जबलपुर और इंदौर के बीच पहाड़ चीरकर तैयार हुई मध्य भारत की सबसे लंबी रेलवे सुरंग, अब 68 किमी कम हो जाएगी दोनों महानगरों की दूरी

जबलपुर और इंदौर के बीच पहाड़ चीरकर तैयार हुई मध्य भारत की सबसे लंबी रेलवे सुरंग, अब 68 किमी कम हो जाएगी दोनों महानगरों की दूरी

प्रेषित समय :21:09:59 PM / Wed, Apr 15th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर और जबलपुर  के बीच रेल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है जिसने महाकौशल और मालवा के बीच की दूरियों को मिटाने की दिशा में सबसे बड़ी बाधा पार कर ली है. रेल विकास निगम ने जबलपुर-इंदौर बुधनी नई रेल लाइन परियोजना के तहत विंध्याचल की दुर्गम पहाड़ियों को सीना चीरकर मध्य भारत की सबसे लंबी रेलवे सुरंग का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है जो जबलपुर वासियों के लिए किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है. इस महापरियोजना के तहत देवास के बागली क्षेत्र में 8.64 किलोमीटर लंबी मुख्य सुरंग का ब्रेक-थ्रू और निर्माण पूर्ण कर लिया गया है जिससे अब जबलपुर से इंदौर के बीच का सफर न केवल सुगम होगा बल्कि कुल दूरी में भी 68 किलोमीटर की भारी कटौती दर्ज की जाएगी. जबलपुर से चलने वाले यात्रियों के लिए अब तक इंदौर पहुंचना एक लंबा और उबाऊ सफर रहता था लेकिन इस नई सुरंग और ट्रैक के तैयार होने से यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा जिससे व्यापारिक और व्यक्तिगत आवागमन को जबरदस्त रफ्तार मिलेगी.

विंध्याचल की दुर्गम पहाड़ियों को चीरकर बनाई गई यह सुरंग न केवल इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना है बल्कि यह इंदौर और जबलपुर के बीच यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं साबित होगी. रेल विकास निगम भोपाल द्वारा संचालित इस महापरियोजना के अंतर्गत सुरंग नंबर दो जो कि मुख्य सुरंग है और सुरंग नंबर एक में अंतिम चरण की खुदाई और महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों को अंजाम दे दिया गया है जिसके बाद अब इंदौर और जबलपुर के बीच की दूरी में लगभग 68 किलोमीटर की बड़ी कमी आने वाली है. 

इंदौर रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि की पुष्टि करते हुए बताया कि इस परियोजना के पूर्ण होने से न केवल यात्रा के समय में उल्लेखनीय बचत होगी बल्कि माल परिवहन की क्षमता में भी भारी सुधार होगा जो अंततः मध्य प्रदेश के क्षेत्रीय आर्थिक विकास को एक नई गति प्रदान करेगा. 205 किलोमीटर लंबे इस नए रेलवे ट्रैक के निर्माण में रेलवे को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा क्योंकि इस मार्ग का एक बड़ा हिस्सा बेहद दुर्गम इलाकों और काली मिट्टी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है. इस चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट में 8.64 किलोमीटर लंबी मुख्य सुरंग का निर्माण देवास जिले के बागली क्षेत्र अंतर्गत कमलापुर में किया गया है जो अपनी लंबाई और आधुनिक तकनीक के कारण पूरे मध्य भारत में सबसे लंबी रेलवे सुरंग बन गई है.

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक इस पूरी परियोजना में कुल 80 बड़े और 99 छोटे पुलों का जाल बिछाया जा रहा है साथ ही इस नए रूट पर 18 नए रेलवे स्टेशन भी विकसित किए जा रहे हैं जो आसपास के ग्रामीण इलाकों को मुख्यधारा की कनेक्टिविटी से जोड़ेंगे. सुरंग निर्माण की तकनीकी बारीकियों की बात करें तो इसे दुनिया की सबसे उन्नत और सुरक्षित तकनीक 'न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड' (NATM) के जरिए तैयार किया गया है जिसमें उन्नत मशीनरी और कड़े सुरक्षा मानकों का पालन किया गया है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की भूगर्भीय हलचल का इस पर असर न पड़े. मुख्य सुरंग के अलावा 1,156 मीटर लंबी एक और सुरंग का निर्माण भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा है जिसे पोर्टल-1 और पोर्टल-2 दोनों तरफ से खुदाई कर जोड़ा गया है. इस रेल लाइन के शुरू होने के बाद इंदौर से जबलपुर जाने के लिए यात्रियों को अब पुराने और लंबे रास्तों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा जिससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि ईंधन की खपत में भी कमी आएगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह रेल लिंक मध्य प्रदेश के दो बड़े महानगरों इंदौर और जबलपुर के बीच व्यापारिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करेगा क्योंकि लॉजिस्टिक्स और उद्योगों के लिए अब कच्चा माल और तैयार उत्पाद पहुंचाना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और सस्ता हो जाएगा.

इंदौर-बुधनी रेल परियोजना का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह रूट भविष्य में मुंबई और दक्षिण भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए भी एक वैकल्पिक और छोटा रास्ता प्रदान कर सकता है. रेल विकास निगम के इंजीनियरों ने बताया कि काली मिट्टी वाले क्षेत्रों में सुरंग बनाना तकनीकी रूप से बेहद कठिन कार्य था क्योंकि मिट्टी के धंसने का खतरा हमेशा बना रहता था लेकिन आधुनिक इंजीनियरिंग कौशल और दिन-रात की मेहनत के बल पर इस असंभव से दिखने वाले कार्य को संभव कर दिखाया गया है. वर्तमान में इस ट्रैक पर पटरियां बिछाने और विद्युतीकरण के शेष कार्यों को युद्ध स्तर पर पूरा किया जा रहा है ताकि जल्द से जल्द इस रूट पर ट्रेनों का परिचालन शुरू किया जा सके. 

इस सुरंग के तैयार होने की खबर मिलते ही व्यापारिक जगत और आम जनता में भारी उत्साह देखा जा रहा है क्योंकि वर्षों पुराना यह सपना अब हकीकत में बदलता नजर आ रहा है. जैसे ही यह रेल सेवा शुरू होगी यह मध्य प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर भी बड़ा प्रभाव डालेगी क्योंकि इससे जबलपुर के भेड़ाघाट और इंदौर के आसपास के पर्यटन स्थलों के बीच पर्यटकों का आवागमन सुगम हो जाएगा. कुल मिलाकर मध्य भारत की यह सबसे लंबी रेलवे टनल प्रदेश की प्रगति की नई लाइफ लाइन बनने जा रही है जो आधुनिक भारत की विकसित होती अधोसंरचना का एक गौरवशाली प्रतीक है. अब वह दिन दूर नहीं जब इंदौर से जबलपुर की ट्रेन यात्रा महज एक छोटे और सुखद सफर में बदल जाएगी जो प्रदेश के विकास के पहियों को और अधिक रफ्तार प्रदान करेगी._

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-