नई दिल्ली. भारत की दिग्गज महिला पहलवान और ओलंपियन विनेश फोगाट का एशियन गेम्स 2026 में देश का प्रतिनिधित्व करने का सपना फिलहाल टूट गया है. शनिवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित चयन ट्रायल्स के 53 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल मुकाबले में विनेश को मीनाक्षी गोयत के हाथों 4-6 से हार का सामना करना पड़ा. इस हार के साथ एशियन गेम्स के लिए उनका चयन नहीं हो सका, लेकिन मुकाबले के बाद विनेश फोगाट ने स्पष्ट कर दिया कि वह इस हार से निराश जरूर हैं, परंतु उन्हें कोई पछतावा नहीं है. उन्होंने दावा किया कि जिस तरह पूरे सिस्टम के खिलाफ लड़ते हुए उन्होंने मुकाबला किया, उससे वह खुद को हारने वाली नहीं बल्कि विजेता मानती हैं.
मुकाबले के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए विनेश ने कहा कि उन्होंने अपनी ओर से शत-प्रतिशत प्रयास किया. उनके अनुसार किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह होता है कि वह मैट छोड़ते समय यह महसूस करे कि उसने अपनी पूरी क्षमता झोंक दी है. उन्होंने कहा कि उनके पास जितनी ऊर्जा थी, उन्होंने उसे पूरी तरह मुकाबले में लगा दिया और इसलिए उन्हें अपने प्रदर्शन को लेकर कोई पछतावा नहीं है.
विनेश ने कहा कि हार और जीत खेल का हिस्सा हैं. यह पहली बार नहीं है जब उन्हें हार का सामना करना पड़ा हो. खिलाड़ी हार से सीखता है और आगे बढ़ता है. लेकिन जब पूरा सिस्टम आपके खिलाफ खड़ा हो और फिर भी आप हिम्मत के साथ मैदान में उतरें, तब अपने आप को विजेता महसूस करना स्वाभाविक है. उन्होंने कहा कि वह और उनकी टीम एक तरफ थी जबकि पूरा तंत्र दूसरी तरफ खड़ा नजर आ रहा था, इसके बावजूद उन्होंने संघर्ष किया और आगे भी करती रहेंगी.
गौरतलब है कि एशियन गेम्स ट्रायल्स में भाग लेने से पहले भी विनेश फोगाट को लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी थी. मातृत्व अवकाश के बाद वापसी कर रही विनेश को डोपिंग टेस्ट से संबंधित तकनीकी कारणों का हवाला देकर ट्रायल में शामिल होने से रोका गया था. इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी थी. अदालत ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की नियुक्ति के भी निर्देश दिए थे.
ट्रायल्स के दौरान भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के प्रतिनिधि पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद रहे. अदालत के निर्देशों के बाद ही विनेश को 53 किलोग्राम वर्ग में हिस्सा लेने की अनुमति मिली. इससे पहले भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) उन्हें 50 किलोग्राम वर्ग में उतरने की सलाह दे रहा था.
मुकाबले के बाद विनेश ने एक बार फिर भारतीय कुश्ती महासंघ पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जो कुछ हुआ, उसे पूरे देश ने देखा है. उनके अनुसार चयन प्रक्रिया के दौरान कई ऐसे घटनाक्रम हुए, जिन्होंने निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि यह सब लंबे समय से चलता आ रहा है और लोग खुद देख सकते हैं कि क्या हुआ. हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान से स्पष्ट था कि वह चयन प्रक्रिया और प्रशासनिक रवैये से संतुष्ट नहीं हैं.
विनेश ने कहा कि सुबह से लेकर शाम तक लगातार समस्याएं सामने आती रहीं. हर अंक और हर फैसले को लेकर विवाद की स्थिति बनी रही. इसके बावजूद उन्होंने अपना ध्यान केवल कुश्ती पर केंद्रित रखने की कोशिश की. उनका कहना था कि उनका उद्देश्य सिर्फ निष्पक्ष अवसर प्राप्त करना था, ताकि वह अपनी क्षमता साबित कर सकें.
अपने व्यक्तिगत जीवन का जिक्र करते हुए विनेश ने कहा कि वह इस बात से खुश हैं कि उनका छोटा बेटा एक दिन यह देखेगा कि जब वह मात्र दस महीने का था, तब उसकी मां लगातार अभ्यास कर रही थी और देश के लिए लड़ रही थी. उन्होंने कहा कि वह अपने बच्चे के लिए प्रेरणा बनना चाहती हैं और यही भावना उन्हें लगातार आगे बढ़ने की ताकत देती है.
इस पूरे विवाद पर भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष संजय सिंह ने अलग राय रखी. उन्होंने ट्रायल्स को पूरी तरह निष्पक्ष बताते हुए कहा कि सभी मुकाबले पारदर्शी तरीके से आयोजित किए गए. उनके अनुसार चयन प्रक्रिया के दौरान रेफरी, अधिकारी, मीडिया और पर्यवेक्षक सभी मौजूद थे, इसलिए किसी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं थी. उन्होंने विजेता खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि हारने वाले खिलाड़ियों को और मेहनत कर भविष्य में मजबूत वापसी करनी चाहिए.
संजय सिंह ने यह भी कहा कि भारतीय ओलंपिक संघ और खेल मंत्रालय के प्रतिनिधियों की मौजूदगी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता को साबित करती है. उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि चयन को लेकर लगाए जा रहे आरोपों में कोई दम है.
विनेश फोगाट और डब्ल्यूएफआई के बीच विवाद पिछले कई वर्षों से भारतीय कुश्ती जगत का प्रमुख मुद्दा रहा है. महिला पहलवानों के आंदोलन से लेकर प्रशासनिक फैसलों तक, दोनों पक्षों के बीच कई बार टकराव देखने को मिला है. ऐसे में एशियन गेम्स ट्रायल्स भी इसी लंबे संघर्ष का एक नया अध्याय बन गए.
हालांकि एशियन गेम्स 2026 में खेलने का सपना फिलहाल अधूरा रह गया है, लेकिन विनेश फोगाट के तेवर बता रहे हैं कि वह हार मानने वाली नहीं हैं. उन्होंने साफ कहा कि वे अपने अधिकारों और निष्पक्ष खेल व्यवस्था के लिए आगे भी लड़ाई जारी रखेंगी. उनके अनुसार परिणाम चाहे जो भी हो, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना और मजबूती से खड़े रहना ही उनकी सबसे बड़ी जीत है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

