छत्तीसगढ़ में RTE का डिजिटल मॉडल: अब सिर्फ पात्र बच्चों को मिलेगा लाभ, पारदर्शिता पर सरकार का फोकस

छत्तीसगढ़ में RTE का डिजिटल मॉडल: अब सिर्फ पात्र बच्चों को मिलेगा लाभ, पारदर्शिता पर सरकार का फोकस

प्रेषित समय :17:10:22 PM / Wed, Apr 29th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा के अधिकार को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में अब RTE (Right to Education) के तहत प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल कर दी गई है, जिससे केवल वास्तविक रूप से पात्र और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को ही लाभ मिल सकेगा.

राज्य में लागू इस नई डिजिटल व्यवस्था के तहत निजी स्कूलों में आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश की पूरी प्रक्रिया—आवेदन से लेकर चयन तक—ऑनलाइन और स्वचालित कर दी गई है. इससे पहले जहां प्रक्रिया जटिल और विवादों से घिरी रहती थी, वहीं अब तकनीक के इस्तेमाल से पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हुई है.

शैक्षणिक सत्र 2026-27 के आंकड़े इस बदलाव की सफलता को दर्शाते हैं. कुल 38,439 आवेदनों में से 27,203 आवेदन पात्र पाए गए, जिनमें से 14,403 बच्चों का चयन ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से किया गया. यह पूरी प्रक्रिया कंप्यूटर आधारित और रैंडमाइज्ड है, जिससे किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप या पक्षपात की संभावना समाप्त हो जाती है.

डिजिटल सत्यापन प्रणाली भी इस मॉडल का अहम हिस्सा है. आवेदन के दौरान दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच और पात्रता की स्वचालित पुष्टि की जाती है, जिससे गलत जानकारी तुरंत पकड़ी जा सके और प्रक्रिया विश्वसनीय बनी रहे.

अभिभावकों के लिए भी यह व्यवस्था काफी सुविधाजनक साबित हो रही है. अब उन्हें सरकारी दफ्तरों या स्कूलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते. वे घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और मोबाइल के माध्यम से सभी अपडेट प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही, सिस्टम उन्हें नजदीकी (1.5 किमी के दायरे में) निजी स्कूलों और उपलब्ध सीटों की जानकारी भी देता है.

इस योजना में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग और अन्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे सामाजिक समावेशन को मजबूती मिल रही है. वर्तमान में राज्य के 3.63 लाख से अधिक विद्यार्थी इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं.

सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 300 करोड़ रुपये की शुल्क प्रतिपूर्ति का प्रावधान भी किया है, जिससे अधिक से अधिक बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश का अवसर मिल सके. रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर और सरगुजा जैसे जिलों में बड़ी संख्या में बच्चों का चयन इस योजना की व्यापक पहुंच को दर्शाता है.

RTE के अलावा भी राज्य में डिजिटल सुशासन को बढ़ावा देने के लिए e-Office, CMO पोर्टल, स्मार्ट क्लासरूम और विद्या समीक्षा केंद्र जैसी पहलें लागू की गई हैं. साथ ही APAAR ID के जरिए छात्रों को एक यूनिक डिजिटल पहचान दी जा रही है, जिससे उनका पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा.

कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ का यह डिजिटल RTE मॉडल न केवल प्रशासनिक सुधार का उदाहरण है, बल्कि सामाजिक समानता और शिक्षा के अधिकार को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी साबित हो रहा है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-