लाड़ली-बहना योजना के नए पंजीयन करने याचिका खारिज, पूर्व एमएलए की याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा, सरकार का नीतिगत निर्णय

लाड़ली-बहना योजना के नए पंजीयन करने याचिका खारिज, पूर्व एमएलए की याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा, सरकार का नीतिगत निर्णय

प्रेषित समय :16:05:42 PM / Thu, Feb 12th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

इंदौर. एमपी की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को लेकर इंदौर हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने योजना में नए रजिस्ट्रेशन शुरू करने. राशि बढ़ाकर 3000 रुपए करने और आयु सीमा में बदलाव की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है.

जस्टिस विजय कुमार शुक्ला व जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि योजना कब शुरू करनी है और कब बंद, यह सरकार का नीतिगत फैसला है. इसमें कोर्ट तब तक दखल नहीं दे सकता जब तक कि वह पूरी तरह असंवैधानिक न हो. पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने वरिष्ठ अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल के माध्यम से कोर्ट में दलील दी थी कि योजना 20 अगस्त 2023 से बंद है. उन्होंने तर्क दिया कि नए पंजीयन जो महिलाएं 20 अगस्त 2023 के बाद 21 साल की हुई हैं, उन्हें पोर्टल बंद होने के कारण लाभ नहीं मिल पा रहा है. यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के खिलाफ है.  

सकलेखा ने अपनी याचिका में यह मांग भी की थी कि चुनावी वादे के मुताबिक लाड़ली बहना योजना की हितग्राहियों को 3000 रुपए प्रति माह के हिसाब से राशि दी जाए. उन्होंने इस योजना में न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम सीमा हटाकर जीवनपर्यंत लाभ देने की मांग भी की थी. शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता संदीप भार्गव ने तर्क दिया कि यह एक कार्यकारी नीति है और इसमें कोई मनमानी नहीं है. कोर्ट ने सरकार के तर्कों से सहमति जताते हुए आदेश में कहा कि योजना की तारीखें तय करना राज्य का अधिकार क्षेत्र है. इसे शत्रुतापूर्ण भेदभाव नहीं माना जा सकता. न्यायालय केवल नीति की वैधता की जांच करता हैए उसकी बुद्धिमत्ता की नहीं. कोर्ट ने पाया कि 21 से 60 वर्ष की आयु सीमा और पंजीकरण की समय.सीमा तय करने में कुछ भी असंवैधानिक नहीं है. याचिका खारिज होने के बाद पारस सकलेचा ने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ माननीय उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-