जबलपुर. एमपी में एक बार फिर उपभोक्ताओं को महंगी बिजली का करंट देने ेकी तैयारी की जा रही है. प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली की दरों में 10.19 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव राज्य विद्युत नियामक आयोग को दिया है.
खबर है कि यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो गया तो 1 अप्रैल 2026 से नई दरें लागू होंगी. इससे आम लोगों के घरेलू बजट पर असर पड़ेगा. अनुमान है कि इस बढ़ोतरी से हर घरेलू उपभोक्ता पर साल भर में 3600 रुपए से ज्यादा का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है. यानी महीने में लगभग 300 रुपए तक बिजली बिल बढ़ सकता है. विशेषज्ञों की माने तो कोयले पर जीएसटी सेस हट जाने से बिजली बनाने का खर्च पहले से कम हो चुका है. इसके बावजूद कंपनियों ने दरें बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है. अब यह फैसला नियामक आयोग के पास है वह प्रस्ताव को मंजूरी दे या नहीं. जनसुनवाई भी चल रही है जहां लोग अपनी राय दे सकते हैं.
बिजली कंपनियों ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि उन्हें लगातार बढ़ता घाटा हो रहा है. परिचालन खर्च बढ़ गए हैं, अन्य वित्तीय चुनौतियां भी हैं. इस बार पावर मैनेजमेंट कंपनी ने कुल 6044 करोड़ रुपए के घाटे को भरने के लिए यह मांग की है. अगर यह बढ़ोतरी लागू हुई तो इसका सीधा असर उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल पर पड़ेगा. यदि कोई परिवार महीने में 400 यूनिट बिजली इस्तेमाल करता है तो उसका मौजूदा बिल लगभग 3250 रुपए आता है. बढ़ोतरी के बाद यह बिल 3ए550 रुपए से ज्यादा हो जाएगा. यानी हर महीने लगभग 300 रुपए की बढ़ोतरी होगी. साल भर में कुल 3600 रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा.
स्मार्ट मीटर को लेकर वादाखिलाफी-
जब स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे थे उस वक्त दावा किया गया था कि इनका कोई भी खर्च उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा. कहा गया था कि स्मार्ट मीटर से बिजली चोरी रुकेगी, लाइन लॉस कम होगा और बचत से ही इनकी लागत निकल जाएगी. लेकिन अब प्रस्ताव में 820 करोड़ रुपए का खर्च सीधे उपभोक्ताओं पर डालने की तैयारी है.

