जबलपुर. मध्य प्रदेश के आसमान पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं और मौसम विभाग की ताजा चेतावनी ने आम जनता से लेकर प्रशासन तक की नींद उड़ा दी है. 5 फरवरी यानी कल से सक्रिय होने जा रहा नया पश्चिमी विक्षोभ पूरे प्रदेश में मौसम का नक्शा बदलने की तैयारी में है. मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों से आ रही बर्फीली हवाएं और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी जब आपस में टकराएंगी तो इसका सीधा असर जबलपुर सहित महाकौशल और बुंदेलखंड के इलाकों पर पड़ेगा.
इस सिस्टम के प्रभाव से न केवल बादलों की आवाजाही बढ़ेगी बल्कि कई जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की प्रबल संभावना है. यदि कल बारिश होती है तो हवाओं में नमी का स्तर तेजी से बढ़ेगा जिससे ठिठुरन में जबरदस्त इजाफा होगा और न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है. वर्तमान में जो कोहरा हमें दिखाई दे रहा है वह केवल इस आने वाले बड़े मौसमी बदलाव की आहट मात्र है.
प्रशासन ने इस कड़ाके की ठंड और बारिश की आशंका को देखते हुए विशेष रूप से वाहन चालकों और यात्रियों के लिए एडवायजरी जारी कर दी है. सुबह के समय सड़कों पर विजिबिलिटी बेहद कम रहने और बारिश के कारण फिसलन बढ़ने की चेतावनी दी गई है इसलिए लोगों को बहुत जरूरी होने पर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है. सबसे ज्यादा चिंता का विषय खेती-किसानी के क्षेत्र से निकलकर सामने आ रहा है क्योंकि रबी की फसलें इस समय तैयार हो रही हैं और बेमौसम बारिश के साथ अगर ओलावृष्टि होती है तो किसानों की मेहनत पर पानी फिर सकता है. जबलपुर, ग्वालियर, चंबल और रीवा संभाग के किसान इस समय पाले की आशंका से डरे हुए हैं क्योंकि गिरता हुआ पारा फसलों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है. ग्रामीण अंचलों में स्थिति और भी गंभीर है जहाँ लोग अलाव के सहारे रातें काट रहे हैं लेकिन कल से शुरू होने वाला यह नया दौर उनकी मुश्किलों को दोगुना कर देगा.
यह पश्चिमी विक्षोभ इतना सक्रिय है कि इसके कारण केवल बारिश ही नहीं बल्कि कुछ संवेदनशील इलाकों में ओले गिरने की संभावनाओं को भी नकारा नहीं जा सकता है. आने वाले 48 घंटे मध्य प्रदेश के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर आ रहे हैं जहाँ कुदरत का कहर ठंड, कोहरे और बारिश के रूप में एक साथ बरसने को तैयार है. कुल मिलाकर जबलपुर सहित प्रदेश के 20 से अधिक जिलों को अब एक बार फिर से भारी ठिठुरन और भीगे हुए दिनों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना होगा क्योंकि प्रकृति का यह चक्र फिलहाल थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है.
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