जबलपुर, मंडला. मध्य प्रदेश के आदिवासी जिले मंडला को जबलपुर सहित प्रदेश व देश के बड़े शहरों से रेल नेटवर्क से जोडऩे की मांग को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है. इसी को लेकर सोमवार 9 फरवरी को रेलवे संघर्ष समिति के बैनर तले सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे और महाराजपुर रेलवे स्टेशन के सामने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन कर सरकार को साफ संदेश दे दिया कि अब और उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी. धरने में बुजुर्गों, युवाओं और महिलाओं की भी बड़ी संख्या में भागीदारी देखने को मिली.
धरना-प्रदर्शन के बाद प्रदर्शनकारियों ने रैली निकाली, जो महाराजपुर रेलवे स्टेशन तक पहुंची. यहां रेल मंत्री के नाम स्टेशन प्रबंधक को ज्ञापन सौंपा गया. ज्ञापन में मांग की गई कि मंडला को जल्द से जल्द जबलपुर, भोपाल, इंदौर, नागपुर समेत अन्य बड़े शहरों से सीधी रेल सेवा से जोड़ा जाए.
समिति पदाधिकारियों ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि मंडला लोकसभा क्षेत्र का एकमात्र रेलवे स्टेशन मंडला फोर्ट वर्ष 1909 में स्थापित हुआ था. हालांकि, देशभर में रेलवे के व्यापक विस्तार के बावजूद यह स्टेशन आज भी पिछड़ा हुआ है. वर्तमान में यहां से केवल 40 किलोमीटर दूर नैनपुर तक ही रेल सेवा सीमित है, जिससे क्षेत्र की जनता को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है. कई बार ज्ञापन और आंदोलनों के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है.
पेंचवैली का मंडला तक विस्तार करने की मांग
ज्ञापन में प्रमुख मांगों में इंदौर-नैनपुर पंचवैली एक्सप्रेस को मंडला तक विस्तारित करना, मंडला से नागपुर और जबलपुर होकर दिल्ली के लिए सीधी रेल सेवा शुरू करना, तथा रायपुर, भोपाल और पुणे के लिए ट्रेनों का संचालन शामिल है. इसके अतिरिक्त, पेंड्रा से डिंडौरी-मंडला-गोटेगांव रेल लाइन के शीघ्र निर्माण और मंडला-घंसौर रेलवे स्टेशन को जोडऩे की मांग की गई है. पंडरिया-बिछिया-मंडला-घंसौर-जबलपुर नई रेल लाइन के निर्माण की मांग भी इसमें शामिल है.
समिति ने मंडला फोर्ट स्टेशन पर ट्रेन वाशिंग एप्रोन, कोचिंग डिपो और टर्मिनल स्तर की सुविधाएं विकसित करने की मांग की. साथ ही, रेलवे कर्मचारियों के लिए आवास और विश्रामगृह तथा स्टेशन परिसर में आरपीएफ थाना स्थापित करने की भी मांग रखी गई. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा.



