-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर (व्हाट्सएप- 8875863494)
* विजया एकादशी - 13 फरवरी 2026, शुक्रवार
* पारण का समय - 07:10 एएम से 09:26 एएम (14 फरवरी 2026)
* पारण के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय - 04:01 पीएम
* एकादशी तिथि प्रारम्भ - 12 फरवरी 2026 को 12:22 पीएम बजे
* एकादशी तिथि समाप्त - 13 फरवरी 2026 को 02:25 पीएम बजे
अच्युतम केशवम रामनारायणम, कृष्ण दामोदरम् वासुदेवम् हरे.
श्रीधरम् माधवम् गोपिकावल्लभम, जानकी नायकम श्रीरामचन्द्रम् भजे..
* जीवन में कामयाबी के लिए नियमित रूप से विष्णुदेव की पूजा करें.
* धर्मग्रंथों में... जीवन में सुख के लिए एकादशी व्रत-पूजा को उत्तम मार्ग बताया है.
* जो श्रद्धालु यह व्रत रखना चाहते हैं, उन्हें दशमी को एक बार भोजन करना चाहिए.
* एकादशी के दिन पवित्र स्नानादि के पश्चात गंगा जल, तुलसी दल, तिल, फूल, पंचामृत आदि से भगवान नारायण की पूजा करनी चाहिए.
* इस व्रत में व्रत रखने वाले श्रद्धालु को यथासंभव बिना जल के रहना चाहिए.
* अगर व्रती श्रद्धालु चाहें तो संध्याकाल में दीपदान के पश्चात फलाहार ग्रहण कर सकते हैं.
* क्योंकि सुख के लिए यह व्रत है इसलिए यथासंभव पति-पत्नी, दोनों को व्रत रखना चाहिए.
श्री गौमाता धर्म-कर्म पंचांग, चौघड़िया - 11 फरवरी 2026
* विंछुड़ो, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग
ब्रह्म मुहूर्त 05:30 ए एम से 06:21 ए एम, प्रातः सन्ध्या 05:55 ए एम से 07:12 ए एम, विजय मुहूर्त 02:42 पी एम से 03:27 पी एम, गोधूलि मुहूर्त 06:25 पी एम से 06:50 पी एम, सायाह्न सन्ध्या 06:27 पी एम से 07:44 पी एम, अमृत काल 03:52 ए एम (12 फरवरी 2026) से 05:39 ए एम (12 फरवरी 2026), निशिता मुहूर्त 12:24 ए एम (12 फरवरी 2026) से 01:15 ए एम (12 फरवरी 2026), सर्वार्थ सिद्धि योग 07:12 ए एम से 10:53 ए एम, अमृत सिद्धि योग 07:12 ए एम से 10:53 ए एम
* दिन का चौघड़िया
लाभ - 07:12 से 08:36
अमृत - 08:36 से 10:01
काल - 10:01 से 11:25
शुभ - 11:25 से 12:50
रोग - 12:50 से 02:14
उद्वेग - 02:14 से 03:38
चर - 03:38 से 05:03
लाभ - 05:03 से 06:27
* रात्रि का चौघड़िया
उद्वेग - 06:27 से 08:03
शुभ - 08:03 से 09:38
अमृत - 09:38 से 11:14
चर - 11:14 से 12:49
रोग - 12:49 से 02:25
काल - 02:25 से 04:00
लाभ - 04:00 से 05:36
उद्वेग - 05:36 से 07:11
* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, विभिन्न पंचांगों, धर्मग्रथों से साभार ली गई है, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!

