सर्वर क्रैश और शिकायतों के बीच CBSE का बड़ा फैसला, 1 जून से फिर खुलेगा री-इवैल्यूएशन पोर्टल

सर्वर क्रैश और शिकायतों के बीच CBSE का बड़ा फैसला, 1 जून से फिर खुलेगा री-इवैल्यूएशन पोर्टल

प्रेषित समय :20:56:46 PM / Fri, May 29th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए री-इवैल्यूएशन और स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं की जांच प्रक्रिया को लेकर बड़ा फैसला लिया है. बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि री-इवैल्यूएशन के लिए ऑनलाइन पोर्टल अब 1 जून 2026 से खोला जाएगा. इससे पहले सोशल मीडिया और विभिन्न शैक्षणिक वेबसाइटों पर 29 मई से पोर्टल खुलने की खबरें प्रसारित हो रही थीं, जिससे छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई थी. सीबीएसई ने इन खबरों का खंडन करते हुए कहा है कि छात्र केवल बोर्ड की आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें.

दरअसल, इस वर्ष CBSE ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए पहली बार बड़े स्तर पर ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम लागू किया था. बोर्ड का दावा था कि इस डिजिटल प्रणाली से मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक और पारदर्शी बनेगी तथा अंक जोड़ने और डेटा एंट्री जैसी त्रुटियों में कमी आएगी. हालांकि परिणाम घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए. कई छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें अपेक्षा से काफी कम अंक मिले हैं और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गड़बड़ियां हुई हैं.

परिणामों के बाद लाखों छात्रों ने अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां मंगाने और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करना शुरू कर दिया. आवेदन प्रक्रिया शुरू होते ही बोर्ड का पोर्टल अत्यधिक दबाव के कारण प्रभावित होने लगा. शुरुआती तीन घंटों में ही लगभग 1.26 लाख आवेदन दर्ज होने की जानकारी सामने आई. इसके बाद सर्वर डाउन होने, भुगतान असफल होने और वेबसाइट के बार-बार क्रैश होने जैसी समस्याएं सामने आने लगीं. बड़ी संख्या में छात्रों ने शिकायत की कि उन्हें उत्तर पुस्तिकाओं की जो स्कैन कॉपियां उपलब्ध कराई गईं, उनमें कई पृष्ठ धुंधले थे और उत्तर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहे थे.

तकनीकी समस्याओं और छात्रों की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए सीबीएसई ने री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया था. बोर्ड ने कहा कि पोर्टल को तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनाने तथा छात्रों को परेशानी मुक्त सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक सुधार किए जा रहे हैं. अब बोर्ड ने घोषणा की है कि 1 जून से री-इवैल्यूएशन और संबंधित सेवाओं के लिए पोर्टल दोबारा शुरू किया जाएगा.

सीबीएसई अधिकारियों के अनुसार री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया कई चरणों में संचालित की जाती है. जिन छात्रों ने पहले अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका प्राप्त कर ली है, वे अब उन प्रश्नों को चिह्नित कर सकेंगे जहां उन्हें अंक देने में त्रुटि की आशंका है. प्रत्येक प्रश्न की पुनः जांच के लिए निर्धारित शुल्क जमा करना होगा, जिसके बाद विषय विशेषज्ञों की टीम उत्तरों का दोबारा मूल्यांकन करेगी. इस प्रक्रिया का उद्देश्य किसी भी मानवीय या तकनीकी त्रुटि को सुधारना और छात्रों को निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराना है.

बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 17 फरवरी से 10 अप्रैल के बीच आयोजित 12वीं बोर्ड परीक्षा में लगभग 17.68 लाख छात्र शामिल हुए थे. परीक्षा परिणाम घोषित होने पर 85.2 प्रतिशत छात्र सफल घोषित किए गए, जबकि पिछले वर्ष यह प्रतिशत 88.39 था. परिणामों में आई गिरावट और OSM प्रणाली को लेकर उठे सवालों के कारण बड़ी संख्या में छात्रों ने री-इवैल्यूएशन का विकल्प चुना. अनुमान है कि चार लाख से अधिक छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं की पुनः जांच के लिए आवेदन किया है, जो कुल परीक्षार्थियों का लगभग 22 प्रतिशत है.

इस पूरे विवाद ने राजनीतिक स्वरूप भी ले लिया है. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच होनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है और OSM प्रणाली में सामने आई गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है. दूसरी ओर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तकनीकी समस्याओं को स्वीकार करते हुए कहा कि यह प्रणाली पहली बार इतने बड़े स्तर पर लागू की गई है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रों की सभी शिकायतों का समाधान किया जाएगा और किसी भी छात्र से अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा.

इसी बीच ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली का संचालन करने वाली हैदराबाद स्थित कंपनी Coempt Edutech Pvt. Ltd. भी चर्चा में आ गई है. रिपोर्टों के अनुसार कंपनी पूर्व में ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कार्य करती थी और उस पर तेलंगाना बोर्ड परीक्षा मूल्यांकन से जुड़े विवादों के आरोप भी लग चुके हैं. हालांकि CBSE का कहना है कि OSM प्रणाली दीर्घकालीन दृष्टि से मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने में सहायक सिद्ध होगी.

फिलहाल बोर्ड ने छात्रों को सलाह दी है कि वे 1 जून से शुरू होने वाली प्रक्रिया के लिए अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं और आधिकारिक मार्किंग स्कीम का सावधानीपूर्वक अध्ययन कर लें. क्योंकि पोर्टल खुलने के बाद आवेदन की समय-सीमा सीमित होगी, इसलिए छात्रों को आवश्यक दस्तावेज और जानकारी पहले से तैयार रखने की सलाह दी गई है. अब देशभर के लाखों छात्र 1 जून का इंतजार कर रहे हैं, जब उन्हें अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराने और संभावित त्रुटियों को चुनौती देने का अवसर मिलेगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-