जबलपुर. रांझी स्थित प्रतिष्ठित जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज (JEC) में माहौल उस समय पूरी तरह गरमा गया जब सैकड़ों की संख्या में आक्रोशित छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए. कॉलेज परिसर में शुद्ध पेयजल, नियमित बिजली आपूर्ति और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी से परेशान विद्यार्थियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. छात्रों का सीधा आरोप है कि भीषण गर्मी के इस दौर में कॉलेज प्रबंधन उनकी मूलभूत जरूरतों को नजरअंदाज कर रहा है, जिसके चलते शैक्षणिक माहौल बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. प्रदर्शनकारी छात्रों ने बताया कि हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों की स्थिति सबसे दयनीय है. परिसर में लगे वॉटर कूलर लंबे समय से खराब पड़े हैं, जिससे उन्हें पीने के पानी के लिए भटकना पड़ता है. इसके अलावा, बिजली की अनियमित कटौती और हॉस्टल के कमरों में लगे पंखों के काम न करने से छात्रों को भीषण उमस और गर्मी में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. छात्रों ने हॉस्टल भवनों की जर्जर होती हालत पर भी गहरा असंतोष व्यक्त किया और इसे प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बताया.
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यह भी खुलासा किया कि इन गंभीर समस्याओं को लेकर वे पिछले कई दिनों से कॉलेज के प्राचार्य और हॉस्टल वार्डन को लिखित शिकायतें सौंप चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिले. किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई न होने से छात्रों का धैर्य जवाब दे गया और वे आंदोलन के रास्ते पर चलने के लिए विवश हुए. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए समाजसेवी अधिवक्ता सुदीप सिंह सैनी भी मौके पर छात्रों के समर्थन में पहुंचे. उन्होंने कॉलेज प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा के मंदिर में छात्रों को बुनियादी सुविधाएं न देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. अधिवक्ता की मौजूदगी में आक्रोशित छात्रों ने प्रबंधन को मात्र छह घंटे का अल्टीमेटम दिया है. छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस निर्धारित समयावधि के भीतर कॉलेज में पेयजल, बिजली और स्वच्छता की व्यवस्था सुचारू नहीं की गई, तो यह आंदोलन और अधिक व्यापक स्वरूप ले लेगा.
सबसे गंभीर आरोप छात्रों ने अपनी आवाज दबाने की कोशिशों को लेकर लगाया है. प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों का दावा है कि जब भी वे अपनी समस्याओं को लेकर कॉलेज प्रशासन के सामने अपनी बात रखते हैं, तो उन्हें कॉलेज से बाहर निकालने या अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की धमकियां दी जाती हैं. छात्रों का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन पर दबाव बनाने की नीति अपना रहा है, जो कि पूरी तरह अनुचित है. फिलहाल, कॉलेज परिसर में भारी गहमागहमी बनी हुई है और छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं. इस प्रदर्शन ने अब कॉलेज प्रबंधन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है, क्योंकि छात्रों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी समस्याओं का निराकरण नहीं हो जाता, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे. पूरे क्षेत्र में यह प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है और कॉलेज प्रशासन की चुप्पी पर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

