सेलिना जेटली के भाई की हिरासत पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त केंद्र से संपर्क की संभावनाओं पर मांगा जवाब

सेलिना जेटली के भाई की हिरासत पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त केंद्र से संपर्क की संभावनाओं पर मांगा जवाब

प्रेषित समय :21:55:22 PM / Tue, Feb 10th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. बॉलीवुड अभिनेत्री सेलिना जेटली के भाई मेजर (सेवानिवृत्त) विक्रांत कुमार जेटली की संयुक्त अरब अमीरात में हिरासत को लेकर चल रहे मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से महत्वपूर्ण सवाल पूछा है। अदालत ने विदेश मंत्रालय के वकील से पूछा है कि क्या सेलिना जेटली के भाई से संपर्क स्थापित करना संभव है ताकि उन्हें अदालत से बातचीत का अवसर दिया जा सके। इस मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को तय की गई है। अदालत ने साथ ही मामले से जुड़े सभी पक्षों को निर्देश दिया है कि वे अदालत की अनुमति के बिना मीडिया से बातचीत न करें।

दिल्ली हाईकोर्ट में यह मामला उस याचिका के तहत सुनवाई में है जिसमें सेलिना जेटली ने अपने भाई की हिरासत को अवैध बताते हुए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। अभिनेत्री का दावा है कि उनके भाई को सितंबर 2024 से संयुक्त अरब अमीरात में हिरासत में रखा गया है और इतने लंबे समय बीत जाने के बावजूद उनके स्वास्थ्य, कानूनी स्थिति और सुरक्षा को लेकर पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

अदालत ने विदेश मंत्रालय के वकील को निर्देश दिया है कि वह मंत्रालय और संबंधित भारतीय वाणिज्य दूतावास से संपर्क कर यह सुनिश्चित करने का प्रयास करें कि मेजर (सेवानिवृत्त) विक्रांत जेटली को अदालत से बातचीत का अवसर मिल सके। अदालत का यह कदम मामले में पारदर्शिता और तथ्य स्पष्ट करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश जारी करते हुए संयुक्त अरब अमीरात स्थित एक कानूनी फर्म को विक्रांत जेटली का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति दी थी। यह फर्म दुबई और अबू धाबी में कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है और विशेष बात यह है कि यह मामला बिना किसी शुल्क के यानी प्रो बोनो आधार पर संभालने को तैयार है। इस कानूनी फर्म का नाम अल मरी पार्टनर्स बताया गया है, जिसे सेलिना जेटली के वकीलों ने सुझाया था।

सेलिना जेटली के वकील राघव काकर ने अदालत को बताया था कि यह फर्म स्वतंत्र रूप से मामले की जानकारी जुटाकर विक्रांत जेटली का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार हुई है। उनके साथ अधिवक्ता माधव अग्रवाल और सुराधिश वत्स भी इस मामले में कानूनी सहायता प्रदान कर रहे हैं। अदालत ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए विदेश मंत्रालय को आवश्यक औपचारिक आदेश जारी करने का निर्देश दिया था ताकि संयुक्त अरब अमीरात में विक्रांत जेटली को कानूनी सहायता मिल सके।

अभिनेत्री की याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि उनके भाई को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया है और उनकी स्थिति को लेकर परिवार को स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार ने अब तक इस मामले में पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं और परिवार को बुनियादी जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत पहले भी केंद्र सरकार को निर्देश दे चुकी है कि वह विक्रांत जेटली को कानूनी सहायता उपलब्ध कराए और भाई-बहन के बीच संवाद स्थापित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। नवंबर 2025 में अदालत ने विदेश मंत्रालय को इस मामले के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का भी निर्देश दिया था ताकि मामले की निगरानी और समन्वय बेहतर तरीके से किया जा सके।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सेलिना जेटली लगातार अपने भाई की सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास कर रही हैं। हाल ही में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट परिसर से बाहर निकलते हुए देखा गया था, हालांकि उन्होंने इस मामले पर मीडिया से कोई टिप्पणी नहीं की। अभिनेत्री ने पहले भी कई बार सोशल मीडिया के माध्यम से अपने भाई की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की है और न्याय की मांग की है।

सेलिना जेटली के भाई मेजर (सेवानिवृत्त) विक्रांत जेटली भारतीय सेना में अधिकारी रह चुके हैं। उनकी संयुक्त अरब अमीरात में हिरासत को लेकर कई तरह की अटकलें और चर्चाएं चल रही हैं, हालांकि आधिकारिक स्तर पर इस मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। यही कारण है कि परिवार और अदालत दोनों इस मामले में स्पष्टता चाहते हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी भारतीय नागरिक को विदेश में हिरासत में लिया जाता है तो उस स्थिति में विदेश मंत्रालय और संबंधित भारतीय दूतावास की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। दूतावास का दायित्व होता है कि वह हिरासत में लिए गए व्यक्ति की कानूनी सहायता सुनिश्चित करे और उसके अधिकारों की रक्षा के लिए संबंधित देश के अधिकारियों से संपर्क बनाए रखे।

इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की सक्रिय भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि वह इस मामले में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के पक्ष में है। अदालत का केंद्र सरकार से सीधे संपर्क स्थापित करने की संभावनाओं पर सवाल उठाना इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

राजनयिक विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में कानूनी प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली हो सकती है, क्योंकि इसमें दो देशों के कानून और राजनयिक संबंधों का भी ध्यान रखना पड़ता है। ऐसे मामलों में कानूनी सहायता और राजनयिक समन्वय दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण होते हैं।

इस मामले ने मानवाधिकार और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशों में रहने या काम करने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई जरूरी होती है।

फिलहाल इस मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को होनी है, जिसमें अदालत केंद्र सरकार से संपर्क स्थापित करने के प्रयासों और विक्रांत जेटली की स्थिति को लेकर प्रगति रिपोर्ट मांग सकती है। परिवार और समर्थकों को उम्मीद है कि अदालत के हस्तक्षेप से मामले में जल्द स्पष्टता आएगी और विक्रांत जेटली को न्याय मिल सकेगा।

इस बीच यह मामला लगातार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजरें आगामी सुनवाई और केंद्र सरकार की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। अदालत के अगले फैसले से यह तय हो सकता है कि मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे और विक्रांत जेटली को कानूनी और मानवीय सहायता किस प्रकार उपलब्ध कराई जाएगी।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-