नई दिल्ली. अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच चांदी की कीमतों में बुधवार को जोरदार उछाल दर्ज किया गया. लगातार 10 दिनों तक गिरावट झेलने के बाद चांदी के भाव में करीब 6 प्रतिशत की तेजी आई है, जिससे निवेशकों और कारोबारियों के बीच एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. घरेलू वायदा बाजार में चांदी का भाव 12,861 रुपये बढ़कर लगभग 2,36,802 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया, जो हाल के दिनों में सबसे बड़ी उछालों में से एक माना जा रहा है.
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर मई डिलीवरी के लिए चांदी के भाव में यह तेजी देखी गई. वहीं वैश्विक बाजार में भी चांदी की कीमतों में मजबूती दर्ज की गई, जहां मई वायदा कीमत लगभग 5.6 प्रतिशत बढ़कर 73.44 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई. विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी केवल तकनीकी सुधार नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक संकेतों का असर भी है.
विश्लेषकों के अनुसार चांदी की कीमतों में आई इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर की कमजोरी है. डॉलर के कमजोर होने से कीमती धातुओं में निवेश बढ़ जाता है क्योंकि अन्य मुद्राओं में यह अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है. इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने भी बाजार को राहत दी है, जिससे महंगाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई है और निवेशकों का रुझान फिर से धातुओं की ओर बढ़ा है.
कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि हाल के दिनों में चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट के बाद निवेशकों ने इसे कम कीमत पर खरीदने का मौका माना. इस वैल्यू बायिंग के चलते मांग बढ़ी और कीमतों को समर्थन मिला. इसके साथ ही शॉर्ट कवरिंग भी तेजी की एक अहम वजह रही, जिसमें पहले से बिकवाली करने वाले निवेशकों ने अपने सौदे बंद किए, जिससे कीमतें तेजी से ऊपर गईं.
वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक परिस्थितियों का भी इस उछाल में योगदान माना जा रहा है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच संघर्ष को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर आकर्षित किया है. हालांकि हाल में संघर्ष को कम करने के प्रयासों और संभावित युद्धविराम की खबरों ने बाजार में संतुलन बनाने का काम भी किया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा कीमतों में गिरावट और ब्याज दरों को लेकर नरम रुख की उम्मीद ने भी चांदी को समर्थन दिया है. जब महंगाई का दबाव कम होता है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को आक्रामक रूप से बढ़ाने से बचते हैं, जिससे कीमती धातुओं के लिए माहौल अनुकूल बनता है.
हालांकि कुछ जानकार यह भी मानते हैं कि यह तेजी लंबे समय तक बनी रहे, इसकी गारंटी नहीं है. यदि अमेरिकी डॉलर फिर से मजबूत होता है या वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव आता है, तो चांदी की कीमतों पर दबाव फिर से बन सकता है. इसलिए निवेशकों को सतर्क रहकर निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है.
घरेलू बाजार में भी इस तेजी का असर साफ दिखाई दे रहा है. ज्वैलर्स और निवेशकों के बीच चांदी की मांग में अचानक वृद्धि देखी गई है. शादी-विवाह के सीजन और निवेश की दृष्टि से भी चांदी को सुरक्षित विकल्प माना जाता है, जिससे बाजार में इसकी अहमियत और बढ़ जाती है.
कुल मिलाकर, 10 दिन की गिरावट के बाद चांदी की कीमतों में आई यह तेज उछाल बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है. यह दर्शाता है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, मुद्रा विनिमय दरों और निवेशकों के व्यवहार का कीमती धातुओं पर सीधा असर पड़ता है. आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

