जबलपुर. दिल्ली की यात्रा करने वाले रेल यात्रियों के बीच इन दिनों 'तत्काल' टिकट को लेकर भारी असमंजस की स्थिति बनी हुई है. सोशल मीडिया मंचों और रेडिट जैसे कम्युनिटी फोरम पर सक्रिय यात्री अपनी समस्याओं को साझा करते हुए रेलवे के नियमों पर सवाल उठा रहे हैं. ताजा घटनाक्रम में उन यात्रियों की संख्या बढ़ी है, जिन्होंने कन्फर्म टिकट मिलने की उम्मीद में एक साथ कई विकल्प चुने या फिर तकनीकी गड़बड़ी के कारण एक से अधिक तत्काल टिकट बुक हो गए. अब इन अतिरिक्त टिकटों के रिफंड और प्रबंधन को लेकर यात्री न केवल परेशान हैं, बल्कि रेलवे की जटिल ऑनलाइन प्रणाली के चलते उन्हें आर्थिक नुकसान का भी सामना करना पड़ रहा है.
रेलवे के नियमों के अनुसार, तत्काल कोटे में बुक किए गए टिकटों पर कैंसलेशन का नियम अत्यंत कठोर है. यदि यात्री अपना टिकट रद्द करता है, तो उसे रिफंड के तौर पर शून्य राशि प्राप्त होती है. जबलपुर से दिल्ली जाने वाली प्रमुख ट्रेनों जैसे कि महाकौशल एक्सप्रेस, संपर्क क्रांति और जबलपुर-निजामुद्दीन एक्सप्रेस में तत्काल टिकट की मारामारी रहती है. ऐसे में यात्री अक्सर कन्फर्म सीट पाने की हड़बड़ी में अलग-अलग आईडी या पैसेंजर डिटेल्स के साथ एक से ज्यादा टिकट बुक करने का प्रयास करते हैं, जिससे बाद में वे तकनीकी और कानूनी जटिलताओं में उलझ जाते हैं.
रेलवे परामर्शदाता भी यह सलाह दे रहे हैं कि यात्री टिकट बुकिंग के दौरान जल्दबाजी न करें, क्योंकि एक बार कन्फर्म तत्काल टिकट कट जाने के बाद रेलवे रिफंड देने से साफ इनकार कर देता है. सूत्रों के मुताबिक, यात्रियों की बढ़ती संख्या और ट्रेनों में लंबी प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) के कारण यह समस्या और अधिक गंभीर हो गई है. कई बार यात्री अपनी यात्रा की योजना में बदलाव होने पर भी टिकट सरेंडर नहीं कर पाते, क्योंकि नियम के अनुसार इसमें रिफंड की कोई गुंजाइश नहीं होती. सोशल मीडिया पर चल रही इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य अन्य यात्रियों को आगाह करना भी है ताकि वे अनजाने में अपना पैसा न गंवाएं.
यात्री अब इस बात की मांग कर रहे हैं कि कम से कम उन मामलों में जहां एक ही यात्री का नाम दो अलग-अलग टिकटों पर दर्ज हो गया हो, वहां रेलवे को रिफंड की प्रक्रिया सरल करनी चाहिए. फिलहाल, ज रेलवे स्टेशन पर पूछताछ केंद्रों और ऑनलाइन मदद पोर्टलों पर भी इस प्रकार की शिकायतों में बढ़ोतरी देखी गई है. विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर तत्काल बुकिंग की प्रक्रिया 'फर्स्ट कम फर्स्ट सर्व' के आधार पर होती है, इसलिए एक बार भुगतान होने और पीएनआर जनरेट होने के बाद कोई भी सुधार संभव नहीं होता. यह स्थिति उन लोगों के लिए और भी चुनौतीपूर्ण है जो अपनी यात्रा को लेकर अनिश्चित हैं. जबलपुर से दिल्ली के बीच यात्रियों का दबाव देखते हुए रेलवे प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि तत्काल कोटे का उद्देश्य अंतिम समय पर यात्रा करने वालों की मदद करना है, न कि टिकटों की जमाखोरी करना. इस पूरे विवाद ने एक बार फिर रेलवे की टिकट बुकिंग प्रणाली और यात्रियों के प्रति संवेदनशीलता पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है. फिलहाल, जबलपुर से दिल्ली जाने वाले यात्रियों को अत्यधिक सावधानी बरतने और नियमों को ठीक से पढ़ने की सलाह दी जा रही है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

