पूर्व भाजपा नगर अध्यक्ष जीएस ठाकुर पर दुष्कर्म पीड़िता को धमकाने का आरोप, एसपी से सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की गुहार

पूर्व भाजपा नगर अध्यक्ष जीएस ठाकुर पर दुष्कर्म पीड़िता को धमकाने का आरोप, एसपी से सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की गुहार

प्रेषित समय :19:17:36 PM / Fri, Apr 17th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. न्यायधानी में एक बार फिर रसूख और कानून के बीच जंग छिड़ गई है. घमापुर थाना क्षेत्र की एक दुष्कर्म पीड़िता ने पूर्व भाजपा नगर अध्यक्ष जीएस ठाकुर और मुख्य आरोपी ललित कुंदनानी पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक से सुरक्षा की गुहार लगाई है. पीड़िता का दावा है कि जीएस ठाकुर अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर उसे कानूनी लड़ाई से पीछे हटने और शिकायत वापस लेने के लिए डरा-धमका रहे हैं. पत्रकारवार्ता के माध्यम से सामाजिक कार्यकर्ता साईं पिल्लै ने इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा करते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी कई तीखे सवाल खड़े किए हैं. पीड़िता के अनुसार, मुख्य आरोपी ललित कुंदनानी के खिलाफ मामला दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू होते ही रसूखदारों का दखल बढ़ गया और उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां मिलनी शुरू हो गईं.

घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ते हुए पीड़िता ने बताया कि 21 मार्च 2026 की सुबह जब वह अपने घर पर थी, तभी पूर्व नगर अध्यक्ष जीएस ठाकुर अपने दो अन्य साथियों के साथ उसके निवास पर पहुंचे. वहां उन्होंने पीड़िता पर दबाव बनाया कि वह ललित कुंदनानी के खिलाफ अपनी शिकायत वापस ले ले, अन्यथा उसे और उसके परिवार को जान से मार दिया जाएगा. पीड़िता का आरोप है कि इस राजनीतिक दबाव के कारण उसका पूरा परिवार दहशत में है और उसे लगातार यह डर सता रहा है कि साक्ष्यों को प्रभावित करने के लिए आरोपी पक्ष किसी भी हद तक जा सकता है.

 पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे आवेदन में स्पष्ट किया है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही अज्ञात व्यक्तियों को उसके घर भेजकर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और समझौता न करने की स्थिति में हत्या तक की बात कही जा रही है.

इस पूरे मामले की जड़ें 20 मार्च 2026 से जुड़ी हैं, जब युवती ने ललित कुंदनानी के खिलाफ शारीरिक शोषण की लिखित शिकायत घमापुर थाने में दी थी. पीड़िता का आरोप है कि शुरुआत में पुलिस ने उसकी बात अनसुनी कर दी, जिससे हताश और निराश होकर वह तिलवारा पुल से कूदकर आत्महत्या करने पहुंच गई थी. समय रहते 108 एम्बुलेंस और पुलिस की सूचना पर उसे बचाया गया. इस आत्मघाती कदम के पीछे की वजह पुलिस का असहयोग और रसूखदारों का दबाव बताया गया है. हैरानी की बात यह है कि 7 अप्रैल 2026 को जब पुलिस ने अंततः धारा 351(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया, तब भी थाने के भीतर पीड़िता के साथ अपमानजनक व्यवहार किए जाने का दावा किया गया है. युवती का आरोप है कि उसे थाने में घंटों बैठाकर रखा गया, जबकि मुख्य आरोपी ललित कुंदनानी को थाना प्रभारी के कक्ष में 'विशेष सत्कार' के साथ बैठाया गया था.

पीड़िता ने थाना परिसर के भीतर हुई इस घटना को अत्यंत अशोभनीय और अमानवीय बताया है. उसका दावा है कि पुलिस की मौजूदगी में ही उस पर समझौते के लिए अनुचित दबाव डाला गया और उसे मानसिक रूप से तोड़ा गया. युवती ने मांग की है कि 7 अप्रैल के थाना परिसर के सीसीटीवी फुटेज की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिससे यह सच सामने आ सके कि किस तरह पुलिस और आरोपी पक्ष के बीच मिलीभगत चल रही थी. इसके अलावा, पीड़िता ने जीएस ठाकुर के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स की जांच की भी मांग की है. आरोप है कि 22 मार्च को सुबह 11:03 बजे और 11:42 बजे जीएस ठाकुर ने उसे फोन कर अपने ऑफिस बुलाया था और दबाव बनाया था. पीड़िता का कहना है कि उस क्षेत्र के मोबाइल टावर लोकेशन और कॉल डिटेल्स से यह सिद्ध हो जाएगा कि उसे डराने-धमकाने के लिए राजनैतिक पद का दुरुपयोग किया जा रहा है.

रसूख के दुरुपयोग की कहानी यहीं खत्म नहीं होती. जीएस ठाकुर पर पद की आड़ में विवादित संपत्तियों के सौदे करने के भी आरोप लगे हैं. इसमें रांझी तहसील के मढ़ई स्थित 'जीएसबी ड्रीम' नामक एक कथित अवैध प्लॉटिंग प्रोजेक्ट का जिक्र किया गया है. पीड़िता और उसके समर्थकों का कहना है कि आरोपियों के ऊंचे संपर्कों के कारण ही 7 अप्रैल को सुबह से थाने में बैठने के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में रात कर दी गई. अब पीड़िता ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि न्याय की उम्मीद जिंदा रहे. उसने अपनी और अपने परिवार की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कठोर वैधानिक कार्रवाई की अपील की है. फिलहाल, इस मामले ने जबलपुर के राजनैतिक और प्रशासनिक हलकों में भूचाल ला दिया है और जनता की नजरें अब पुलिस अधीक्षक की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-