वक्री बुध और मार्गी गुरु के संयोग से बाजार में बड़े उतार चढ़ाव के संकेत, निवेशकों में बढ़ी सतर्कता

वक्री बुध और मार्गी गुरु के संयोग से बाजार में बड़े उतार चढ़ाव के संकेत, निवेशकों में बढ़ी सतर्कता

प्रेषित समय :20:26:33 PM / Wed, Feb 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

आने वाले कुछ सप्ताह वित्तीय बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों के लिहाज से काफी संवेदनशील माने जा रहे हैं. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार ग्रहों की स्थिति में होने वाले बदलाव का असर व्यापार, निवेश और शेयर बाजार पर पड़ सकता है.  इस अवधि में निवेशकों और व्यापारियों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता होगी, क्योंकि ग्रहों की स्थिति बाजार में अस्थिरता और तेज उतार-चढ़ाव के संकेत दे रही है.

ज्योतिषीय गणना के अनुसार 26 फरवरी से 21 मार्च 2026 तक व्यापार व लेन-देन के मुख्य कारक बुध महाराज कुंभ राशि में राहु के साथ वक्री रहेंगे. बुध-राहु की यह युति बाजार में अफवाह, भ्रम, अचानक निर्णय और तेज़ उतार-चढ़ाव को बढ़ाती है. इस समय तर्क से अधिक खबरें और मनोवैज्ञानिक डर-लालच काम करेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में बाजार में अचानक बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिससे निवेशकों को बिना पर्याप्त जानकारी के फैसले लेने से बचने की सलाह दी जा रही है.

कुंभ राशि का संबंध जनता, टेक्नोलॉजी, नेटवर्किंग और शेयर बाजार से माना जाता है. कुंभ राशि जनता, टेक्नोलॉजी, नेटवर्किंग और शेयर बाज़ार से जुड़ी है. इसलिए इस अवधि में आईटी, ऑनलाइन बिज़नेस, क्रिप्टो, मीडिया और स्टॉक मार्केट में अप्रत्याशित चालें देखने को मिल सकती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सेक्टर और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े निवेश में तेजी और गिरावट दोनों स्थितियां देखने को मिल सकती हैं, जिससे निवेशकों को सतर्क रहना होगा.

ज्योतिषीय विश्लेषण में यह भी संकेत दिए गए हैं कि बाजार में संभावित करेक्शन या पलटाव अचानक और तेज हो सकता है. यदि इस दौरान बाजार में करेक्शन या पलटाव आता है तो वह धीमा नहीं बल्कि तेज़ और झटकेदार होगा. वक्री बुध संकेत देता है कि पुरानी खबरें, पुराने डेटा या पुराने सौदे दोबारा प्रभाव में आ सकते हैं. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने आर्थिक आंकड़ों या नीतिगत निर्णयों का प्रभाव दोबारा बाजार में दिखाई दे सकता है, जिससे निवेशकों को निर्णय लेते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी.

विशेष रूप से 11 मार्च से 21 मार्च के बीच का समय अत्यधिक संवेदनशील बताया जा रहा है. 11 मार्च से 21 मार्च का समय सबसे संवेदनशील रहेगा. इस चरण में बड़े निवेशकों की चाल बदल सकती है, जिससे रिटेल निवेशक भ्रमित हो सकते हैं. बिना पुष्टि के सौदे करना नुकसान दे सकता है. बाजार विश्लेषकों के अनुसार इस दौरान बड़े निवेशकों की रणनीति में बदलाव देखने को मिल सकता है, जिससे छोटे निवेशकों पर भी असर पड़ सकता है.

इसी अवधि में गुरु ग्रह की स्थिति में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन होने जा रहा है. 11 मार्च से गुरु मार्गी होकर बुध की राशि में सक्रिय होंगे. गुरु का मार्गी होना नीतिगत निर्णय, ब्याज दर, सरकारी संकेत या वैश्विक खबरों के माध्यम से बाजार में दिशा परिवर्तन करा सकता है. यह परिवर्तन सकारात्मक भी हो सकता है और नकारात्मक भी—लेकिन स्थिरता नहीं रहेगी. आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान सरकारी नीतियों, ब्याज दरों और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाओं का असर बाजार की दिशा तय कर सकता है.

सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं के बाजार में भी उतार-चढ़ाव के संकेत मिल रहे हैं. सोना और चांदी में भावनात्मक खरीद-फरोख्त बढ़ेगी. कभी तेज़ उछाल, कभी अचानक गिरावट—दोनों के योग बनते हैं. दीर्घकालीन निवेशक धैर्य रखें, जबकि ट्रेडर को सख़्त अनुशासन चाहिए. विशेषज्ञों का कहना है कि कीमती धातुओं में निवेश करने वालों को जल्दबाजी से बचना चाहिए और लंबी अवधि की रणनीति अपनानी चाहिए.

ज्योतिषीय विश्लेषण में शेयर बाजार और व्यापारिक गतिविधियों के लिए जोखिम प्रबंधन को बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है. शेयर बाज़ार और समस्त व्यापार में इस अवधि में स्टॉप-लॉस, कैश होल्डिंग और जोखिम प्रबंधन सबसे ज़रूरी रहेंगे. बड़े फैसले टालना और छोटे, सोच-समझकर सौदे करना बेहतर रहेगा. बाजार विशेषज्ञों का भी मानना है कि निवेशकों को जोखिम कम करने के लिए संतुलित निवेश रणनीति अपनानी चाहिए और अनावश्यक जोखिम लेने से बचना चाहिए.

 वैश्विक स्तर पर भी कई आर्थिक और राजनीतिक घटनाएं बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं. ऐसे में ग्रहों की स्थिति के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का भी निवेश पर प्रभाव पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस अवधि में निवेशकों को बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए और किसी भी प्रकार के निवेश निर्णय से पहले पर्याप्त जानकारी और विश्लेषण करना आवश्यक होगा.

ज्योतिष और बाजार के संबंध को लेकर अलग-अलग मत हो सकते हैं, लेकिन निवेश विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि किसी भी प्रकार के निवेश में जोखिम प्रबंधन और सावधानी हमेशा जरूरी होती है. आने वाले सप्ताहों में बाजार की स्थिति अनिश्चित बनी रह सकती है, जिससे निवेशकों और व्यापारियों को सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है. ग्रहों की स्थिति को देखते हुए यह समय सतर्कता और संतुलित निवेश रणनीति अपनाने का माना जा रहा है.

*पंडित चंद्रशेखर नेमा हिमांशु*(9893280184)

मां कामाख्या साधक, जन्म कुंडली विशेषज्ञ वास्तु शास्त्री

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-