दुनिया के सबसे महंगे आम की सुरक्षा में तैनात Z+ सुरक्षा घेरा और 20 शिकारी कुत्ते, जबलपुर के किसान ने पेश की अनोखी मिसाल

दुनिया के सबसे महंगे आम की सुरक्षा में तैनात Z+ सुरक्षा घेरा और 20 शिकारी कुत्ते, जबलपुर के किसान ने पेश की अनोखी मिसाल

प्रेषित समय :19:10:36 PM / Sun, Apr 19th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. चरगवां रोड पर स्थित  हिनौता गांव   में चार एकड़ के एक सामान्य दिखने वाले बागान में इन दिनों किसी बड़े वीवीआईपी की तरह सुरक्षा का सख्त पहरा है. यहां की सुरक्षा व्यवस्था को देखकर हर कोई हैरान है क्योंकि यहां न तो कोई बड़ा राजनेता रहता है और न ही कोई फिल्मी सितारा बल्कि यहां दुनिया के सबसे दुर्लभ और महंगे फल यानी मियाजाकी आम की हिफाजत की जा रही है. 

संकल्प परिहार और उनकी पत्नी रानी सिंह परिहार द्वारा संचालित श्री महाकालेश्वर हाइब्रिड फार्म हाउस इन दिनों वैश्विक स्तर पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है. इस बागान की सुरक्षा के लिए जो इंतजाम किए गए हैं वे किसी जेड प्लस सुरक्षा श्रेणी से कम नहीं हैं. परिसर के चप्पे-चप्पे पर पंद्रह से अधिक हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे चौबीस घंटे नजर रखते हैं. वहीं सुरक्षा का जिम्मा सत्रह विदेशी जर्मन शेफर्ड और तीन देसी खूंखार कुत्तों के हवाले है जो बागान के हर कोने में दिन-रात पेट्रोलिंग करते हैं. इन हथियारों से लैस गार्ड्स और सुरक्षा प्रबंधों के पीछे की कहानी महज दिखावा नहीं बल्कि एक दर्दनाक घटना से जुड़ी हुई है. बीते साल इस बागान में चोरों ने धावा बोला था और भारी मात्रा में कीमती आमों पर हाथ साफ कर दिया था. उस वक्त चोरों से मुकाबला करते हुए बागान की वफादार कुतिया जैरी बुरी तरह घायल हो गई थी. अपनी फसल और अपने बेजुबान साथियों की रक्षा करने की जद्दोजहद ने संकल्प परिहार को मजबूर कर दिया कि वे आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सुरक्षा का ऐसा अभेद्य किला तैयार करें जिसे भेदना किसी के लिए भी मुमकिन न हो.

इस बागान की मुख्य आकर्षण जापान की मियाजाकी किस्म है जिसे आम की दुनिया में सूर्य का अंडा कहा जाता है. पकने के बाद गहरा लाल और बैंगनी रंग लेने वाला यह फल न केवल अपनी सुंदरता बल्कि अपने गुणों के लिए भी प्रसिद्ध है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत दो लाख सत्तर हजार रुपये प्रति किलो तक जा पहुंचती है. तीन सौ पचास ग्राम वजन वाले इस आम में प्राकृतिक शर्करा की भरपूर मात्रा होती है और यह एंटीऑक्सीडेंट्स का भंडार माना जाता है जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ने में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक है. बागान में आने वाले पर्यटक और कृषि विशेषज्ञ इसे देखकर यही कहते हैं कि इस आम को खरीदने के लिए केवल पैसा काफी नहीं है बल्कि इसके लिए बैंक से लोन लेने की स्थिति आ जाती है. लेकिन संकल्प परिहार का यह मिशन केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है.

 उनके चार एकड़ के इस फार्महाउस में अफगानिस्तान और अमेरिका से लेकर चीन और नेपाल तक की पचास से अधिक विदेशी प्रजातियां मौजूद हैं. इनमें अफगानिस्तान का प्रसिद्ध नूरजहां आम शामिल है जिसका वजन पांच किलो तक हो सकता है. इसके अलावा चीन का आइवरी आम जो अपनी सफेद रंगत के लिए जाना जाता है और अमेरिका का ब्लैक मैंगो जो अपनी पूरी तरह काली त्वचा के कारण लोगों को अचंभित करता है इस बागान की शोभा बढ़ा रहे हैं. अमेरिका की सेंसेशन प्रजाति अपनी मनमोहक खुशबू के लिए प्रसिद्ध है जबकि नेपाल की केसर बादाम और मलेशिया की जंबो ग्रीन किस्में इस बागान की विविधता का प्रमाण देती हैं.

संकल्प परिहार और रानी सिंह परिहार इस अनमोल विरासत को सहेजने के लिए बेहद पारंपरिक और आधुनिक तरीकों का समावेश करते हैं. यहां खेती की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑर्गेनिक है और रसायनों या कीटनाशकों का नामोनिशान नहीं है. हर एक फल को पक्षियों और कीड़ों से बचाने के लिए उन्हें विशेष रूप से तैयार किए गए ग्रो बैग्स में पैक किया जाता है. गर्मी के मौसम में भीषण लू से फसलों को बचाने के लिए पूरे बागान को ग्रीन नेट के नीचे रखा गया है. यह तकनीक न केवल फलों की गुणवत्ता बरकरार रखती है बल्कि उन्हें बाजार में एक प्रीमियम पहचान भी दिलाती है. जबलपुर के इस हिनौता गांव का बागान आज भारतीय कृषि के उस नए दौर की नुमाइंदगी कर रहा है जहां किसान केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं है बल्कि वे वैश्विक बाजार की मांग को समझकर नवाचार कर रहे हैं. हालांकि इस स्तर की सुरक्षा के बीच आम उगाने को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ी हुई है.

 कुछ लोग इसे फिजूलखर्ची मान रहे हैं तो वहीं बड़ी संख्या में लोग किसान की इस मेहनत और दूरदर्शिता की सराहना कर रहे हैं. यह महज एक आम का बागान नहीं है बल्कि एक ऐसा शोध केंद्र बन चुका है जो दुनिया भर के दुर्लभ बीजों को भारतीय मिट्टी में ढालने की अद्भुत क्षमता प्रदर्शित कर रहा है. जब लोग इस फार्महाउस को देखते हैं तो उन्हें यह विश्वास हो जाता है कि यदि इरादे मजबूत हों और तकनीक का सही इस्तेमाल किया जाए तो मध्य प्रदेश की मिट्टी में भी दुनिया के सबसे महंगे फल उगाए जा सकते हैं. संकल्प परिहार का यह प्रयास न केवल जबलपुर के लिए गर्व का विषय है बल्कि देश भर के उन किसानों के लिए प्रेरणा है जो अपनी मेहनत के बल पर कुछ नया और बड़ा करना चाहते हैं. आज जब हम इस बागान की ओर देखते हैं तो हमें सुरक्षा की कड़ाई और फलों की कोमलता के बीच का एक अद्भुत संतुलन दिखाई देता है. यह बागान साबित करता है कि सफलता की कीमत अक्सर मेहनत और पहरेदारी से चुकानी पड़ती है और यह मियाजाकी आम इसका सबसे शानदार उदाहरण बन गया है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-