ईरान पर अमेरिका-इजराइल का हमला, कई शहरों में धमाके, ट्रम्प बोले- अमेरिकियों की सुरक्षा के लिए अटैक किया

ईरान पर अमेरिका-इजराइल का हमला, कई शहरों में धमाके, ट्रम्प बोले- अमेरिकियों की सुरक्षा के लिए अटैक किया

प्रेषित समय :13:46:37 PM / Sat, Feb 28th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

तेल अवीव/तेहरान. इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों पर हमला कर दिया है. भारतीय समय के मुताबिक शनिवार सुबह तेहरान समेत कई शहरों में धमाके सुने गए हैं और हवाई हमलों के सायरन बज रहे हैं.

इजराइल डिफेंस फोर्स ने ईरान पर हमले की जानकारी देते हुए इसे प्रिवेंटिव अटैक बताया है. हमले के बाद ईरान ने सभी उड़ानें रोक दी हैं और एयरस्पेस खाली करा लिया है. इधर इजराइल में भी एयर अटैक सायरन सुनाई दे रहे हैं. संवेदनशील इलाके खाली कराए जा रहे हैं. लोगों से घरों में रहने की अपील की गई है.

वहीं अल जजीरा ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि यह अमेरिका और इजराइल का जॉइंट मिलिट्री एक्शन है. इसके तहत ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई के दफ्तर के पास हमला किया गया. हमले के बाद खामेनेई को सुरक्षित जगह शिफ्ट कर दिया गया है.  इजराइल ने ईरान के खिलाफ अपने नए अभियान का नाम लियोनस् रोर (शेर की दहाड़) रखा है. यह नाम इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तय किया है. बताया गया है कि सेना ने पहले इस हमले के लिए दूसरा नाम रखा था. यह हमला ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों को लेकर चल रही बातचीत के बीच हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर हमले की धमकी दी थी. शुक्रवार को अमेरिका ने अपने नागरिकों से तुरंत इजरायल छोडऩे के लिए कहा था.

बैलिस्टिक मिसाइल पर विवाद चल रहा था

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर हमले की धमकी दी थी. अमेरिकी सेना पहले ही ईरान को चारों तरफ से घेर चुकी है. इससे पहले शुक्रवार को अमेरिका ने अपने नागरिकों से तुरंत इजराइल छोडऩे के लिए कहा था. ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौते की बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बन गया है. ईरान इस पर बिल्कुल भी समझौता करने को तैयार नहीं है और इसे अपनी रेड लाइन मानता है.

ईरान का कहना है कि यह उसके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रक्षा के लिए जरूरी है. ईरान का कहना है कि जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु साइटों पर हमला किया, तब ईरान की मिसाइलों ने ही उसकी रक्षा की. ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बात नहीं होगी. यह ईरान की रक्षात्मक क्षमता है और इसे छोडऩा मतलब खुद को कमजोर करना होगा. ईरान कहता है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी, मिसाइल या क्षेत्रीय समूहों पर नहीं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-