दंतेवाड़ा. छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले से इतिहास, संस्कृति और प्राचीन ज्ञान परंपरा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खोज सामने आई है. भारत सरकार के ज्ञान भारतम मिशन के तहत जिले में सर्वेक्षण के दौरान 5 प्राचीन शिलालेख और 2 दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियां खोजी गई हैं. विशेषज्ञों के अनुसार ये धरोहरें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रमाण हैं.
11वीं शताब्दी का तेलुगु शिलालेख मिला
दंतेवाड़ा के समलूर शिव मंदिर में 11वीं शताब्दी का एक प्राचीन शिलालेख मिला है, जिस पर तेलुगु भाषा में लेख अंकित है. इसके अलावा 18वीं से 20वीं शताब्दी के बीच कपड़े पर लिखी गई एक दुर्लभ पांडुलिपि भी मिली है, जिसने इतिहासकारों और शोधकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया है.
200 साल पुरानी ताड़पत्र पांडुलिपि भी बरामद
जिले के आवराभांटा गांव में एक युवक इंद्रजीत यादव के घर से लगभग 200 वर्ष पुरानी ताड़पत्र पांडुलिपि प्राप्त हुई है. यह पांडुलिपि उड़िया भाषा में लिखी गई है और इसे क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है.
बारसूर और दंतेश्वरी मंदिर में भी मिले शिलालेख
ऐतिहासिक नगरी बारसूर के मामा-भांचा मंदिर से 1060 से 1068 ईस्वी के बीच का एक प्राचीन शिलालेख मिला है, जिस पर भी तेलुगु भाषा अंकित है. वहीं, विश्व प्रसिद्ध मां दंतेश्वरी मंदिर परिसर में 13वीं शताब्दी के दो महत्वपूर्ण शिलालेख मिले हैं, जिनमें तेलुगु और देवनागरी लिपि का उपयोग किया गया है.
डिजिटल रूप से संरक्षित की जाएंगी धरोहरें
दंतेवाड़ा के एसडीएम लोकांश एलमा ने बताया कि संस्कृति मंत्रालय के ज्ञान भारतम मिशन के तहत जिले में सर्वे कराया जा रहा है. अब तक 5 शिलालेख और 2 पांडुलिपियां चिन्हित की गई हैं. इन धरोहरों का डिजिटल सर्वे और जियो-टैगिंग कर सुरक्षित संरक्षण किया जाएगा.
प्रशासन ने लोगों से की अपील
प्रशासन का मानना है कि दंतेवाड़ा की धरती में अभी भी कई अनमोल ऐतिहासिक धरोहरें छिपी हो सकती हैं. लोगों से अपील की गई है कि यदि उनके पास किसी भी प्रकार की प्राचीन पांडुलिपि, शिलालेख या ऐतिहासिक सामग्री हो तो इसकी जानकारी प्रशासन को दें, ताकि उसे भी सर्वे सूची में शामिल कर संरक्षित किया जा सके.
नई पीढ़ी को मिलेगा इतिहास से जुड़ने का अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में ऐसी खोजें न केवल इतिहास के नए अध्याय खोलती हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, भाषा और संस्कृति से जोड़ने का भी काम करेंगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

