 बजे तक प्रभावी रहेगी. इस अवधि के दौरान जंगली हाथियों की उपस्थिति वाले क्षेत्रों के आसपास पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा. इसके साथ ही किसी भी प्रकार की मांग को लेकर आम रास्तों को अवरुद्ध करने पर भी रोक लगा दी गई है. प्रशासन का मानना है कि भीड़भाड़ और अनावश्यक आवाजाही से हाथी आक्रामक हो सकते हैं, जिससे जान-माल के नुकसान की आशंका और बढ़ जाती है.
भरनो अंचल अधिकारी के अनुसार वर्तमान में लगभग 18 जंगली हाथियों का झुंड भरनो थाना क्षेत्र के मौजा सुपा, मलगो, मोरगाव, बुढ़ीपाट और महुआटोली क्षेत्रों में विचरण कर रहा है. इन इलाकों में हाथियों की लगातार मौजूदगी के कारण ग्रामीणों में दहशत का माहौल है. कई गांव मानवीय आवासों के काफी नजदीक स्थित हैं, जिससे हाथियों और इंसानों के आमने-सामने आने का खतरा बना हुआ है. प्रशासन ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते सतर्कता नहीं बरती गई, तो जन-धन की क्षति से इंकार नहीं किया जा सकता.
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बीते कुछ दिनों से हाथियों का झुंड खेतों और जंगल से सटे इलाकों में देखा जा रहा है. रात के समय हाथियों के गांव के पास पहुंचने से लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हैं. किसानों में खासा भय है क्योंकि हाथी फसलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. कुछ ग्रामीणों ने यह भी बताया कि हाथियों के डर से बच्चे और बुजुर्ग बाहर निकलने से कतरा रहे हैं, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है.
प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे निषेधाज्ञा का पालन करें और हाथियों के नजदीक जाने या उन्हें देखने के लिए भीड़ न लगाएं. साथ ही रात के समय अकेले बाहर निकलने से बचने और जंगल या हाथियों के संभावित मार्गों की ओर न जाने की सलाह दी गई है. प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वन विभाग की टीम लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और स्थिति पर नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं.
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार जंगली हाथियों का यह झुंड संभवतः भोजन और पानी की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर बढ़ रहा है. इस दौरान उनका मानव बस्तियों के करीब आ जाना स्वाभाविक है, लेकिन इससे टकराव की आशंका बढ़ जाती है. इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने एहतियातन निषेधाज्ञा लागू कर दी है, ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके.
गुमला सदर अनुमंडलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि निषेधाज्ञा का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य होते ही प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी. फिलहाल प्रशासन, पुलिस और वन विभाग के बीच समन्वय बनाकर लगातार निगरानी की जा रही है.
भरनो थाना पुलिस को भी अलर्ट पर रखा गया है और संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है. किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. ग्रामीणों से यह भी कहा गया है कि यदि कहीं हाथियों की गतिविधि अचानक बढ़ती दिखाई दे या कोई खतरा महसूस हो, तो तुरंत प्रशासन या पुलिस को सूचना दें.
कुल मिलाकर, भरनो क्षेत्र में जंगली हाथियों की मौजूदगी ने प्रशासन और आम लोगों दोनों की चिंता बढ़ा दी है. निषेधाज्ञा के माध्यम से जहां एक ओर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह कदम मानव और वन्यजीवों के बीच संभावित संघर्ष को टालने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है. आने वाले दिनों में प्रशासन की सतर्कता और ग्रामीणों के सहयोग से ही स्थिति को नियंत्रित रखने की उम्मीद की जा रही है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

