रेलवे वीआईपी कोटा फर्जीवाड़े में बड़ा एक्शन, दागी स्टेनो पर बर्खास्तगी का खतरा कई रेलकर्मी जांच के घेरे में

रेलवे वीआईपी कोटा फर्जीवाड़े में बड़ा एक्शन, दागी स्टेनो पर बर्खास्तगी का खतरा कई रेलकर्मी जांच के घेरे में

प्रेषित समय :22:42:34 PM / Mon, May 25th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. पश्चिम मध्य रेलवे में वीआईपी कोटा की कालाबाजारी और फर्जीवाड़े से जुड़े बड़े भ्रष्टाचार मामले में अब रेल प्रशासन ने सख्त कार्रवाई का रास्ता अपना लिया है. प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक कार्यालय में पदस्थ स्टेनो अमित आनंद के खिलाफ विभागीय जांच के बाद मेजर पेनल्टी चार्जशीट जारी कर दी गई है. इस कार्रवाई के साथ ही आरोपी कर्मचारी पर सेवा समाप्ति यानी नौकरी से बर्खास्त किए जाने का खतरा मंडराने लगा है. रेलवे के भीतर इस कार्रवाई के बाद हड़कंप की स्थिति बन गई है और कई अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच एजेंसियों के रडार पर आ गई है. विजिलेंस विभाग की गहन जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने के बाद अब पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं.

जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला वीआईपी कोटे की सीटों के अवैध आवंटन और उसकी कालाबाजारी से जुड़ा हुआ है. आरोप है कि प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक कार्यालय में पदस्थ स्टेनो अमित आनंद ने अपने पद और कार्यालयीय पहुंच का दुरुपयोग करते हुए उच्च अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर के माध्यम से वीआईपी कोटे की सीटें बुक कराईं. इन सीटों के बदले यात्रियों और दलालों से मोटी रकम वसूली जाती थी. रेलवे के नियमों के मुताबिक वीआईपी कोटा अत्यंत सीमित और विशेष परिस्थितियों में उपयोग के लिए निर्धारित होता है, लेकिन आरोपी ने इसे कमाई का जरिया बना लिया था.

करीब एक महीने पहले जब इस पूरे मामले की भनक रेलवे प्रशासन और विजिलेंस विभाग को लगी तो जांच शुरू की गई. प्रारंभिक जांच में कई संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल ट्रांजैक्शन सामने आए. इसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी स्टेनो अमित आनंद को निलंबित कर दिया था. लेकिन अब विभागीय जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने रेलवे प्रशासन को और अधिक सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया है.

जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी यात्रियों और एजेंटों से सीधे अपने बैंक खाते में यूपीआई के माध्यम से रकम ट्रांसफर करवाता था. डिजिटल भुगतान के जरिए अवैध कमाई का यह तरीका लंबे समय से चल रहा था. विजिलेंस टीम ने बैंक खातों, मोबाइल ट्रांजैक्शन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की, जिसमें कई संदिग्ध लेनदेन सामने आए हैं. अधिकारियों का मानना है कि यह कोई छोटा या व्यक्तिगत स्तर का खेल नहीं था बल्कि इसमें संगठित तरीके से नेटवर्क काम कर रहा था.

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि निलंबन के बाद भी आरोपी ने अपनी गतिविधियां बंद नहीं कीं. विभागीय सूत्रों के अनुसार सस्पेंशन अवधि के दौरान भी वह दूसरे रेलवे जोन में सक्रिय रहा और वहां भी वीआईपी कोटा के नाम पर सीटों की सेटिंग और कालाबाजारी का खेल जारी रखा. जांचकर्ताओं को जानकारी मिली है कि आरोपी ने अन्य जोन में भी अपने संपर्क बना रखे थे और वहीं से अवैध रूप से टिकटों का प्रबंधन कर रहा था. यह तथ्य सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन की चिंता और बढ़ गई है.

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के खिलाफ जारी की गई मेजर पेनल्टी चार्जशीट बेहद गंभीर श्रेणी की कार्रवाई है. इस प्रक्रिया के तहत दोष सिद्ध होने पर सेवा समाप्ति, वेतनवृद्धि रोकना, पेंशन लाभ प्रभावित करना या अन्य कठोर दंड दिए जा सकते हैं. रेलवे प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि भ्रष्टाचार और वीआईपी कोटे की कालाबाजारी में लिप्त किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा.

इस मामले के सामने आने के बाद पश्चिम मध्य रेलवे के कई विभागों में आंतरिक स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है. विजिलेंस विभाग अब उन कर्मचारियों की भी भूमिका खंगाल रहा है जिनकी संदिग्ध गतिविधियां सामने आई हैं. जांच एजेंसियों को आशंका है कि जाली हस्ताक्षर, सीट ब्लॉकिंग और टिकट आवंटन जैसे काम अकेले संभव नहीं थे और इसमें कार्यालय के कुछ अन्य कर्मचारी भी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल हो सकते हैं. कई कर्मचारियों के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और कार्यालयीय दस्तावेजों की जांच की जा रही है.

रेलवे के भीतर यह मामला चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है. कर्मचारी संगठनों और अधिकारियों के बीच भी इस बात को लेकर चिंता है कि यदि जांच का दायरा और बढ़ा तो कई और नाम सामने आ सकते हैं. सूत्रों का कहना है कि विजिलेंस विभाग इस पूरे रैकेट की तह तक जाने के लिए पुराने रिकॉर्ड भी खंगाल रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह खेल कब से चल रहा था और इससे रेलवे को कितना नुकसान हुआ.

यात्रियों के बीच भी इस पूरे मामले को लेकर नाराजगी दिखाई दे रही है. आम यात्रियों का कहना है कि जहां एक ओर उन्हें कन्फर्म टिकट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग पैसे लेकर वीआईपी कोटे का दुरुपयोग कर रहे थे. रेलवे प्रशासन अब इस मामले को उदाहरण बनाकर कड़ा संदेश देना चाहता है कि टिकट व्यवस्था में भ्रष्टाचार और हेराफेरी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी.

फिलहाल विभागीय जांच तेजी से जारी है और आने वाले दिनों में कुछ और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है. रेलवे प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यदि किसी भी कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. पश्चिम मध्य रेलवे में इस कार्रवाई के बाद पूरे महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और कई कर्मचारी अब जांच की जद में आने की आशंका से सहमे हुए हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-