बीमारी से जंग और भाई के अधूरे सपनों को पूरा करने का साहस लिए अरुणाचल की अनाई ने जीता यादगार केआईटीजी स्वर्ण

बीमारी से जंग और भाई के अधूरे सपनों को पूरा करने का साहस लिए अरुणाचल की अनाई ने जीता यादगार केआईटीजी स्वर्ण

प्रेषित समय :17:21:51 PM / Sat, Mar 28th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

रायपुर, 28 मार्च 2026
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के पहले संस्करण के लिए रायपुर रवाना होने से कुछ ही दिन पहले अरुणाचल प्रदेश की 21 वर्षीय वेटलिफ्टर अनाई वांगसु अस्पताल के बिस्तर पर थीं. उनकी पुरानी गैस्ट्रिक समस्या एक बार फिर उभर आई थी और ताकत लौटाने के लिए उन्हें इंट्रावेनस फ्लूइड्स पर रखा गया. ऐसे में उनके इन खेलों में भाग लेने पर ही सवाल खड़े हो गए थे.

अनाई के लिए यह संघर्ष नया नहीं है. 2019 से वह इस बीमारी से जूझ रही हैं, जो बिना किसी चेतावनी के उन्हें कमजोर, डिहाइड्रेटेड और थका हुआ बना देती है—एक ऐसे खेल में जहां ताकत और संतुलन सबसे अहम होते हैं.

लेकिन इस शारीरिक चुनौती के आगे हार मानने के बजाय अनाई ने वापसी की. अस्पताल से छुट्टी मिलने के अगले ही दिन वह फिर से प्रशिक्षण में जुट गईं, क्योंकि इस बार वह अपने करियर के ‘करीब आकर चूक जाने’ की कहानी को बदलना चाहती थीं.

अनाई ने यहां महिलाओं के 58 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण जीतने के बाद साई मीडिया से कहा,” मैंने पहले कांस्य और रजत पदक जीते थे और परिवार में सभी पूछते थे कि मैं स्वर्ण कब जीतूंगी. अब सब बहुत खुश हैं कि आखिरकार मैंने यह लक्ष्य हासिल कर लिया.”

इससे पहले अनाई ने यूथ नेशनल्स में दो कांस्य पदक जीते थे. इसके अलावा उन्होंने विभिन्न खेलो इंडिया प्रतियोगिताओं, जिसमें 2025 का खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स (राजस्थान) भी शामिल है, में रजत पदक हासिल किए. लेकिन स्वर्ण हर बार उनसे थोड़ा दूर रह जाता था.

पिछले साल ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी नेशनल्स में वह केवल एक लिफ्ट से स्वर्ण चूक गई थीं, क्योंकि एक मिनट की समय सीमा समाप्त हो गई थी. उस पल की टीस आज भी उनके दिल में है. उन्होंने उस पाल को याद किया,” उस दिन मैं बहुत रोई थी. लगा जैसे मेरी सारी मेहनत बेकार हो गई.”

वांगचो जनजाति से ताल्लुक रखने वाली अनाई की वेटलिफ्टिंग यात्रा उनके बड़े भाई सिंचाड बांसु के सपनों से जुड़ी है, जो खुद राष्ट्रीय स्तर के वेटलिफ्टर रह चुके हैं और अब अरुणाचल प्रदेश पुलिस में कार्यरत हैं.

सिंचाड ही उन्हें पहली बार इटानगर के स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) केंद्र में ट्रायल्स के लिए लेकर गए थे. शुरुआत में अनाई की दिलचस्पी इस खेल में नहीं थी. वह बॉक्सर बनना चाहती थीं, खासकर मैरी कॉम की फिल्म से प्रेरित होकर. लेकिन उनके भाई ने उन्हें समझाया और वेटलिफ्टिंग पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया. जल्द ही अनाई को लखनऊ के एनसीओई में उन्नत प्रशिक्षण के लिए चयनित कर लिया गया.

हालांकि, कोविड-19 महामारी के दौरान उन्हें वापस अरुणाचल लौटना पड़ा, जहां पर्याप्त पोषण और संसाधनों की कमी ने उनकी गैस्ट्रिक समस्या को और बढ़ा दिया.

अनाई ने कहा,” मैं बहुत मेहनत करती हूं, लेकिन कभी-कभी मेरी सेहत अचानक खराब हो जाती है. समझ नहीं आता कि मेरा शरीर मेरा साथ क्यों नहीं देता.”
     भारत के लिए खेलने का सपना रखने वाली अनाई ने यह भी जोड़ा कि यहां मिला स्वर्ण पदक उन्हें यह भरोसा देता है कि उनकी मेहनत बेकार नहीं जा रही है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-