सीबीएसई 12वीं के नंबरों से नहीं मिलेगा सीधे दाखिला, डीयू और जेएनयू में अब सीयूईटी ही तय करेगा भविष्य

सीबीएसई 12वीं के नंबरों से नहीं मिलेगा सीधे दाखिला, डीयू और जेएनयू में अब सीयूईटी ही तय करेगा भविष्य

प्रेषित समय :22:21:58 PM / Wed, May 13th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई द्वारा 12वीं कक्षा का परिणाम घोषित किए जाने के बाद देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बोर्ड परीक्षा में मिले अंक देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों जैसे दिल्ली विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रवेश दिलाने के लिए पर्याप्त होंगे. हाल के वर्षों में देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव हुए हैं और अब केवल बोर्ड परीक्षा के अंक किसी छात्र के भविष्य का फैसला नहीं करते. अब टॉप विश्वविद्यालयों में दाखिले का सबसे बड़ा आधार कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट यानी सीयूईटी बन चुका है.

सीबीएसई 12वीं का रिजल्ट आने के बाद छात्रों के बीच उत्साह के साथ-साथ भ्रम की स्थिति भी दिखाई दे रही है. पहले जहां दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में प्रवेश पूरी तरह बोर्ड परीक्षा की कटऑफ पर आधारित होता था, वहीं अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. अब छात्रों को बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ प्रवेश परीक्षा में भी शानदार प्रदर्शन करना जरूरी हो गया है.

विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में सीबीएसई के अंक पूरी तरह महत्वहीन नहीं हुए हैं, लेकिन उनकी भूमिका बदल गई है. अब बोर्ड के अंक अंतिम चयन का आधार नहीं बल्कि योग्यता तय करने और शैक्षणिक विश्वसनीयता दिखाने का माध्यम बन गए हैं. कई मामलों में बोर्ड के अंक केवल टाई ब्रेकर के रूप में उपयोग किए जाते हैं, जब दो छात्रों के सीयूईटी स्कोर समान होते हैं.

दिल्ली विश्वविद्यालय में वर्ष 2026 के स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश पूरी तरह सीयूईटी यूजी 2026 के स्कोर पर आधारित किया जा रहा है. विश्वविद्यालय का कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम यानी सीएसएएस छात्रों को उनके सीयूईटी प्रदर्शन के आधार पर सीट आवंटित करता है. हालांकि कुछ विशेष पाठ्यक्रमों में न्यूनतम पात्रता प्रतिशत की शर्त अब भी लागू हो सकती है. ऐसे में बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक छात्रों को प्रारंभिक योग्यता हासिल करने में मदद जरूर करते हैं, लेकिन अंतिम चयन सीयूईटी स्कोर से ही तय होता है.

दिल्ली विश्वविद्यालय में हर वर्ष लाखों छात्र आवेदन करते हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा बेहद कठिन हो जाती है. पहले जहां 99 प्रतिशत तक की कटऑफ चर्चा का विषय बनती थी, वहीं अब छात्रों का पूरा ध्यान सीयूईटी परीक्षा पर केंद्रित हो गया है. शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बोर्ड परीक्षा के नंबरों का अत्यधिक दबाव कुछ हद तक कम हुआ है, लेकिन प्रतियोगिता का नया स्तर शुरू हो गया है.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी जेएनयू में भी अब अधिकतर स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश सीयूईटी स्कोर के आधार पर ही किया जा रहा है. यहां भी सीबीएसई या अन्य बोर्डों के अंक मुख्य रूप से पात्रता सुनिश्चित करने के लिए उपयोग किए जाते हैं. हालांकि अच्छे बोर्ड अंक हासिल करने वाले छात्र सामान्यतः प्रवेश परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करते हैं, लेकिन विश्वविद्यालय ने कहीं भी यह अनिवार्य नहीं किया है कि केवल अधिक प्रतिशत वाले छात्रों को ही प्रवेश मिलेगा.

जेएनयू में प्रवेश के इच्छुक छात्रों के लिए सीयूईटी परीक्षा में सही विषय चुनना भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विश्वविद्यालय के अनुसार छात्रों को सेक्शन आईए में अंग्रेजी और सेक्शन तीन में जनरल टेस्ट चुनना अनिवार्य है. इसके बाद मेरिट सीयूईटी स्कोर के आधार पर तैयार की जाती है.

केवल दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू ही नहीं, बल्कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और कई निजी विश्वविद्यालयों ने भी अब प्रवेश प्रक्रिया में सीयूईटी को प्राथमिकता दे दी है. इससे पूरे देश में विश्वविद्यालय प्रवेश व्यवस्था एक समान और केंद्रीकृत होती जा रही है.

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि नई व्यवस्था ने छात्रों के लिए अवसर भी बढ़ाए हैं. पहले बोर्ड कटऑफ के कारण कई प्रतिभाशाली छात्र पीछे रह जाते थे, लेकिन अब यदि किसी छात्र के बोर्ड परीक्षा में औसत अंक हैं और वह सीयूईटी में अच्छा प्रदर्शन करता है, तो उसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश मिलने की पूरी संभावना रहती है.

हालांकि इस व्यवस्था ने छात्रों की तैयारी का तरीका पूरी तरह बदल दिया है. अब छात्रों को बोर्ड परीक्षा और प्रवेश परीक्षा दोनों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है. कई छात्र बोर्ड परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ अलग से सीयूईटी की कोचिंग और अभ्यास भी कर रहे हैं. इससे छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं.

शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है that आने वाले वर्षों में सीयूईटी आधारित प्रवेश प्रणाली और अधिक मजबूत होगी. इसके जरिए देशभर के छात्रों को समान अवसर देने की कोशिश की जा रही है. हालांकि ग्रामीण और छोटे शहरों के छात्रों के लिए अभी भी जागरूकता और संसाधनों की चुनौती बनी हुई है.

सीबीएसई 12वीं परिणाम के बाद अब छात्रों का पूरा फोकस सीयूईटी यूजी 2026 पर है. छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी जा रही है कि वे केवल बोर्ड प्रतिशत पर निर्भर न रहें, बल्कि प्रवेश परीक्षा की तैयारी को भी समान महत्व दें. क्योंकि मौजूदा समय में देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों में प्रवेश की असली कुंजी अब सीयूईटी का प्रदर्शन बन चुका है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-