उखरुल.मणिपुर के उखरूल जिले के व्यावसायिक कस्बे लिटन में एक बार फिर हिंसा भड़कने से इलाके में तनाव गहरा गया है. नागा और कुकी समुदायों के बीच हुई झड़प में कई घरों को आग के हवाले कर दिया गया, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा. प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की है और प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया जारी है. फिलहाल हालात तनावपूर्ण जरूर हैं, लेकिन प्रशासन का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है.
पुलिस के अनुसार रविवार देर रात लिटन बाजार इलाके में दोनों समुदायों के बीच हिंसक झड़प शुरू हो गई थी. रात करीब 11:30 बजे से आधी रात के बीच हुई इस घटना के दौरान कई जगहों पर गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई. पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस हिंसा में लगभग 25 मकान और चार सरकारी क्वार्टर जलकर खाक हो गए. इनमें से दो घर कुकी समुदाय से जुड़े लोगों के बताए जा रहे हैं. आगजनी और गोलीबारी की घटनाओं के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़कर भागने लगे.
स्थानीय निवासियों के अनुसार हिंसा के बाद हालात इतने भयावह हो गए कि लोगों को अपने परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा. कई लोग पिकअप वाहनों, निजी गाड़ियों और पैदल ही गांव से निकलते नजर आए. लोग अपने साथ जरूरी घरेलू सामान, गद्दे और कीमती वस्तुएं लेकर घर छोड़ते देखे गए. प्रशासन ने लोगों की सुरक्षित निकासी के लिए विशेष इंतजाम किए हैं और आसपास के गांव मांगकोट समेत अन्य प्रभावित इलाकों से लोगों को बाहर निकाला जा रहा है.
पुलिस का कहना है कि इस हिंसा की जड़ सात फरवरी की शाम हुई एक शराब के नशे में हुई झड़प में छिपी है. जानकारी के अनुसार लिटन सारेइखोंग इलाके में सात फरवरी को एक विवाद के दौरान तांगखुल नागा समुदाय के एक व्यक्ति स्टर्लिंग के साथ कथित रूप से मारपीट की गई थी. घायल व्यक्ति को इलाज के लिए इंफाल के अस्पताल में भर्ती कराया गया था. पुलिस का मानना है कि इसी घटना के बाद दोनों समुदायों के बीच तनाव बढ़ गया, जो रविवार रात हिंसक रूप में सामने आया.
स्थिति को काबू में रखने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तुरंत मौके पर भेजा गया. लिटन पुलिस स्टेशन की टीम ने स्थानीय लोगों की सुरक्षित निकासी में मदद की और इलाके में कानून व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की. इसके अलावा सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और असम राइफल्स के जवानों को भी प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया है. अधिकारियों के अनुसार अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके.
उखरुल जिले के जिलाधिकारी ने रविवार शाम को लिटन गांव में कर्फ्यू लगाने का आदेश जारी कर दिया. प्रशासन ने कर्फ्यू लगाने का फैसला दोनों समुदायों के बीच शांति व्यवस्था बनाए रखने और लोगों की जान-माल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया. अधिकारियों का कहना है कि स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और किसी भी तरह की अफवाह या हिंसा को रोकने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है.
लिटन कस्बा इंफाल से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र है. इस कस्बे में तांगखुल नागा और कुकी समुदाय के लोग लंबे समय से साथ रहते आए हैं. यहां बाजार और आवासीय इलाके एक-दूसरे से जुड़े होने के कारण किसी भी तरह की सामुदायिक झड़प तेजी से फैलने का खतरा बना रहता है. यही वजह है कि प्रशासन इस घटना को लेकर बेहद सतर्क नजर आ रहा है.
पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. सुरक्षा एजेंसियां इलाके में लगातार गश्त कर रही हैं और ड्रोन तथा अन्य तकनीकी माध्यमों से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है.
इस बीच मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने हिंसा में घायल लोगों का हालचाल जानने के लिए क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान अस्पताल का दौरा किया. मुख्यमंत्री के साथ राज्य भाजपा अध्यक्ष अधिकारिमायुम शारदा देवी और अन्य विधायक भी मौजूद रहे. मुख्यमंत्री ने अस्पताल में डॉक्टरों और प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत कर घायलों को दिए जा रहे उपचार की समीक्षा की.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता और इलाज उपलब्ध कराएगी. उन्होंने इस घटना को गलतफहमी का परिणाम बताते हुए कहा कि अब स्थिति नियंत्रण में है और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है. उन्होंने सभी समुदायों से संयम बनाए रखने और शांति कायम रखने की अपील की. मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून का पालन करना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है और किसी भी तरह की हिंसा समाज के लिए नुकसानदायक होती है. उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की.
हिंसा की घटना के बाद राज्य सरकार और प्रशासन लगातार स्थानीय समुदायों के नेताओं और सामाजिक संगठनों से संपर्क बनाए हुए हैं. अधिकारियों का मानना है कि संवाद और आपसी समझदारी के जरिए ही स्थिति को पूरी तरह सामान्य किया जा सकता है. सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ-साथ शांति समिति की बैठकें भी आयोजित की जा रही हैं ताकि दोनों समुदायों के बीच भरोसा बहाल किया जा सके.
हालांकि इलाके में फिलहाल शांति बनी हुई है, लेकिन लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है. जिन परिवारों के घर जलकर खाक हो गए हैं, वे राहत शिविरों और रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर हैं. प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री और अस्थायी आवास की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया है.
यह घटना एक बार फिर मणिपुर में सामुदायिक तनाव की संवेदनशीलता को उजागर करती है. पिछले कुछ वर्षों में राज्य के कई हिस्सों में सामुदायिक संघर्ष की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे सामाजिक सौहार्द और विकास प्रभावित होता रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी शांति के लिए सरकार को सुरक्षा उपायों के साथ-साथ सामाजिक संवाद और विश्वास निर्माण की दिशा में भी लगातार प्रयास करने होंगे.
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता हिंसा प्रभावित इलाकों में सामान्य स्थिति बहाल करना और विस्थापित लोगों को सुरक्षित वापस बसाना है. पुलिस और सुरक्षा बल लगातार इलाके में मौजूद हैं और अधिकारियों का कहना है कि हालात पर पूरी तरह नजर रखी जा रही है. आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कदमों से ही यह तय होगा कि यह संवेदनशील क्षेत्र पूरी तरह सामान्य स्थिति में कब लौट पाएगा.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

