घरेलू गैस की कालाबाजारी करने वाले किराना संचालकों को जेल, अवैध रिफिलिंग पर कोर्ट ने सुनाई सजा

घरेलू गैस की कालाबाजारी करने वाले किराना संचालकों को जेल, अवैध रिफिलिंग पर कोर्ट ने सुनाई सजा

प्रेषित समय :18:45:35 PM / Fri, May 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. घरेलू गैस सिलेंडरों की अवैध रिफिलिंग और कालाबाजारी करने वाले किराना दुकान संचालकों के खिलाफ अदालत ने सख्त रुख अपनाया है. जबलपुर के अपर सत्र न्यायालय ने किराना दुकान की आड़ में घरेलू एलपीजी गैस और मिट्टी के तेल का अवैध कारोबार करने वाले दो आरोपियों को एक-एक वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है. अदालत ने यह फैसला दांडिक अपील खारिज करते हुए सुनाया.

प्रकरण के अनुसार आरोपी अजय कुमार साहू और प्रीति साहू किराना दुकान संचालित करते थे. आरोप है कि दोनों किराना दुकान की आड़ में घरेलू गैस सिलेंडरों की अवैध रिफिलिंग और ब्लैक मार्केटिंग का काम कर रहे थे. मामले की शिकायत जिला खाद्य नियंत्रक अधिकारी, जिला खाद्य शाखा जबलपुर को प्राप्त हुई थी. शिकायत मिलने के बाद डिप्टी कलेक्टर के निर्देश पर संबंधित किराना दुकान में आकस्मिक जांच की गई.

जांच के दौरान मौके से कुल 10 घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर बरामद किए गए. इनमें तीन इंडेन कंपनी के भरे हुए सिलेंडर, दो भारत गैस कंपनी के सिलेंडर और पांच एचपी गैस कंपनी के सिलेंडर शामिल थे. इनमें कुछ सिलेंडर भरे हुए थे तो कुछ खाली पाए गए. जांच टीम ने जब सिलेंडरों और कारोबार से संबंधित दस्तावेज मांगे तो आरोपी कोई वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सके.

मौके पर मौजूद लोगों से पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि दुकान में घरेलू गैस सिलेंडर निर्धारित कीमत से करीब 500 रुपये अधिक राशि लेकर ब्लैक में बेचे जाते थे. इतना ही नहीं, एक सिलेंडर से दूसरे सिलेंडर में गैस ट्रांसफर करने का काम भी किया जाता था, जो सुरक्षा की दृष्टि से बेहद खतरनाक माना जाता है.

मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम और भारतीय विस्फोटक अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया. विचारण के बाद अदालत ने आरोपी प्रीति साहू और अजय कुमार साहू को आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3(7) के तहत एक वर्ष के सश्रम कारावास और 1000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया. इसके अलावा भारतीय विस्फोटक अधिनियम की धारा 5(9)(ख) के तहत भी दोनों आरोपियों को एक-एक वर्ष के सश्रम कारावास और 500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई.

अदालत ने यह भी आदेश दिया कि अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में आरोपियों को अतिरिक्त एक-एक माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा. फैसले के खिलाफ आरोपियों की ओर से दांडिक अपील दायर की गई थी, लेकिन 29वें अपर सत्र न्यायाधीश अनिल चौहान की अदालत ने अपील को निरस्त कर निचली अदालत के दंडादेश को बरकरार रखा.

मामले में शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक राजकुमार गुप्ता ने पैरवी करते हुए अदालत के समक्ष पक्ष रखा. अदालत ने अपने फैसले में माना कि घरेलू गैस सिलेंडरों की अवैध रिफिलिंग और कालाबाजारी न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि इससे बड़े हादसे की आशंका भी बनी रहती है.

खाद्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यवसायिक उपयोग और अवैध रिफिलिंग गंभीर अपराध है. इससे आम उपभोक्ताओं की सुरक्षा खतरे में पड़ती है और गैस वितरण व्यवस्था भी प्रभावित होती है. प्रशासन ने ऐसे मामलों में लगातार कार्रवाई जारी रखने की बात कही है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-