जबलपुर . मध्य प्रदेश समेत पूरे देश में पड़ रही भीषण गर्मी और रिकॉर्ड तोड़ तापमान ने अब भारतीय रेलवे की कूलिंग व्यवस्था के सामने कड़ी चुनौती खड़ी कर दी है जिसके चलते रेलवे प्रशासन ने ट्रेनों के एसी कोच में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए नए और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इंदौर, उज्जैन, रतलाम और धार जैसे इलाकों में पारा 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाने के कारण ट्रेनों के भीतर एयर कंडीशनिंग सिस्टम पर दबाव काफी बढ़ गया है और यात्रियों को इस झुलसाती गर्मी से राहत दिलाने के लिए अब रेलवे ने खिड़कियों के पर्दों का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है।
पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दिन के समय विशेषकर तेज धूप के दौरान यात्रियों को खिड़कियों के पर्दे बंद रखने होंगे ताकि बाहरी गर्मी कोच के भीतर प्रवेश न कर सके और ग्रीनहाउस प्रभाव को कम किया जा सके। रेलवे का मानना है कि यदि पर्दे खुले रहते हैं तो सूरज की सीधी रोशनी बोगी के तापमान को तेजी से बढ़ाती है जिससे एसी यूनिट पर अतिरिक्त भार पड़ता है और कूलिंग प्रभावी नहीं रह पाती है।
रेलवे द्वारा उठाए गए इन सख्त कदमों के पीछे मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सफर के दौरान यात्रियों को किसी भी तरह की असुविधा न हो और कोच के भीतर का तापमान स्थिर बना रहे। रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार केवल पर्दे बंद रखना ही काफी नहीं है बल्कि यात्रियों को कोच के मुख्य और आंतरिक दरवाजों को भी अनावश्यक रूप से खुला न रखने की सलाह दी गई है जिससे ठंडी हवा अंदर ही संरक्षित रहे। इसके साथ ही यात्रियों को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे अपने भारी सामान को एसी वेंट्स के सामने न रखें क्योंकि ऐसा करने से वायु प्रवाह बाधित होता है और पूरे कोच में ठंडी हवा समान रूप से नहीं पहुंच पाती है। रेलवे के कर्मचारी अब बोगियों में जाकर यात्रियों को इन नियमों के प्रति जागरूक कर रहे हैं और यह समझा रहे हैं कि कैसे छोटे-छोटे बदलावों से पूरी बोगी के तापमान को नियंत्रित रखा जा सकता है।
भीषण गर्मी के इस मौसम में कूलिंग व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए रेलवे ने अपनी मेंटेनेंस प्रणाली को भी युद्ध स्तर पर सक्रिय कर दिया है। ट्रेनों के एयर कंडीशनिंग सिस्टम, उनके फिल्टर और डक्ट की लगातार सफाई की जा रही है ताकि रेफ्रीजेशन प्रणाली में कोई रुकावट न आए। बिजली संबंधी शिकायतों जैसे चार्जिंग पॉइंट का खराब होना या कूलिंग में अचानक कमी आने जैसी समस्याओं के समाधान के लिए ऑन-ड्यूटी स्टाफ को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए प्रत्येक कोच के पैनल पर संबंधित एसी मैकेनिक और स्टाफ के मोबाइल नंबर प्रदर्शित किए गए हैं ताकि किसी भी तकनीकी खराबी की स्थिति में यात्री तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें। अक्सर देखा जाता है कि एक ही कोच में अलग-अलग यात्रियों की पसंद के हिसाब से तापमान को लेकर विवाद होता है जिसे सुलझाने के लिए अब स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है ताकि वे कूलिंग में एक बेहतर संतुलन स्थापित कर सकें।
रेलवे की इस सख्ती और व्यापक तैयारियों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रतलाम स्थित मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय में बनाया गया 'वॉर रूम' है जो चौबीसों घंटे यानी 24×7 सक्रिय मोड पर काम कर रहा है। यह वॉर रूम विशेष रूप से एसी कोच में पानी की उपलब्धता, साफ-सफाई, बेड रोल और कूलिंग से जुड़ी शिकायतों की निगरानी के लिए बनाया गया है। यदि ट्रेन के भीतर स्टाफ स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होता है तो यात्री सीधे इस वॉर रूम में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं जहाँ से वरिष्ठ अधिकारी स्थिति की मॉनिटरिंग कर तत्काल प्रभाव से निराकरण सुनिश्चित करते हैं। रेलवे प्रशासन का यह मानना है कि इस बार की गर्मी पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ रही है इसलिए तकनीकी और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर कड़े फैसले लेना जरूरी हो गया था।
ट्रेनों में कूलिंग बनाए रखने के लिए पर्दे लगाने की इस कवायद ने अब एक अनिवार्य नियम का रूप ले लिया है और जो यात्री इसका पालन नहीं कर रहे हैं उन्हें स्टाफ द्वारा विनम्रतापूर्वक इसके महत्व के बारे में बताया जा रहा है। इंदौर और आसपास के स्टेशनों से चलने वाली सभी प्रमुख ट्रेनों में इन नियमों को कड़ाई से लागू कर दिया गया है। रेलवे की इस सक्रियता से उन यात्रियों ने राहत की सांस ली है जिन्हें लंबी दूरी के सफर में भीषण गर्मी के कारण एसी कोच के भीतर भी उमस और पसीने का सामना करना पड़ रहा था। कुल मिलाकर भारतीय रेलवे अब केवल पटरी पर दौड़ने तक सीमित नहीं है बल्कि यात्रियों को एक आरामदायक और शीतल सफर का अनुभव कराने के लिए तकनीकी सुधारों के साथ-साथ कड़े प्रोटोकॉल का भी सहारा ले रही है। यह वॉर रूम और पर्दों की अनिवार्यता आने वाले महीनों में रेलवे की कार्यप्रणाली का एक अहम हिस्सा बनी रहेगी जिससे करोड़ों यात्रियों का सफर सुरक्षित और सुखद बनाया जा सके.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

