अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसियों से गूगल के समझौतों पर सवाल, लगभग 1000 कर्मचारियों ने पारदर्शिता और करार खत्म करने की मांग उठाई

अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसियों से गूगल के समझौतों पर सवाल, लगभग 1000 कर्मचारियों ने पारदर्शिता और करार खत्म करने की मांग उठाई

प्रेषित समय :21:18:41 PM / Sun, Feb 8th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनी गूगल एक बार फिर अपने सरकारी समझौतों को लेकर आंतरिक विरोध के केंद्र में आ गई है। कंपनी के लगभग एक हजार कर्मचारियों ने एक खुला पत्र जारी कर अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसियों इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट और कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन के साथ किए गए करारों पर कड़ी आपत्ति जताई है। कर्मचारियों ने गूगल प्रबंधन से इन समझौतों को सार्वजनिक करने और अंततः समाप्त करने की मांग की है।

‘गूगलर्स डिमांड वर्कर सेफ्टी एंड आईसीई कॉन्ट्रैक्ट ट्रांसपेरेंसी’ शीर्षक वाले इस पत्र में कर्मचारियों ने हाल के इमिग्रेशन अभियानों के दौरान हुई हिंसा को लेकर गहरी चिंता जताई है। पत्र में कहा गया है कि वे इन घटनाओं से स्तब्ध हैं और उन्हें यह जानकर भय हो रहा है कि गूगल की तकनीक कथित तौर पर ऐसे अभियानों को सक्षम बना रही है। कर्मचारियों का दावा है कि निगरानी और दमन से जुड़ी इस प्रक्रिया में कंपनी की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

पत्र में हाल में मारे गए कीथ पोर्टर, रेनी गुड और एलेक्स प्रेट्टी का उल्लेख किया गया है। कर्मचारियों का तर्क है कि जिन प्रणालियों और तकनीकों का इस्तेमाल इमिग्रेशन एजेंसियां कर रही हैं, उनमें गूगल के टूल्स की अहम भूमिका है। पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि गूगल इस निगरानी, हिंसा और दमन के अभियान को तकनीकी रूप से ताकत दे रहा है।

कर्मचारियों के अनुसार गूगल क्लाउड कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन की निगरानी प्रणालियों को सपोर्ट करता है। इसके साथ ही आरोप लगाया गया है कि गूगल, डेटा एनालिटिक्स कंपनी पेलैन्टिर के इमिग्रेशनओएस प्लेटफॉर्म को भी तकनीकी सहयोग देता है, जिसका इस्तेमाल आईसीई द्वारा किया जाता है। कर्मचारियों ने यह भी दावा किया कि सीबीपी गूगल के जनरेटिव एआई टूल्स का उपयोग कर रहा है और गूगल प्ले स्टोर पर ऐसे ऐप्स को ब्लॉक किया जा रहा है जो आईसीई की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बनाए गए हैं।

इस पत्र में गूगल के चीफ साइंटिस्ट जेफ डीन के हालिया बयान का भी जिक्र किया गया है, जिसमें उन्होंने लोगों से मौजूदा हालात पर चुप न रहने और अपनी आवाज उठाने की अपील की थी। कर्मचारियों का कहना है कि यह बयान कंपनी की वास्तविक नीतियों और कार्रवाइयों से मेल नहीं खाता। पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले कर्मचारियों ने लिखा है कि वे होमलैंड सिक्योरिटी विभाग, सीबीपी और आईसीई के साथ गूगल की साझेदारी के सख्त खिलाफ हैं और इन सभी समझौतों को लेकर पूरी पारदर्शिता चाहते हैं।

बीबीसी से बातचीत में गूगल के एक कर्मचारी एलेक्स ने, जो पिछले सात वर्षों से कंपनी में काम कर रहे हैं, कहा कि यह समझ से परे है कि गूगल ऐसे संगठनों के साथ साझेदारी बनाए हुए है। एक अन्य कर्मचारी, जिन्होंने अपनी पहचान केवल ‘एस’ के रूप में बताई, ने कहा कि अगर उन्हें पहले से गूगल के इन सरकारी संबंधों की जानकारी होती तो वे शायद कभी कंपनी से नहीं जुड़तीं।

यह विरोध केवल गूगल तक सीमित नहीं है। तकनीकी उद्योग में इस तरह का असंतोष लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा के कर्मचारियों ने भी इसी तरह के खुले पत्रों के जरिए अपनी कंपनियों की सरकारी एजेंसियों के साथ साझेदारियों पर सवाल उठाए हैं। गूगल के कर्मचारी न केवल करार खत्म करने की मांग कर रहे हैं, बल्कि आंतरिक सुरक्षा उपायों, इमिग्रेशन से जुड़े कर्मचारियों के लिए सहयोग और कंपनी स्तर पर खुली बैठक की भी मांग कर रहे हैं, ताकि इन मुद्दों पर सीधी बातचीत हो सके।

गौरतलब है कि इससे पहले भी गूगल को अपने सैन्य प्रोजेक्ट्स को लेकर विरोध का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2018 में कंपनी को कर्मचारियों के भारी दबाव के बाद प्रोजेक्ट मेवन को रद्द करना पड़ा था, जो अमेरिकी रक्षा विभाग के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ा एक प्रोजेक्ट था। इसके बावजूद गूगल आज भी कई संघीय अनुबंधों से जुड़ा हुआ है, जिनमें उसके जेमिनी एआई मॉडल्स से जुड़े करार और रक्षा क्षेत्र की कंपनियों के साथ सहयोग शामिल है।

फिलहाल गूगल की ओर से इस खुले पत्र पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि यदि कंपनी ने उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया, तो आने वाले दिनों में विरोध और तेज हो सकता है। यह मामला एक बार फिर इस बहस को केंद्र में ले आया है कि बड़ी टेक कंपनियों की सामाजिक जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए और सरकारी एजेंसियों के साथ उनकी साझेदारियां किन नैतिक सीमाओं में रहकर की जानी चाहिए।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-