अंबेडकर चौक से रद्दी चौकी फ्लाईओवर की सुस्त रफ्तार पर हाईकोर्ट सख्त, विधायक लखन घनघोरिया की याचिका पर एक्शन

अंबेडकर चौक से रद्दी चौकी फ्लाईओवर की सुस्त रफ्तार पर हाईकोर्ट सख्त, विधायक लखन घनघोरिया की याचिका पर एक्शन

प्रेषित समय :20:14:29 PM / Wed, Feb 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर.शहर की यातायात व्यवस्था और विकास की धमनियों को जोड़ने वाले सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में से एक अंबेडकर चौक से रद्दी चौकी फ्लाईओवर के मामले में आज माननीय हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। संस्कारधानी के हृदय स्थल और उत्तर मध्य विधानसभा क्षेत्र की लाइफ लाइन माने जाने वाले इस मार्ग पर फ्लाईओवर निर्माण की कछुआ चाल अब कानूनी पेचीदगियों और जवाबदेही के घेरे में आ गई है। क्षेत्रीय विधायक लखन घनघोरिया द्वारा जनहित को ध्यान में रखते हुए दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने केंद्र और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। 

याचिका में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख किया गया है कि इस फ्लाईओवर का निर्माण कार्य न केवल कछुआ गति से चल रहा है बल्कि इसके कारण क्षेत्र की लाखों की आबादी नरकीय जीवन जीने को मजबूर है। हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए साफ लहजे में कहा है कि आखिर इतने महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को लटकाने के पीछे क्या कारण हैं और आम जनता को हो रही परेशानी का जिम्मेदार कौन है।

अदालत में हुई बहस के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने विस्तार से बताया कि अंबेडकर चौक से रद्दी चौकी तक का यह पूरा इलाका शहर का सबसे सघन व्यापारिक और रिहायशी क्षेत्र है। यहाँ फ्लाईओवर की घोषणा होने के बाद से ही जनता में एक उम्मीद जगी थी कि उन्हें हर दिन लगने वाले घंटों के जाम से मुक्ति मिलेगी लेकिन स्थिति इसके बिल्कुल उलट हो गई है। निर्माण कार्य के नाम पर सड़कों को खोदकर छोड़ दिया गया है जिससे न केवल धूल और प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है बल्कि आए दिन दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। विधायक लखन घनघोरिया की इस याचिका में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है कि बजट की उपलब्धता और प्रशासनिक स्वीकृतियों के बावजूद आखिर क्यों संबंधित ठेकेदार और सरकारी एजेंसियां इस काम को समय पर पूरा करने में विफल रही हैं। हाईकोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा है कि अब तक हुए काम की प्रगति रिपोर्ट क्या है और इसे अंतिम रूप देने के लिए क्या समय सीमा तय की गई है।

हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद प्रशासनिक महकमे और राजनैतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है क्योंकि मामला सीधे तौर पर जनसुविधाओं से जुड़ा हुआ है। गौर करने वाली बात यह है कि अंबेडकर चौक से रद्दी चौकी तक का रास्ता न केवल शहर के भीतर आवागमन का मुख्य जरिया है बल्कि यह क्षेत्र के आर्थिक व्यापार का भी केंद्र है। फ्लाईओवर निर्माण में देरी का सीधा असर यहाँ के व्यापारियों के रोजगार पर पड़ रहा है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और विभागों के बीच आपसी समन्वय न होने के कारण इस महत्वपूर्ण परियोजना को हाशिए पर डाल दिया गया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश दिया है कि आगामी सुनवाई तक केंद्र और राज्य दोनों सरकारें अपना पक्ष स्पष्ट करें और यह बताएं कि इस देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई है।

यह मामला अब केवल एक सड़क निर्माण का नहीं रह गया है बल्कि यह प्रशासन की जवाबदेही और जनता के संवैधानिक अधिकारों का बन चुका है। रद्दी चौकी तक जाने वाले इस मार्ग पर चलने वाले राहगीरों के लिए हर सफर एक जंग की तरह होता है और इसी पीड़ा को विधायक ने कोर्ट के समक्ष रखा था। हाईकोर्ट के इस कड़े रुख से अब यह उम्मीद जगी है कि सालों से अटका हुआ यह काम अब गति पकड़ेगा। शहर के नागरिक भी इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अब न्यायपालिका के दखल के बाद ही इस धूल भरी और जाम वाली समस्या का समाधान होगा। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि जनहित के कार्यों में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब देखना यह होगा कि अगली सुनवाई में सरकार क्या ठोस योजना पेश करती है और क्या वास्तव में अंबेडकर चौक फ्लाईओवर के निर्माण में कोई क्रांतिकारी बदलाव आता है या जनता को अभी और इंतजार करना होगा।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-