जबलपुर.रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (रादुविवि) के कर्मचारी नेता बंशबहोर पटेल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायतों ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है. लोकायुक्त पुलिस ने मामले में जांच की गति बढ़ाते हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव को एक कड़ा पत्र लिखा है, जिसमें आरोपी कर्मचारी के पूरे 40 साल के सेवाकाल का विस्तृत वित्तीय विवरण तलब किया गया है. 11 बार कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रहे पटेल की सेवानिवृत्ति से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई ने विश्वविद्यालय प्रशासन और गलियारों में हड़कंप मचा दिया है.
1985 से अब तक का पूरा हिसाब-किताब
विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त संगठन (जबलपुर संभाग) ने इस प्रकरण (ई-315/2024) में विश्वविद्यालय से वर्ष 1985 से वर्तमान तक का वेतन और भत्तों का पूरा ब्यौरा निर्धारित प्रारूप में मांगा है. इससे पूर्व विश्वविद्यालय द्वारा भेजी गई जानकारी को जांच एजेंसी ने 'त्रुटिपूर्ण' मानते हुए खारिज कर दिया था. अब नए सिरे से उनके दैनिक वेतन भोगी (DVB) कार्यकाल से लेकर 1994 में नियमितीकरण और उसके बाद से अब तक प्राप्त कुल वेतन, भविष्य निधि (PF) से निकाली गई राशि और अन्य सभी वित्तीय लाभों की सूक्ष्म गणना की जा रही है.
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
शिकायत के अनुसार, बंशबहोर पटेल पर अपने लंबे कार्यकाल का उपयोग कर भारी धन उगाही करने का आरोप है. जांच के केंद्र में प्रमुख बिंदु हैं:
भर्ती में अनियमितता: शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियों में वित्तीय लेन-देन.
उपकरणों की खरीद: विश्वविद्यालय के लिए की गई बड़े पैमाने पर खरीद में भ्रष्टाचार.
नियम विरुद्ध नियमितीकरण: दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण और तकनीकी कर्मचारियों को गलत तरीके से उच्च वेतनमान दिलाने के बदले धन वसूली.
इन्हीं कथित अवैध माध्यमों से जबलपुर में तीन मकान, कई एकड़ कृषि भूमि और बड़ी संख्या में चार पहिया व दो पहिया वाहन खरीदने की बात सामने आई है. लोकायुक्त पुलिस अब आरोपी की ज्ञात आय के स्रोतों और अर्जित संपत्तियों के दस्तावेजों का मिलान कर रही है.
सेवानिवृत्ति पर संकट के बादल
आरोपी कर्मचारी बंशबहोर पटेल आगामी सितंबर माह में सेवानिवृत्त होने वाले हैं. कार्यकाल के मात्र 5 महीने शेष रहने के बीच, लोकायुक्त की यह सक्रिय जांच विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है. नियमानुसार, किसी भी लंबित जांच की स्थिति में सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ और देय स्वत्वों (PF, ग्रेच्युटी आदि) का भुगतान रोका जा सकता है. इसके साथ ही, विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा यह भी है कि जांच की आंच उन अधिकारियों तक भी पहुंच सकती है जिन्होंने इन वर्षों में कथित वित्तीय अनियमितताओं में परोक्ष या प्रत्यक्ष सहयोग किया है.
यह मामला न केवल एक कर्मचारी नेता के पतन की कहानी है, बल्कि विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है. लोकायुक्त की इस कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

