नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में देश की पहली सेमी हाईस्पीड रेल परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद गुजरात समेत पूरे देश में बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने अहमदाबाद और धोलेरा को जोड़ने वाली 134 किलोमीटर लंबी सेमी हाईस्पीड डबल लाइन रेल परियोजना को स्वीकृति दे दी है। करीब 20 हजार 667 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना अहमदाबाद से धोलेरा के बीच यात्रा समय को घटाकर मात्र 48 मिनट कर देगी। सरकार का दावा है कि यह परियोजना न केवल गुजरात के औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई गति देगी, बल्कि देश में भविष्य की सेमी हाईस्पीड रेल परियोजनाओं के लिए मॉडल के रूप में भी काम करेगी।
रेल मंत्रालय के अनुसार यह भारत की पहली सेमी हाईस्पीड रेल परियोजना होगी, जिसे स्वदेशी तकनीक के आधार पर विकसित किया जाएगा। परियोजना के तहत अहमदाबाद के सारखेज क्षेत्र से धोलेरा तक अत्याधुनिक डबल रेल लाइन बिछाई जाएगी। इस रेल कॉरिडोर से यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा सुविधा मिल सकेगी। इसके साथ ही प्रतिदिन आने-जाने वाले यात्रियों और व्यापारिक गतिविधियों को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह परियोजना अहमदाबाद, धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन, प्रस्तावित धोलेरा एयरपोर्ट और लोथल राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के बीच तेज कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएगी। वर्तमान में अहमदाबाद से धोलेरा की यात्रा में कई घंटे लग जाते हैं, लेकिन इस नई रेल परियोजना के शुरू होने के बाद लोग एक ही दिन में आना-जाना आसानी से कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे क्षेत्र में निवेश, उद्योग और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार धोलेरा को भविष्य के स्मार्ट औद्योगिक शहर के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां कई बड़े निवेश प्रस्तावित हैं और आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र गुजरात के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्रों में शामिल हो सकता है। ऐसे में सेमी हाईस्पीड रेल परियोजना धोलेरा के विकास को और अधिक गति देने का काम करेगी। परियोजना से अहमदाबाद और धोलेरा के बीच की दूरी केवल समय के हिसाब से ही नहीं बल्कि आर्थिक गतिविधियों के स्तर पर भी काफी कम हो जाएगी।
केंद्र सरकार ने इस परियोजना को प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को मजबूत करना है। सरकार का कहना है कि इस रेल परियोजना से लोगों, सामान और सेवाओं के आवागमन को नई रफ्तार मिलेगी। साथ ही परिवहन लागत में कमी आएगी और औद्योगिक गतिविधियां अधिक तेज होंगी।
रेल मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देगी। भारतीय रेलवे पहले से ही ऊर्जा दक्ष और कम प्रदूषण फैलाने वाला परिवहन माध्यम माना जाता है। अनुमान है कि इस रेल परियोजना के चलते देश में तेल आयात में लगभग 0.48 करोड़ लीटर की कमी आएगी। इसके साथ ही करीब 2 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रभाव लगभग 10 लाख पेड़ लगाने के बराबर माना जा सकता है।
इस परियोजना से गुजरात के अहमदाबाद जिले के करीब 284 गांवों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। इन गांवों की कुल आबादी लगभग पांच लाख बताई गई है। परियोजना के निर्माण और संचालन के दौरान हजारों लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के विजन को मजबूत करेगी।
रेल विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में रेलवे क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदलाव हुए हैं। वंदे भारत जैसी ट्रेनों की सफलता के बाद अब सेमी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की दिशा में कदम बढ़ाना रेलवे के आधुनिकीकरण की बड़ी पहल माना जा रहा है। अहमदाबाद-धोलेरा रेल परियोजना को भविष्य में देश के अन्य हिस्सों में बनने वाले सेमी हाईस्पीड नेटवर्क की आधारशिला के रूप में देखा जा रहा है।
परियोजना को लेकर उद्योग जगत में भी उत्साह का माहौल है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि इससे धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन को सीधा फायदा मिलेगा और विदेशी निवेश आकर्षित करने में भी मदद मिलेगी। तेजी से यात्रा सुविधा उपलब्ध होने से उद्योगों को बेहतर लॉजिस्टिक सपोर्ट मिलेगा, जिससे उत्पादन और व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
राजनीतिक और आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि केंद्र सरकार लगातार बुनियादी ढांचे पर बड़ा निवेश कर रही है। हाईवे, एयरपोर्ट, बंदरगाह और रेलवे परियोजनाओं के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों को तेज गति से जोड़ा जा रहा है। अहमदाबाद-धोलेरा सेमी हाईस्पीड रेल परियोजना को भी इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार परियोजना में आधुनिक ट्रैक तकनीक, उन्नत सिग्नलिंग सिस्टम और हाईस्पीड संचालन के लिए विशेष डिजाइन का उपयोग किया जाएगा। इससे यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक यात्रा अनुभव मिलेगा। हालांकि अभी परियोजना के निर्माण की समयसीमा को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि सरकार इसे प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा करने की कोशिश करेगी।
इस परियोजना के जरिए सरकार गुजरात को औद्योगिक और परिवहन के क्षेत्र में नई पहचान देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में यह रेल कॉरिडोर केवल अहमदाबाद और धोलेरा के बीच दूरी कम करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के आधुनिक परिवहन नेटवर्क के नए युग की शुरुआत के रूप में भी देखा जाएगा।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

