एआई के बढ़ते खतरे के बीच गूगल का बड़ा एक्शन स्कैम और स्पैम पर टेक्नोलॉजी से कसा शिकंजा

एआई के बढ़ते खतरे के बीच गूगल का बड़ा एक्शन स्कैम और स्पैम पर टेक्नोलॉजी से कसा शिकंजा

प्रेषित समय :22:01:11 PM / Thu, Apr 16th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

डिजिटल दुनिया में तेजी से बढ़ रहे स्पैम और ऑनलाइन ठगी के मामलों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई एक दोधारी तलवार बनकर उभरा है। जहां एक ओर इसका इस्तेमाल ठग और स्पैमर्स बड़े पैमाने पर फर्जी कंटेंट और विज्ञापन बनाने में कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर टेक दिग्गज गूगल इसी तकनीक को हथियार बनाकर इन खतरों से मुकाबला कर रहा है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में यह सामने आया है कि एआई ने न केवल इस समस्या को बढ़ाया है, बल्कि इसके समाधान में भी अहम भूमिका निभाई है।

इंटरनेट यूजर्स आजकल ऐसे कई विज्ञापनों और कंटेंट से दो-चार होते हैं, जो चमत्कारी इलाज, फर्जी ऑफर्स या किसी मशहूर हस्ती की आवाज में तैयार किए गए वीडियो के जरिए लोगों को भ्रमित करने की कोशिश करते हैं। इनका बड़ा हिस्सा अब जनरेटिव एआई टूल्स की मदद से तैयार किया जा रहा है, जिससे इनकी संख्या और गुणवत्ता दोनों में तेजी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई ने इस पुरानी समस्या को नई गति और पैमाना दे दिया है।

इसी चुनौती से निपटने के लिए गूगल ने अपनी एआई आधारित सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत किया है। कंपनी के अनुसार, उसकी जनरेटिव एआई तकनीक ‘जेमिनी’ ने पिछले वर्ष 99 प्रतिशत से अधिक ऐसे विज्ञापनों को पकड़ लिया, जो उसकी नीतियों का उल्लंघन कर रहे थे, वह भी यूजर्स तक पहुंचने से पहले। यह आंकड़ा बताता है कि गूगल की तकनीक अब रियल टाइम में खतरों की पहचान करने में कितनी सक्षम हो चुकी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में गूगल ने 8.3 अरब से अधिक विज्ञापनों को ब्लॉक या हटाया, जिनमें करीब 602 मिलियन ऐसे विज्ञापन थे जो सीधे तौर पर स्कैम से जुड़े हुए थे। इसके अलावा, चार मिलियन से ज्यादा विज्ञापनदाता खातों को भी सस्पेंड किया गया, जो संदिग्ध गतिविधियों में शामिल पाए गए। यह आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि ऑनलाइन विज्ञापन इकोसिस्टम में खतरे कितने बड़े स्तर पर मौजूद हैं।

गूगल का कहना है कि उसकी एआई प्रणाली अब केवल कंटेंट को स्कैन नहीं करती, बल्कि विज्ञापनदाताओं के व्यवहार, अकाउंट की उम्र, कैंपेन पैटर्न और अन्य सैकड़ों संकेतों का विश्लेषण कर उनके इरादों को समझने की कोशिश करती है। इस तरह की गहन जांच से यह तय करना आसान हो जाता है कि कोई विज्ञापन वैध है या उसमें धोखाधड़ी की आशंका है। इस प्रक्रिया में सुधार के चलते गलत तरीके से अकाउंट सस्पेंड होने के मामलों में भी करीब 80 प्रतिशत की कमी आई है।

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि एआई की इस दौड़ में अब “एआई बनाम एआई” की स्थिति बनती जा रही है। जहां एक ओर स्कैमर्स नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं कंपनियां भी अपने डिफेंस सिस्टम को लगातार अपग्रेड कर रही हैं। इस मुकाबले में स्पीड और स्केल सबसे अहम फैक्टर बन गए हैं, क्योंकि इंसानों के लिए इतने बड़े स्तर पर डेटा की निगरानी करना संभव नहीं है।

गूगल ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी सुरक्षा प्रणाली केवल एआई पर निर्भर नहीं है, बल्कि इसमें हजारों कर्मचारियों की टीम भी शामिल है, जो विज्ञापन नीतियों को लागू करने और निगरानी करने का काम करती है। इसके साथ ही कंपनी का विज्ञापनदाता सत्यापन कार्यक्रम भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे फर्जी अकाउंट्स की पहचान करने में मदद मिलती है।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि जैसे-जैसे एआई तकनीक विकसित होगी, वैसे-वैसे इसके दुरुपयोग के तरीके भी और जटिल होते जाएंगे। ऐसे में टेक कंपनियों को लगातार अपने सिस्टम को अपडेट करना होगा, ताकि वे इस बढ़ते खतरे से प्रभावी तरीके से निपट सकें।

यह स्पष्ट है कि एआई ने डिजिटल दुनिया में स्पैम और स्कैम की समस्या को पहले से ज्यादा गंभीर बना दिया है, लेकिन यही तकनीक इसके समाधान की सबसे बड़ी उम्मीद भी बनकर उभरी है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इस एआई बनाम एआई की लड़ाई में किसका पलड़ा भारी रहता है और यूजर्स को सुरक्षित रखने के लिए किस तरह के नए कदम उठाए जाते हैं।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-