बेंगलुरु.कर्नाटक में व्हाट्सऐप के जरिए निवेश का लालच देकर एक बुजुर्ग से 75.4 लाख रुपये की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना ने एक बार फिर ऑनलाइन निवेश घोटालों और साइबर अपराधियों के बढ़ते नेटवर्क को उजागर कर दिया है। ठगों ने खुद को निवेश सलाहकार बताकर बुजुर्ग को भरोसे में लिया और फर्जी निवेश योजना के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लिए। मामला सामने आने के बाद साइबर सुरक्षा और डिजिटल सतर्कता को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है।
जानकारी के अनुसार कर्नाटक के हरिहर निवासी 71 वर्षीय बुजुर्ग को सबसे पहले व्हाट्सऐप के माध्यम से संपर्क किया गया। खुद को निवेश विशेषज्ञ बताने वाले ठगों ने उन्हें एक कथित निवेश प्लेटफॉर्म में पैसा लगाने का सुझाव दिया। आरोपियों ने दावा किया कि यह योजना ‘एसबीआई सिक्योरिटीज लिमिटेड’ से जुड़ी हुई है और इसमें निवेश करने पर रकम दोगुनी हो जाएगी। शुरुआत में बुजुर्ग को छोटे स्तर पर भरोसा दिलाया गया और धीरे-धीरे उन्हें बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया।
एफआईआर के अनुसार ठग लगातार बुजुर्ग के संपर्क में रहे और उन्हें नकली लाभ, फर्जी डैशबोर्ड और बढ़ते रिटर्न का लालच दिखाते रहे। धीरे-धीरे पीड़ित का भरोसा इतना बढ़ गया कि उन्होंने अलग-अलग किस्तों में कुल 75.4 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। लेकिन जब उन्होंने पैसा निकालने की कोशिश की तो उन्हें लगातार बहाने दिए जाने लगे। बाद में उनका संपर्क भी बंद हो गया और तब जाकर उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया के जरिए निवेश घोटालों की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। साइबर अपराधी अब लोगों को फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, नकली निवेश ऐप और बड़े मुनाफे के झूठे वादों के जरिए निशाना बना रहे हैं। खासकर बुजुर्ग और डिजिटल तकनीक से कम परिचित लोग आसानी से इनके जाल में फंस जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के घोटालों से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि किसी भी निवेश योजना पर आंख बंद कर भरोसा न किया जाए। किसी भी कंपनी या प्लेटफॉर्म में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता की जांच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी, भारतीय रिजर्व बैंक, एनएसई या आईआरडीएआई जैसी आधिकारिक वेबसाइटों पर जरूर करनी चाहिए। यदि कोई निवेश योजना व्हाट्सऐप, सोशल मीडिया या मैसेज के जरिए भेजी जा रही हो तो उस पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक ठग अक्सर लोगों पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाते हैं। वे सीमित समय के ऑफर, गारंटीड मुनाफा और तुरंत निवेश जैसे झूठे दावे करते हैं ताकि व्यक्ति बिना सोचे-समझे पैसा लगा दे। ऐसे मामलों में जल्दबाजी करने के बजाय समय लेकर जांच करना और किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से राय लेना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि किसी भी परिस्थिति में ओटीपी, यूपीआई पिन, बैंक पासवर्ड या कार्ड की गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। कोई भी वैध बैंक या वित्तीय संस्था इस तरह की जानकारी फोन या मैसेज के जरिए नहीं मांगती। यदि कोई व्यक्ति ऐसी जानकारी मांगता है तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए और इसकी शिकायत करनी चाहिए।
साइबर अपराधियों की एक और सामान्य चाल यह होती है कि वे शुरुआत में छोटे निवेश पर नकली मुनाफा दिखाकर भरोसा जीत लेते हैं। इसलिए यदि कोई नया निवेश प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करना हो तो पहले छोटी रकम से शुरुआत करनी चाहिए। यदि पैसे निकालने में दिक्कत आने लगे, अतिरिक्त टैक्स या शुल्क मांगा जाए या भुगतान रोक दिया जाए तो यह ठगी का बड़ा संकेत हो सकता है।
विशेषज्ञों ने लोगों को अपने मोबाइल और डिजिटल उपकरणों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करना चाहिए और व्हाट्सऐप पर आने वाले संदिग्ध लिंक या एपीके फाइल्स पर क्लिक करने से बचना चाहिए। इसके अलावा मोबाइल में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और एंटीवायरस सुरक्षा का इस्तेमाल जरूरी माना गया है।
यदि किसी व्यक्ति को साइबर ठगी का संदेह हो तो घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। सभी चैट, स्क्रीनशॉट, ट्रांजैक्शन रिसीट और लिंक सुरक्षित रखने चाहिए ताकि जांच में मदद मिल सके। साथ ही तुरंत बैंक को सूचना देकर भुगतान रोकने की कोशिश करनी चाहिए और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
कर्नाटक का यह मामला इस बात का बड़ा उदाहरण बन गया है कि डिजिटल युग में साइबर अपराधी किस तरह भरोसा, लालच और तकनीक का इस्तेमाल करके लोगों को ठग रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और सतर्कता ही ऐसे ऑनलाइन निवेश घोटालों से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

