जबलपुर. जबलपुर में विधि स्नातक एवं प्रैक्टिसिंग हाई कोर्ट अधिवक्ता कविता दक्षिणामूर्ति की संदिग्ध मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. राजधानी भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा दहेज मृत्यु प्रकरण की तरह ही अब कविता दक्षिणामूर्ति की मौत को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. मृतका के पिता और चेन्नई के फिल्म निर्माता पी. दक्षिणामूर्ति का दावा है कि यह मामला कई मायनों में बेहद गंभीर है. उन्होंने आरोप लगाया है कि बेटी की शादी में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का दहेज देने के बावजूद ससुराल पक्ष द्वारा अस्पताल खोलने के लिए दो करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग की जा रही थी. पीड़ित परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सीबीआई जांच की मांग तेज कर दी है. बुधवार को परिवार की ओर से अपर सत्र न्यायालय में एक अंतरिम आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसमें मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराए जाने की मांग की गई.
कोर्ट में सुनवाई टली, परिवार को नहीं मिली तत्काल राहत
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ताओं मनीष वर्मा, विनोद सिसोदिया, डीसी सागर और निधि सोनकर ने बताया कि मामले में दायर रिवीजन याचिका पर सुनवाई होनी थी, लेकिन संबंधित न्यायाधीश के अवकाश पर रहने के कारण सुनवाई टल गई. इससे पहले कविता के पिता द्वारा गोराबाजार पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिलाने के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी दीपा पाल की अदालत में परिवाद दायर किया गया था, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी थी. इसके बाद उन्होंने अपर सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाया.
चेन्नई के फिल्म निर्माता की इकलौती बेटी थी कविता
कविता दक्षिणामूर्ति के पिता पी. दक्षिणामूर्ति चेन्नई के फिल्म निर्माता हैं. उनकी 27 वर्षीय बेटी कविता विधि स्नातक होने के साथ हाई कोर्ट में प्रैक्टिस भी कर रही थी. दक्षिणामूर्ति ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी के लिए योग्य वर की तलाश रिश्तेदारों के माध्यम से की थी. इसके बाद सेना में डॉक्टर के रूप में कार्यरत मेजर डॉ. ओम नागार्जुन का रिश्ता आया और दोनों का विवाह 2 मार्च 2025 को संपन्न हुआ. विवाह के समय ओम नागार्जुन की पोस्टिंग मणिपुर में थी, लेकिन बाद में उनका तबादला जबलपुर स्थित जैक आरआरसी में हो गया.
आर्मी एरिया में हुई थी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत
दक्षिणामूर्ति लगातार अपनी बेटी की मौत को संदिग्ध बताते हुए न्याय की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि जबलपुर के आर्मी एरिया स्थित जैक आरआरसी ऑफिसर्स मेस में उनकी बेटी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी. घटना के बाद से ही वे इस मामले में कई अनुत्तरित सवाल उठा रहे हैं.
परिवार का आरोप है कि जिस स्थान पर कविता कथित रूप से बाथरूम में गिरी थी, वहां से मिलिट्री अस्पताल की दूरी महज पांच से दस मिनट की थी. इसके बावजूद उसे अस्पताल पहुंचाने में दो घंटे 39 मिनट का समय लग गया. उनका कहना है कि यही तथ्य पूरे मामले को संदिग्ध बनाता है.
दहेज में दिया 100 तोला सोना, हीरे का हार और लग्जरी कार
पीड़ित पिता का आरोप है कि विवाह के दौरान उन्होंने दूल्हा पक्ष की मांग के अनुरूप 100 तोला सोना, लगभग 20 लाख रुपये मूल्य का हीरे का हार तथा करीब 30 लाख रुपये कीमत की एक्सयूवी-700 लग्जरी कार दी थी. उनके अनुसार शादी में कुल मिलाकर डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का खर्च किया गया था. इसके बावजूद ससुराल पक्ष संतुष्ट नहीं था और बाद में अतिरिक्त आर्थिक मांगें सामने आने लगीं.
शादी के बाद बढ़ गई प्रताड़ना, दो करोड़ की मांग का आरोप
दक्षिणामूर्ति का आरोप है कि विवाह के बाद उनके दामाद डॉ. ओम नागार्जुन, ससुर ओम गनपति और सास ओम प्रेमलता द्वारा अस्पताल खोलने के लिए दो करोड़ रुपये की मांग की जाने लगी. उन्होंने बताया कि आर्थिक परिस्थितियों के कारण इतनी बड़ी राशि देना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने मना कर दिया. इसके बाद उनकी बेटी के प्रति ससुराल पक्ष का व्यवहार बदल गया.
अधिवक्ता मनीष वर्मा का आरोप है कि कविता को मानसिक और घरेलू प्रताड़ना झेलनी पड़ रही थी. उन्होंने दावा किया कि हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली कविता से ससुराल के बड़े मकान के शौचालय तक साफ करवाए जाते थे. साथ ही उसकी सास द्वारा लगातार अपमानजनक टिप्पणियां भी की जाती थीं. परिवार का यह भी कहना है कि कविता की मृत्यु के बाद उसके मोबाइल फोन की जांच में पति-पत्नी के संबंध सामान्य नहीं होने के संकेत मिले.
शादी के तीन माह बाद हुई घटना
परिजनों के अनुसार 9 जून 2025 को कविता अपने पति के साथ मदुरै से हैदराबाद होते हुए जबलपुर पहुंची थी. दोनों जैक आरआरसी के ऑफिसर्स मेस में ठहरे हुए थे. उसी रात करीब 9.30 बजे कविता फेस वॉश करने के लिए बाथरूम गई. आरोप है कि वहीं वह गिर गई. इसके बाद उसके पति डॉ. ओम नागार्जुन उसे रात 10 बजे मेजर महेश की कार से मिलिट्री अस्पताल लेकर रवाना हुए.
पांच मिनट की दूरी, फिर भी अस्पताल पहुंचने में लगे ढाई घंटे से अधिक
परिजनों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि ऑफिसर्स मेस से मिलिट्री अस्पताल की दूरी महज पांच मिनट थी, फिर भी कविता को अस्पताल रात 12.39 बजे पहुंचाया गया. यानी अस्पताल पहुंचने में दो घंटे 39 मिनट का समय लग गया. परिवार का कहना है कि इस लंबे अंतराल के संबंध में अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है.
दक्षिणामूर्ति ने बताया कि उन्हें दामाद के पिता का फोन आया था कि उनकी बेटी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है. सूचना मिलते ही वह विमान से जबलपुर पहुंचे. उनका दावा है कि जब उन्होंने बेटी को देखा, तब वह वेंटिलेटर पर थी और लगभग आधे घंटे बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया. 10 जून 2025 को रात 8.10 बजे कविता की मृत्यु हो गई.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी उठाए सवाल
कविता के पिता ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट में मौत का कारण कार्डियक डिजीज बताया गया है, जबकि 25 अप्रैल 2025 को चेन्नई के राजीव गांधी शासकीय अस्पताल में हुई जांच में उसे केवल मामूली शुगर की समस्या बताई गई थी. हृदय संबंधी किसी गंभीर बीमारी का कोई उल्लेख नहीं था.
परिवार का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर के सामने के हिस्से में लगभग ढाई सेंटीमीटर बाय तीन सेंटीमीटर की चोट तथा पीछे पांच सेंटीमीटर बाय तीन सेंटीमीटर का रक्त का थक्का दर्ज है. अधिवक्ता मनीष वर्मा का कहना है कि सिर पर मिली दो गंभीर चोटें और अस्पताल पहुंचाने में हुई असामान्य देरी पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बनाती हैं.
एक साल बाद भी एफआईआर नहीं, पुलिस पर उठे सवाल
पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना को लगभग एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन गोराबाजार पुलिस ने अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की है. परिवार का कहना है कि यदि किसी महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु होती है और शरीर पर चोट के निशान भी पाए जाते हैं, तो पुलिस को तत्काल मामला दर्ज कर जांच करनी चाहिए थी.
अधिवक्ता मनीष वर्मा के अनुसार एक वर्ष पहले जिला अदालत में परिवाद दायर किया गया था, लेकिन आज तक डॉ. ओम नागार्जुन के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई. उनका आरोप है कि मामले में संबंधित पक्षों के बयान भी पूरी गंभीरता से दर्ज नहीं किए गए हैं. परिवार ने सवाल उठाया है कि आखिर किन कारणों से अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई और मामले को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया.
सीबीआई जांच की मांग पर टिकी परिवार की उम्मीद
पीड़ित परिवार का कहना है कि स्थानीय स्तर पर उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है. पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने और जांच में कथित उदासीनता के चलते उनका भरोसा प्रभावित हुआ है. इसलिए अब उनकी पूरी उम्मीद सीबीआई जांच पर टिकी हुई है. परिवार का मानना है कि स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच होने पर ही मौत के वास्तविक कारणों, कथित दहेज प्रताड़ना, अस्पताल पहुंचाने में हुई देरी और घटना से जुड़े सभी तथ्यों का खुलासा हो सकेगा.
फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और पीड़ित परिवार न्यायिक हस्तक्षेप के माध्यम से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है. पूरे प्रकरण पर अब लोगों की नजरें आगामी सुनवाई और अदालत के रुख पर टिकी हुई हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

