स्मैक की सप्लाई होने के चौंकाने वाले खुलासे के बाद नशे के नेटवर्क तक पहुंचना जबलपुर पुलिस के लिए चुनौती

स्मैक की सप्लाई होने के चौंकाने वाले खुलासे के बाद नशे के नेटवर्क तक पहुंचना जबलपुर पुलिस के लिए चुनौती

प्रेषित समय :19:44:14 PM / Tue, Jun 2nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. दमोह के स्टेट हाइवे पर स्थित सरदार पटेल ओवरब्रिज के पास से 12 लाख रुपए से अधिक मूल्य की स्मैक के साथ दबोचे गए दो शातिर तस्करों ने पूछताछ में जो सनसनीखेज खुलासा किया है, उसने जबलपुर में नशे के काले कारोबार की जड़ों को एक बार फिर उजागर कर दिया है. आरोपियों ने पुलिस के सामने यह कबूल किया है कि वे नशे की यह बड़ी खेप जबलपुर से खरीदकर लाए थे, जिसके बाद अब संस्कारधानी की पुलिस के सामने एक नई और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. हालांकि, इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद जबलपुर पुलिस की तरफ से धरातल पर किसी सघन तलाशी अभियान को शुरू करने या तस्करों के नेटवर्क को खंगालने के लिए की गई किसी बड़ी कार्रवाई की अभी तक कोई पुख्ता सूचना सामने नहीं आई है.

जबलपुर पुलिस इस इनपुट के बाद अंदरूनी तौर पर क्या कदम उठा रही है या उसका अगला एक्शन प्लान क्या है, यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो सका है. दमोह देहात थाना पुलिस को देर रात मुखबिर से सटीक सूचना मिली थी कि सरदार पटेल ओवरब्रिज पर दो संदिग्ध युवक भारी मात्रा में स्मैक की सप्लाई करने के लिए ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं. सूचना मिलते ही पुलिस की विशेष टीम ने मौके पर पहुंचकर ओवरब्रिज की घेराबंदी की थी. पुलिस की अचानक धमक देखते ही दोनों तस्करों ने घबराहट में अपने पास रखी स्मैक को नीचे फेंककर भागने का प्रयास किया, लेकिन मौके पर मुस्तैद पुलिस जवानों ने मुस्तैदी दिखाते हुए पीछा किया और दोनों को धर दबोचा. पकड़े गए आरोपियों की पहचान 51 वर्षीय राजू उर्फ राजेंद्र मिश्रा निवासी शोभानगर और 32 वर्षीय आशुतोष श्रीवास्तव निवासी गोपालगंज सागर के रूप में हुई है. पुलिस ने तस्करों के पास से जो स्मैक बरामद की है, उसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 12 लाख रुपए से अधिक आंकी जा रही है. इस बड़ी कामयाबी के बाद जब पुलिस ने आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने साफ तौर पर बताया कि वे यह स्मैक जबलपुर के किसी बड़े सप्लायर से लेकर आए थे और इसे दमोह व आसपास के जिलों में ऊंचे दामों पर बेचने की फिराक में घूम रहे थे.

स्मैक तस्करी का यह जबलपुर रूट उजागर होते ही पुलिस के आला अधिकारियों के कान खड़े हो गए हैं, क्योंकि यह बात साफ हो चुकी है कि शहर में कोई बड़ा सरगना बैठा है जो इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों की खेप खुलेआम बांट रहा है. इस मामले के सामने आने के बाद जबलपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने पिछले एक साल के भीतर शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई स्मैक बरामदगी के रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं. अगर पिछले एक साल के आंकड़ों और मुख्य ठिकानों पर नजर डाली जाए, तो जबलपुर में स्मैक तस्करी का जाल काफी गहराई तक फैल चुका है, जिस पर  पुलिस   ने समय-समय पर प्रहार भी किए हैं. पिछले एक वर्ष के भीतर जबलपुर के हनुमानताल, गोहलपुर, रांझी, ओमती, और संजीवनी नगर जैसे संवेदनशील इलाकों से करोड़ों रुपए मूल्य की स्मैक जब्त की जा चुकी है और दर्जनों पैडलर्स को सलाखों के पीछे भेजा गया है.

जबलपुर का हनुमानताल इलाका स्मैक की खरीद-फरोख्त के लिए सबसे बदनाम रहा है, जहां पिछले महीनों में पुलिस ने सिंधी कैंप और मक्का नगर के आसपास दबिश देकर कई महिला और पुरुष तस्करों को रंगे हाथों पकड़ा था. इन कार्रवाइयों में पुलिस ने केवल हनुमानताल क्षेत्र से ही करीब 40 लाख रुपए मूल्य की स्मैक जब्त की थी, जिसमें स्थानीय स्तर पर पुड़िया बनाकर बेचने वाले छोटे अपराधियों से लेकर अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े कूरियर तक शामिल थे. इसी तरह गोहलपुर और अमखेरा क्षेत्र में भी पुलिस ने एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था, जहां मुख्य रूप से युवाओं और छात्रों को निशाना बनाने वाले तस्कर सक्रिय थे. गोहलपुर पुलिस ने कंचनपुर और लेमा गार्डन के पास की गई नाकेबंदी के दौरान दो अलग-अलग मामलों में करीब 25 लाख रुपए की स्मैक बरामद करने में सफलता हासिल की थी.

शहरी इलाकों के साथ-साथ जबलपुर के उपनगरीय और औद्योगिक क्षेत्र जैसे रांझी और अधारताल भी इस अवैध कारोबार से अछूते नहीं रहे हैं. रांझी के मोहनिया और मस्ताना चौक के पास पिछले एक साल में लगातार कई छोटी-बड़ी कार्रवाइयां हुईं, जिनमें लगभग 15 लाख रुपए की स्मैक पकड़ी गई थी. इन मामलों में यह बात सामने आई थी कि तस्कर उत्तर प्रदेश और सीमावर्ती जिलों से ट्रेन के माध्यम से स्मैक की छोटी-छोटी खेप जबलपुर लाते थे और फिर यहां से उसे रीवा, सतना, दमोह और सागर जैसे पड़ोसी जिलों में सप्लाई किया जाता था. वहीं ओमती पुलिस ने भी रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के पास संदिग्धों की चेकिंग के दौरान कई बार स्मैक तस्करों को दबोचा है, जिनसे कुल मिलाकर करीब 18 लाख रुपए की नशीली सामग्री बरामद की गई थी. संजीवनी नगर और मदन महल पुलिस ने भी संयुक्त कार्रवाइयों में पॉश इलाकों के स्मैक सप्लायरों को बेनकाब किया था, जो हाई-प्रोफाइल पार्टियों और युवाओं को स्मैक की आपूर्ति कर रहे थे, जहां से लगभग 10 लाख रुपए की ड्रग्स जब्त की गई थी.

इस तरह यदि पिछले पूरे एक साल के आंकड़ों का कुल योग देखा जाए, तो जबलपुर पुलिस ने विभिन्न थाना क्षेत्रों से तकरीबन डेढ़ से दो किलोग्राम से अधिक उच्च गुणवत्ता वाली स्मैक बरामद की है, जिसकी कुल अनुमानित कीमत लगभग सवा करोड़ रुपए से भी अधिक बताई जा रही है. इस दौरान 80 से अधिक छोटे-बड़े स्मैक तस्करों और पैडलर्स को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है. इतनी बड़ी संख्या में गिरफ्तारियों और जब्ती के बावजूद दमोह में पकड़े गए तस्करों का जबलपुर कनेक्शन मिलना यह साबित करता है कि शहर में अभी भी स्मैक का कोई बड़ा सिंडिकेट पूरी तरह सक्रिय है, जो पुलिस की नजरों से बचकर काम कर रहा है. दमोह पुलिस से मिले इस ताजा इनपुट के बाद हालांकि जबलपुर पुलिस के खुफिया तंत्र और क्राइम ब्रांच की टीमों को अलर्ट किए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी तक सप्लायरों के खिलाफ कोई बड़ा एक्शन होता नहीं दिखा है.

शहर के प्रवेश द्वारों, बस स्टैंडों और रेलवे स्टेशनों पर चेकिंग पॉइंट सक्रिय करने तथा पूर्व में पकड़े गए स्मैक तस्करों के बेल रिकॉर्ड खंगालने की औपचारिकताएं तो शुरू कर दी गई हैं, लेकिन दमोह के आरोपियों को स्मैक बेचने वाले मुख्य जबलपुर के सौदागर तक पहुंचने में पुलिस को क्या सफलता मिली है या पुलिस इस दिशा में क्या ठोस रणनीति अपना रही है, इस पर रहस्य बरकरार है. स्थानीय स्तर पर पुलिस की इस चुप्पी और सुस्ती को लेकर अब सवाल भी उठने लगे हैं कि आखिर करोड़ों के इस काले कारोबार के मुख्य सरगना तक पहुंचने में इतनी ढिलाई क्यों बरती जा रही है, जबकि पड़ोसी जिले की पुलिस ने साफ तौर पर आरोपियों के बयानों के आधार पर जबलपुर की तरफ इशारा कर 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-