पमरे के रीवा स्टेशन में नैरो-गेज डीजल लोकोमोटिव की हेरिटेज लोको के रूप में की गई स्थापना

पमरे के रीवा स्टेशन में नैरो-गेज डीजल लोकोमोटिव की हेरिटेज लोको के रूप में की गई स्थापना

प्रेषित समय :18:34:11 PM / Tue, May 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. ट्रेनों में यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्राप्त हो, इसके लिए भारतीय रेलवे में समय के साथ-साथ नये अविष्कार किये गए एवं आज भी किये जा रहे हैं. भाप के इंजन से लेकर आज उच्च क्षमता वाले विद्युत इंजिन के कारण आज भारतीय ट्रेनें लम्बी दूरी के गंतव्य स्थल को भी कम से कम समय में पहुंच रही है.

नैरो गेज व मीटर गेज के रेलवे ट्रैक में ट्रेनों की गति अपेक्षाकृत कम होती थी द्य अत:  रेलवे ने नैरो गेज व मीटर गेज के रेलवे ट्रैक को गेज परिवर्तन द्वारा ब्रॉड गेज में बदलने के कारण ट्रेनों की गति आज 160 कि.मी./घंटा  तक हो पायी हैं. इसी प्रकार कोचों एवं वैगनों में भी अनेक मॉडिफिकेशन होने के कारण भारतीय कोच अधिक गति से सुरक्षित तरीके से संचालित किये जा रहे हैं.

इन पुराने भाप के इंजनों व नैरो गेज कोचों व वैगनों का विरासत के रूप में संरक्षण होने से नई पीढ़ी को रेलवे के इतिहास, पुराने समय की इंजीनियरिंग और कार्य प्रणालियों के बारे में जानने के अवसर के प्राप्त होने के साथ –साथ हमारे अतीत और संस्कृति की झलक प्राप्त होती हैं. अत: भारतीय रेलवे में हेरिटेज (विरासत) का अत्यंत महत्व है द्य  युवा पीढ़ी को पुरानी धरोहरों  से परिचित कराने के उद्देश्य प्रति वर्ष 18 अप्रैल को World Heritage Day विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है. यह दिन हमें याद दिलाता है कि विरासतों को संभालना हमारी जिम्मेदारी है.

इसी उद्देश्य से, पश्चिम मध्य  रेल के जबलपुर मंडल ने नैरो-गेज डीजल लोकोमोटिव को रीवा स्टेशन के प्लेटफार्म नं.1 के बाहर सर्कुलेटिंग क्षेत्र में स्थापित किया गया हैं. यह नैरो-गेज डीजल लोकोमोटिव (लोको नंबर 513, ZDM5) को चितरंजन लोकोमोटिव वर्कशॉप द्वारा वर्ष 1991 में बनाया गया था. इस  लोकोमोटिव  इंजिन ने 31 मार्च 2023 तक अपनी सेवाएं दीं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-