नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर सामने आए कथित पेपर लीक मामले ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा सुरक्षा और कोचिंग नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परीक्षा के बाद सोशल मीडिया और विशेष रूप से व्हाट्सऐप पर तेजी से वायरल हुए एक हस्तलिखित “गेस पेपर” ने पूरे देश में सनसनी फैला दी। जांच में सामने आया कि इस गेस पेपर के लगभग १२० प्रश्न वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। मामला सामने आने के बाद राजस्थान पुलिस की विशेष अभियान शाखा ने जांच शुरू की और अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो भी पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने में जुट गया है। बढ़ते विवाद और व्यापक अनियमितताओं की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार यह मामला पारंपरिक पेपर लीक की घटनाओं से अलग और कहीं अधिक संगठित तरीके से अंजाम दिया गया। इस बार पूरा प्रश्नपत्र सीधे बेचने के बजाय कथित रूप से एक बड़ा हस्तलिखित “गेस पेपर” तैयार किया गया, जिसमें वास्तविक परीक्षा के कई प्रश्न शामिल थे। यही कारण है कि शुरुआती स्तर पर इसे सामान्य कोचिंग सामग्री समझा गया और यह तेजी से हजारों विद्यार्थियों तक पहुंच गया। जांच अधिकारियों का कहना है कि यह तरीका इतना सुनियोजित था कि परीक्षा से एक रात पहले तक यह सामग्री कई राज्यों में विद्यार्थियों के मोबाइल तक पहुंच चुकी थी।
राजस्थान विशेष अभियान शाखा के अधिकारियों के अनुसार मामला तब सामने आया जब परीक्षा के चार दिन बाद सीकर के कुछ विद्यार्थियों और एक कोचिंग संस्थान के कर्मचारियों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी से संपर्क कर संभावित पेपर लीक की शिकायत की। इसके बाद एजेंसी ने मामला राजस्थान पुलिस को सौंप दिया। शिकायत मिलते ही विशेष अभियान शाखा के वरिष्ठ अधिकारी सीकर पहुंचे और लगभग डेढ़ सौ पुलिसकर्मियों की टीम को जांच में लगाया गया। अधिकारियों ने सबसे पहले यह पता लगाने की कोशिश की कि हस्तलिखित गेस पेपर की पहली प्रति किसके पास पहुंची थी और फिर उसका डिजिटल प्रसार कैसे हुआ।
जांच में सामने आया कि महाराष्ट्र के नासिक निवासी और आयुर्वेद चिकित्सा पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष के छात्र Shubham Khairnar को इस गेस पेपर की पहली हस्तलिखित प्रति मिली थी। आरोप है कि उसने इसकी डिजिटल प्रतियां बनाकर व्हाट्सऐप के माध्यम से आगे भेजना शुरू किया। जांच एजेंसियों के मुताबिक यह सामग्री पहले गुरुग्राम के एक व्यक्ति तक पहुंची और वहां से राजस्थान, बिहार, उत्तराखंड, केरल, जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों में फैल गई। राजस्थान के चूरू जिले की एक छात्रा, जो केरल में पढ़ाई कर रही थी, को भी यह सामग्री मिली थी। उसने यह गेस पेपर अपने पिता को भेजा, जो चूरू में एक छात्रावास चलाते हैं। बाद में यह सामग्री छात्रावास के विद्यार्थियों और सीकर के कुछ कोचिंग संस्थानों तक पहुंच गई।
जांच अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क का सबसे खतरनाक पहलू इसकी गति और डिजिटल प्रसार था। परीक्षा से ठीक एक रात पहले हजारों विद्यार्थियों के मोबाइल पर यह सामग्री पहुंच चुकी थी। ऐसे में यह पता लगाना बेहद कठिन हो गया कि किस विद्यार्थी ने इसे केवल “गेस पेपर” समझकर देखा और किसे वास्तविक लीक की जानकारी थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह पहली बार है जब सोशल मीडिया और कोचिंग नेटवर्क के जरिए इतने बड़े स्तर पर पेपर लीक का प्रसार हुआ है।
जांच के दौरान पुलिस को “प्राइवेट माफिया” नामक एक व्हाट्सऐप समूह की जानकारी भी मिली, जिसके माध्यम से कथित रूप से यह सामग्री बेची और साझा की जा रही थी। कुछ विद्यार्थियों ने पैसे देकर यह सामग्री खरीदी, जबकि कई को यह मित्रों और कोचिंग संस्थानों के जरिए मुफ्त में मिल गई। पुलिस का कहना है कि इस पूरे मामले में कोचिंग संस्थानों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। जयपुर, सीकर और कोटा के कई कोचिंग केंद्रों से पूछताछ की जा रही है और डिजिटल उपकरणों की जांच भी की जा रही है।
विशेष अभियान शाखा के अधिकारियों के अनुसार अब तक बीस से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। नासिक से हिरासत में लिए गए शुभम खैरनार से लगातार पूछताछ हो रही है और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो भी उसे अपनी हिरासत में लेने की तैयारी कर रहा है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि वास्तविक प्रश्नपत्र तक पहुंच किस नेटवर्क की थी और हस्तलिखित गेस पेपर तैयार करने में किन लोगों की भूमिका रही।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला देश की परीक्षा प्रणाली के लिए गंभीर चेतावनी है। पिछले कुछ वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं, लेकिन इस बार जिस तरह डिजिटल मंचों, कोचिंग संस्थानों और निजी नेटवर्क का इस्तेमाल हुआ, उसने जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब केवल परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा पर्याप्त नहीं रह गई है, बल्कि डिजिटल संचार माध्यमों और कोचिंग उद्योग की निगरानी भी उतनी ही जरूरी हो गई है।
राजनीतिक स्तर पर भी यह मामला तेजी से गरमा गया है। छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कई स्थानों पर छात्रों ने प्रदर्शन कर परीक्षा प्रणाली में सुधार और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि लगातार हो रहे पेपर लीक युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं और इससे लाखों मेहनती छात्रों का भरोसा टूट रहा है।
उधर केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क को उजागर करने के लिए बहुस्तरीय जांच की जा रही है। डिजिटल डेटा, व्हाट्सऐप चैट, मोबाइल रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन की जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास हो रहा है कि इस पूरे गिरोह का संचालन कौन कर रहा था और इसके तार किन राज्यों तक फैले हुए हैं।
फिलहाल यह मामला केवल एक परीक्षा रद्द होने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने देश की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। लाखों छात्रों और अभिभावकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसियां इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंच पाती हैं या नहीं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार किस तरह की नई व्यवस्था लागू करती है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

